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चाइनीज मांझा बना राजधानी में खतरा, प्रतिबंधात्मक आदेश जारी आदेश जारी

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मध्य-प्रदेश की राजधानी में चाइनीज मांझे का बढ़ता उपयोग अब ट्रांसमिशन लाइनों के लिए गंभीर खतरे के रूप में सामने आया है।

मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने चेतावनी जारी की है कि ट्रांसमिशन लाइनों के पास चाइनीज मांझे से पतंग उड़ाना दुर्घटनाओं की आशंका को कई गुना बढ़ा देता है।

इसी खतरे को देखते हुए एमपी ट्रांसको ने जिला प्रशासन को पत्र भेजकर चाइनीज़ मांझे के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने तथा ट्रांसमिशन लाइनों के आसपास स्थित क्षेत्रों को संवेदनशील और खतरनाक जोन घोषित करने की मांग की है।

कंपनी ने बताया कि पिछले वर्ष भी एमपी ट्रांसको के अनुरोध पर जिला प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163(2) के तहत चाइनीज़ मांझे की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए थे।

प्रशासन ने इस कदम को जन सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया था। लेकिन इसके बावजूद शहर में पतंगबाजी के दौरान चाइनीज मांझे के उपयोग की घटनाएं जारी रहीं, जिनसे न केवल विद्युत आपूर्ति बाधित हुई बल्कि कई लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हर वर्ष पतंग उड़ाते समय चाइनीज़ मांझा ट्रांसमिशन लाइनों के संपर्क में आते ही जानलेवा हादसे हो जाते हैं। कई बार लोग झुलस जाते हैं, जबकि कुछ मामलों में मृत्यु तक की घटनाएं सामने आती हैं।

पिछले साल ऐसे हादसों को रोकने के लिए एमपी ट्रांसको ने पुराने शहर, कोहेफिज़ा, करोंद और छोला जैसे क्षेत्रों में जन जागरूकता अभियान चलाया था। पोस्टर, बैनर और पीए सिस्टम के माध्यम से लोगों को सतर्क किया गया था कि चाइनीज़ मांझा न केवल बिजली बाधित करता है बल्कि जीवन के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है।

प्रदेश के कई इलाकों में चाइनीज मांझे के ट्रांसमिशन लाइनों में उलझने से बिजली आपूर्ति रुक गई थी, जिससे हजारों उपभोक्ताओं को परेशानी हुई। दूसरी ओर, ऐसे हादसों में पतंग उड़ाने वाले भी गंभीर चोटों का शिकार हुए।

क्यों खतरनाक है चाइनीज मांझा

चाइनीज़ मांझा धातु और रासायनिक कोटिंग से बनाया जाता है, जिससे यह बिजली का अत्यंत सुचालक बन जाता है।

ट्रांसमिशन लाइनों से छूते ही यह बिजली प्रवाहित कर देता है।

पतंग उड़ाने वाले व्यक्ति को गंभीर झटका लगने का खतरा रहता है।

हाई वोल्टेज लाइनों में उलझने पर बड़ा विद्युत व्यवधान उत्पन्न होता है।

एमपी ट्रांसको का कहना है कि यदि अब भी सतर्कता नहीं बरती गई, तो भविष्य में बड़े हादसे हो सकते हैं। इसलिए सख्त प्रतिबंध और निरंतर निगरानी ही इसका एकमात्र समाधान है।

 

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