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WHO ने मलेरिया को लेकर उठाया बड़ा कदम, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में तैयार R21 वैक्सीन का भारत में होगा निर्माण

एक रिपोर्ट के मुताबिक इस वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने तैयार किया है। इसका निर्माण भारत स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा किया जाएगा।

नई दिल्ली : मलेरिया की वजह से हर साल कई लोग गंभीर बीमार पड़ जाते है। इसी को ध्यान में रखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक बड़ा कदम उठाया है। जिसके तहत एक नए और अच्छे टीके की सिफारिस की गई है। जिसका नाम R21/मैट्रिक्स-एम है। ये पहले के टीकों के मुकाबले सस्ता भी है। जिससे इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सकेगा। दरअसल 25 से 29 सितंबर को टीकाकरण पर विशेषज्ञों का रणनीतिक सलाहकार समूह (SAGE) और मलेरिया नीति सलाहकार समूह (MPAG) की बैठक आयोजिक की गई थी। जिसमें इस नए टीके की सिफारिश की गई। WHO महानिदेशक ने भी इसका समर्थन किया था।

WHO ने की सिफारिश

WHO ने इससे पहले RTS,S/AS01 नाम की वैक्सीन की सिफारिश की थी। मामले में WHO डायरेक्टर जनरल घेब्येयियस ने कहा कि RTS,S/AS01 और R21 में ज्यादा फर्क नहीं है। दोनों ही असरदार हैं। हालांकि ये बताना मुश्किल है कि कौन ज्यादा असरदार है। दोनों टीकों को बच्चों में मलेरिया को रोकने के लिए सुरक्षित और प्रभावी पाया गया है।

अफ्रीका सबसे ज्यादा प्रभावित

आपको बता दें कि मलेरिया एक मच्छर जनित रोग है। अफ्रीकी क्षेत्र इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक वहां पर हर साल पांच लाख बच्चों की मौत इस बीमारी की वजह से हो रही है। मलेरिया के टीकों की दुनियाभर में बहुत मांग है। हालांकि RTS,S/AS01 की सप्लाई कम है। नई वैक्सीन के आने से ये उम्मीद जगी है कि इसे दुनिया के हर कोने में पहुंचाया जा सकेगा। मामले में WHO के महानिदेशक टेड्रोस एडनोम घेबियस ने कहा कि एक मलेरिया शोधकर्ता के रूप में, मैं उस दिन का सपना देखता था जब हमारे पास मलेरिया के खिलाफ एक सुरक्षित और प्रभावी टीका होगा। अब हमारे पास दो टीके हैं। ये काफी खुशी की बात है। RTS/S वैक्सीन की मांग आपूर्ति से कहीं ज्यादा है, इसलिए ये दूसरा टीका बच्चों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

भारत में बनेगी ये वैक्सीन

एक रिपोर्ट के मुताबिक इस वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने तैयार किया है। इसका निर्माण भारत स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा किया जाएगा। कंपनी ने हर साल 10 करोड़ डोज तैयार करने का लक्ष्य रखा है। माना जा रहा कि एक डोज की कीमत 166 रुपये से 332 रुपये के बीच होगी।

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