नई दिल्ली। हिंसाग्रस्त मणिपुर में 21 महीनों बाद स्थिति सामान्य होने के आसार हैं। ऐसा इसलिए की केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सड़कें ब्लॉक करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मणिपुर के हालातों को लेकर राज्यपाल अजय कुमार भल्ला के साथ समीक्षा बैठक में शामिल हुए अमित शाह ने सख्त निर्देश दिए है कि मणिपुर के सभी रास्ते खोले जाएं, साथ ही नशे के नेटवर्क को ध्वस्त करने किया जाए। बता दें कि मणिपुर में साल 2023 से जातीय हिंसा जारी है, जिसमें 250 से ज्यादा लोगों की जान चली गई है। बैठक में मणिपुर सरकार, सेना और अर्धसैनिक बलों के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए।
गृह मंत्री ने 8 मार्च से मणिपुर में सभी सड़कों पर बेरोकटोक आवाजाही सुनिश्चित करने को कहा है। गृह मंत्री अमित शाह ने निर्देश दिया कि 8 मार्च, 2025 से मणिपुर के सभी रास्तों पर जनता की मुक्त आवाजाही सुनिश्चित की जाए, रास्ते में अवरोध उत्पन्न करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। जबरन उगाही के सभी मामलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखी जाए। इसके अलावा उन्होंने कहा कि मणिपुर से लगने वाले इंटरनेशनल बॉर्डर पर आवाजाही के लिए चिन्हित किए गए प्रवेश स्थानों के दोनों तरफ बाड़ लगाने के काम को जल्द पूरा किया जाए। इसके साथ ही, मणिपुर को नशामुक्त बनाने के लिए नशे के व्यापार में लिप्त पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जाए।
शाह ने सुरक्षा स्थिति की भी ली जानकारी
सूत्रों ने बताया, गृह मंत्री ने मणिपुर में सुरक्षा स्थिति के बारे में जानकारी ली। सूबे में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर विस्तृत जानकारी दी गई। सूत्रों ने बताया कि मीटिंग का फोकस मई 2023 से पहले जैसी सामान्य स्थिति बनाने और तमाम समूहों के पास मौजूद अवैध और लूटे गए हथियारों को वापस सौंपने पर था। बता दें कि अगल-अलग समुदायों ने 20 फरवरी से अब-तक 300 से ज्यादा हथियार सरेंडर किए हैं। राज्यपाल ने 20 फरवरी को अनुरोध किया था कि हिंसा में लूटे गए हथियार सरेंडर कर दें। मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने उग्रवादियों से हथियार सरेंडर करने की समय सीमा 6 मार्च शाम 4 बजे तक बढ़ा दी। हिंसा के दौरान लूटे गए 87 तरह के हथियार, गोला-बारूद और अलग-अलग सामान लोग स्वेच्छा से सरेंडर कर रहे हैं। इंफाल ईस्ट, बिश्नुपुर, थौबल, कांगपोकपी, जिरीबाम, चुराचांदपुर और इंफाल वेस्ट जिलों में हथियार सरेंडर किए गए हैं। इनमें मैतेई ग्रुप अरम्बाई टेंगोल के सरेंडर किए गए 246 हथियार शामिल हैं।
सूबे में राष्ट्रपति शासन
मणिपुर में 13 फरवरी को एन बीरेन सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था। राज्य विधानसभा का कार्यकाल निलंबित कर दिया गया है, जो 2027 तक है। राज्यपाल द्वारा 20 फरवरी को अवैध और लूटे गए हथियार रखने वाले सभी लोगों को आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दिए जाने के बाद सुरक्षा समीक्षा की गई। सात दिनों के वक्त के दौरान, मुख्य रूप से घाटी के जिलों में 300 से ज्यादा हथियार जनता द्वारा लौटाए गए। इनमें मैतेई कट्टरपंथी समूह अरम्बाई टेंगोल द्वारा आत्मसमर्पण किए गए 246 आग्नेयास्त्र शामिल हैं।