23.9 C
Bhopal

अभी तो पूरा सीजन बाकी, पहली ही बारिश में जवाब दे रही भोपाल की सड़कें, वाहनों की हो रही फजीहत

प्रमुख खबरे

भोपाल। राजधानी भोपाल की सड़कें पहली ही बारिश में जवाब देने लगी है। एक से दूसरी छोर तक सड़कों पर गिट्टियां निकलनी शुरू हो गई है। कुछ क्षेत्रों में तो गढ्ढे हो गए है। वाहनों की अभी से फजीहत हो ही है। जैसे ही बारिश थमेगी और मौसम खुलेगा, धूल का स्तर लोगों को परेशानी में डालेगा।

विशेषज्ञों की माने तो सड़कें दो तरह से इंसानों को कमजोर करती हैं एक तो खराब सड़कों पर चलने से शरीर में कई तरह की असुविधा होती है, डॉक्टरों के पास भागना पड़ता है। जहां जाने के लिए निकले होते हैं, वहां पहुंचने में समय भी लग जाता है। इसके अलावा जिस वाहन से चलते हैं, वह भी खराब सड़कों की वजह से खस्ताहाल होने लगता है, बारकृबार काम मांगता है और इस तरह से संबंधित लोगों का समय और रुपए दोनों बर्बाद होते हैं।

चेताया गया था जिम्मेदारों को
सड़कों की हालत खराब होगी, इसको लेकर पहले ही जिम्मेदारों को चेताया था। जून 2025 के शुरुआत में मुदृदा उठाया गया था कि सड़कों के किनारे पर नालियां नहीं हैं, कई स्थानों पर सड़कों के बीच का हिस्सा उंचा नहीं किया। जिसकी वजह से सड़कों पर पानी थमेगा और सड़कें बर्बाद होंगी, तब भी जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया। तब यह भी बताया था कि डॉ. आंबेडकर ब्रिज पर पानी भर गया है, जो कि नया ब्रिज है। राहगीर परेशान हो रहे हैं। सीमेंट का इंस्ट्रक्चर लंबे समय तक पानी में रहने से खराब होगा।

अनदेखी पर दिलाया था ध्यान
नर्मदापुरम रोड पर प्रधान मैरिज गार्डन से 11 मिल बायपास के लिए 80 फिट रोड जाता है, यह पूरी तरह सीमेंट कांक्रीट से बना है, जो करीब 5 साल तक काम के बाद बनाया गया। इसमें जगहकृजगह पानी थम रहा है।
चेतक ब्रिज से 11 मिल तक मुख्य मार्ग पर करीब 500 स्थानों पर पानी थम जाता है। सड़क के किनारे नालियां भी नहीं है, बारिश का पानी घंटों थमा रहता है। यह पूरा रोड डामर से बना हुआ है।
बोर्ड आफिस से लेकर ज्योति चैराहे तक ढलान वाला हिस्सा है, यहां पानी निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण घंटों पानी थमा रहता है।
सुभाष स्मृति भवन से कर्मचारी चयन मंडल के बीच वाले मार्ग पर नालियों के नाम पर खानापूर्ति की है, जगहकृजगह होल बंद है। पानी ठीक से पास नहीं होता।

स्वास्थ्य पर विपरीत असर डालती हैं खराब सड़कें
सड़कों के खराब होने से कई नुकसान होते है। इनमें सबसे बड़ा नुकसान तो वायु प्रदूषण के रूप में सामने आता है। बारिश बंद होते ही ठंड का सीजन शुरू होता है, तब नमी रहती है। नमी में खराब सड़कों से फैलने वाली धूल के कण भारी हो जाते हैं जो वातावरण में निचले स्तर पर रहते हैं और सीधे लोगों द्वारा ली जाने वाली श्वास के साथ शरीर के अंदर जाकर नुकसान पहुंचाते हैं। इस स्थिति के कारण राष्ट्रीय स्तर पर कई बार मप्र की छवि प्रभावित हुई है।

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

ताज़ा खबरे