जबलपुर। जबलपुर के ब्रेन डेड 52 वर्षीय मजदूर ने कई मरीजों को नई जिंदगी दी है। मजदूर पूरन चौधरी की एक किडनी इंदौर बॉम्बे हॉस्पिटल तो दूसरी तो दूसरी दूसरी जबलपुर के दमोह नाका स्थित मेट्रो अस्पताल भेजी गई। दो किडनी के अलावा परिवार ने मृत व्यक्ति की आंखें और त्वचा भी दान की। दोनों किडनियों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए दो विशेष ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए। मेडिकल कॉलेज से इंदौर एयरपोर्ट तक पहला ग्रीन कॉरिडोर 25 किलोमीटर लंबा था, जबकि दूसरा ग्रीन कॉरिडोर दमोह नाका तक 8 किलोमीटर का था। इंदौर भेजी गई किडनी को पीएमश्री वायु सेवा के विशेष विमान से भेजा गया।
बताया जा रहा है भेड़ाघाट निवासी पूरन चौधरी दो दिन पहले काम करते समय ऊंची दीवार से गिर गए थे। परिजनों ने उन्हें इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने परिजनों को अंगदान के लिए प्रेरित किया, जिस पर वे सहमत हो गए। परिजनों की सहमति के बाद उनकी दोनों किडनियां दान की गईं। इनमें से एक किडनी इंदौर के बॉम्बे अस्पताल और दूसरी जबलपुर के दमोह नाका स्थित मेट्रो अस्पताल भेजी गई। डीएसपी बी.एन. प्रजापति ने बताया कि दोनों ग्रीन कॉरिडोर के लिए लगभग 150 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। किडनी ले जा रही एम्बुलेंस के साथ पुलिस की दो गाड़ियां भी मौजूद रहीं। पूरे अभियान के दौरान प्रशासन, डॉक्टरों और पुलिस की टीम ने समन्वय बनाकर इसे अंजाम दिया।
एयरपोर्ट से अस्पताल के बीच बनाया गया ग्रीन कॉरिडोर
बताया जा रहा है कि इंदौर बॉम्बे हॉस्पिटल के डिप्टी मेडिकल सुपरीटेंडेंट डॉ. अमित जोशी और डॉ.राजेंद्र सिंह की टीम जबलपुर पहुंची। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित हो रही पीएमश्री वायु पर्यटन सेवा के विशेष विमान से दोपहर 11.38 बजे किडनी इंदौर आई। एयरपोर्ट से अस्पताल के बीच ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया और ट्रैफिक रोककर 18 मिनट में किडनी बॉम्बे अस्पताल पहुंची। मुस्कान ग्रुप के सेवादार जीतू बंगानी एवं संदीपन आर्य ने बताया कि इंदौर में सबसे ज्यादा अंगदान हो रहे हैं। इस बार 63 वां ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।
डॉक्टरों पर सलाह पर परिवार ने लिया अंगदान का फैसला
मृतक के भतीजे माधव राज ने बताया कि उनके पिता दीवार पर खड़े होकर काम कर रहे थे, तभी अचानक तेज हवा के झोंके से संतुलन बिगड़ गया और वे नीचे गिर पड़े। इस दुर्घटना में उन्हें गंभीर चोट आई और ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। डॉक्टरों की सलाह पर परिवार ने अंगदान का फैसला किया। माधव के अनुसार, परिवार ने पूरन चौधरी की दोनों किडनियां और त्वचा दान की है, जबकि जल्द ही उनकी आंखें भी दान की जाएंगी। उन्होंने कहा, “हमें संतोष है कि उनके अंगदान से दो लोगों को नया जीवन मिलेगा।”
लीवर दान का विचार था, पर जरूरतमंद नहीं मिला
सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा ने बताया कि पूरन चौधरी के परिजनों ने लीवर दान करने की भी इच्छा जताई थी, लेकिन उपयुक्त जरूरतमंद मरीज न मिलने के कारण इसे संभव नहीं किया जा सका। उनकी त्वचा बर्न यूनिट में जरूरतमंद मरीजों और मेडिकल छात्रों के लिए उपयोग की जाएगी।