सराज घाटी में जब बादल फटे,नदियां उफनीं और पहाड़ दरकने लगे, तब हर ओर तबाही का मंजर था। कई चट्टानें बह गईं, रास्ते मिट गए, मकान ढह गए। मगर इन्हीं भयावह हालातों के बीच जंजैहली के कुथाह में स्थित पौराणिक पांडव शिला न सिर्फ सलामत रही, बल्कि अपने स्थान पर वैसे ही अडिग खड़ी मिली, जैसे सैकड़ों सालों से खड़ी रही है।
एक अंगुली से ही हिलती है यह शिला
इस शिला को लेकर आस्था इतनी गहरी है कि लोग इसे एक अंगुली से हिला सकते हैं, लेकिन अगर कोई जोर लगाकर दोनों हाथों से भी हिलाना चाहे तो यह टस से मस नहीं होती। यह किसी वैज्ञानिक रहस्य से कम नहीं, लेकिन आस्थावानों के लिए यह चमत्कार है। एक ऐसा चमत्कार, जिसे देखकर श्रद्धा और भावनाएं दोनों जुड़ जाती हैं।
भीम के हाथ से गिरा सत्तू का पेड़ा बन गया शिला
महाभारत काल से जुड़ी इस शिला के बारे में मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव इस क्षेत्र में रुके थे। कहते हैं, भीम के हाथ से गिरा सत्तू का पेड़ा यही शिला बन गया, जिसे आज तक लोग श्रद्धा से पूजते हैं।
निःसंतान महिलाएं यहां कंकड़ फेंकती हैं। यदि कंकड़ शिला पर टिक जाए, तो संतान सुख का आशीर्वाद मिलता है। लोगों की इस शिला के प्रति गहरी आस्था है व निसंतान महिलाएं कंकड़ फेंक कर संतान प्राप्ति की प्रार्थना करने पहुंचती हैं।
लोग बोले, हमारी आस्था की शिला अड़िग
बीते दिनों आई आपदा ने पांडवशिला गांव को भी नहीं छोड़ा। कई घर मलबे में समा गए, सेब के बगीचे बह गए और गांव की सड़कें गायब हो गईं। लेकिन जब ग्रामीणों की नजर उस शिला पर पड़ी, जो अब भी अपने स्थान पर डटी हुई थी, तो टूटे हुए दिलों में एक उम्मीद की लौ जली। कई ग्रामीणों ने कहा कि घर गया, सामान गया, पर हमारी आस्था की शिला जस की तस खड़ी है। शायद यही हमें फिर से खड़े होने की ताकत दे रही है।
हटाने की कोशिश की तो टूट गई जेसीबी मशीन
कहते हैं कि एक समय सड़क निर्माण के दौरान जब इस शिला को हटाने की कोशिश की गई थी, तो जेसीबी का अगला हिस्सा ही टूट गया था। तभी से लोगों की आस्था और गहरी हो गई है। इंटरनेट मीडिया पर यह शिला अब चर्चा का विषय बनी हुई है।