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मुरादाबाद में बीएलओ ने की आत्महत्या, एसआईआर टारगेट को पूरा न कर पाने को बताया वजह

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उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। SIR फॉर्म भरकर जमा करने की डेडलाइन 4 दिसंबर थी, लेकिन अब इसकी समय सीमा 7 दिनों के लिए बढ़ा दी गई है। इसी बीच SIR प्रक्रिया में लगे कर्मियों (बीएलओ-लेखपाल) की मौत का आंकड़ा भी लगातार बढ़ता जा रहा है।

मुरादाबाद, बलिया, देवरिया, लखनऊ, गोंडा समेत कई जिलों से बीएलओ के आत्महत्या करने और हार्ट अटैक समेत अन्य कारणों से मौत की घटनाएं बढ़ती ही जा रही हैं।

इसी SIR प्रक्रिया के बीच एक दिल दहला देने वाली खबर मुरादाबाद से सामने आई है। चुनावी काम का बोझ, लक्ष्य पूरा न कर पाने की चिंता, बेटियों का तबियत और हर दिन बढ़ता दबाव, इन सबके बीच एक शिक्षक बीएलओ की जान चली गई है। मुरादाबाद में 45 वर्षीय सर्वेश सिंह ने रविवार सुबह फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला हमेशा के लिए खत्म कर ली है।

दरअसल भोजपुर थाना क्षेत्र के ग्राम बहेडी ब्रहमनान निवासी 45 वर्षीय शिक्षक सर्वेश सिंह इस समय बीएलओ ड्यूटी में कार्यरत थे। उन्होंने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। सर्वेश सिंह मूल रूप से जाहिदपुर कम्पोजिट विद्यालय में शिक्षक के पद पर कार्यरत थे और लगभग आठ सालों से नौकरी कर रहे थे। वहीं घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई है। तलाशी के दौरान सर्वेश सिंह की जेब से तीन पेज का सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसे बेसिक शिक्षा अधिकारी को संबोधित किया गया है।

बीएलओ ने टारगेट को बताया आत्महत्या की वजह

सुसाइड नोट में सर्वेश ने खुद पर लगातार बढ़ रहे कार्यभार, लक्ष्य को पूरा न कर पाने की चिंता और अधिकारियों के दबाव को आत्महत्या का कारण बताया है। सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा कि रात-दिन काम करता रहा, फिर भी टार्गेट पूरा नहीं कर पा रहा हूं। सिर्फ 2-3 घंटे की ही नींद मिल पा रही है। सर्वेश ने पत्र में आगे लिखा कि पहली बार BLO बनने के कारण काम समझने में समय लगा, लेकिन समय कम था। मेरी 4 बेटियों हैं, जिसमें से दो की तबियत खराब रहती है, उनका ख्याल रखना। उन्होंने कहा कि मैं जीना चाहता हूं, लेकिन घुटन और डर बहुत बढ़ गया है।

तीन ने आत्महत्या और 6 की मौत बनी पहेली

बताते चले कि SIR अभियान के बीच कर्मचारियों पर काम का बोझ और दबाव लगातार चर्चा का विषय बनता जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, बीते एक हफ्ते में SIR ड्यूटी से जुड़े तीन बीएलओ आत्महत्या कर जान दे चुके हैं। वहींं छह अन्य कर्मियों की ड्यूटी के दौरान या स्वास्थ्य बिगड़ने से मौत हो गई है। परिजनों ने इन मौतों के पीछे कार्य का दबाव और छुट्टियों की अनदेखी को मुख्य कारण बताया है।

मुरादाबाद के सर्वेश सिंह की तरह बीते 25 नवंबर को फतेहपुर में लेखपाल रामलाल कोरी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। परिजनों के अनुसार शादी से एक दिन पहले वह छुट्टी के लिए प्रयास कर रहे थे, लेकिन छुट्टी नहीं मिल रही थी। आरोप है कि मेंहदी की रस्म वाले दिन कानूनगो घर पहुंचे और ड्यूटी में लापरवाही बताकर सस्पेंशन की धमकी दी। इससे मानसिक रूप से टूटकर रामलाल ने आत्महत्या कर ली। वहीं परिवार ने अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज करने की भी मांग उठाई थी।

इसी तरह गोंडा में बीएलओ विपिन यादव ने जहर खाकर जान दे दी थी। जहर खाने के बाद सामने आए वीडियो में उन्होंने SIR कार्य को लेकर अधिकारियों पर अत्यधिक दबाव और धमकी का आरोप लगाया था। विपिन यादव सहायक अध्यापक के रूप में तैनात थे।

तनाव नहीं झेल पा रहे

इसी तरह देवरिया में भी एसआईआर ड्यूटी में लगे लेखपाल आशीष कुमार (35) की मौत हो गई थी। परिवार का कहना है कि लगातार ड्यूटी प्रेशर और तनाव के चलते उन्हें हार्ट अटैक आ गया था। इसके बाद बीएलओ रंजू दुबे की भी संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। परिजनों ने दावा किया कि SIR काम का दबाव अधिक था, जिससे तबीयत बिगड़ गई और अस्पताल ले जाते समय उन्होंने दम तोड़ दिया था।

बीती 26 नवंबर को बरेली में बीएलओ संतोष कुमार गंगवार की एसआईआर फॉर्म वितरण के दौरान मौत हो गई। परिवार ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने काम का उन पर काफी दबाव डाल रखा था। संतोष की पत्नी की दो महीने पहले कैंसर से मौत हुई थी। वहीं अब उनके दो बच्चे अनाथ हो गए।

लखनऊ मलिहाबाद बीएलओ विजय कुमार वर्मा की भी ब्रेन हेमरेज के चलते मौत हो गई। परिवार ने एसआईआर प्रक्रिया के दबाव का अधिकारियों पर आरोप लगाया।अखिलेश यादव ने भी उनके परिवार को मदद दी। बता दें कि लगभग सभी मामलों में पीड़ितों के परिवारों ने काम के दबाव का जिक्र किया है। साथ ही वो असमायिक अपने करीबियों की मौत के जिम्मेदारों को जानना चाहते हैं।

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