सियासी तर्जुमा

फिर धर्मयुद्ध की राह पर पन्नीरसेल्वम

ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के निष्कासित नेता ओ. पन्नीरसेल्वम ने 2017 में पार्टी में अपनी पुरानी स्थिति प्राप्त करने के लिए ‘धर्म युद्ध’ की शुरुआत की थी और एक बार फिर वह उसी रास्ते की ओर बढ़ते प्रतीत हो रहे हैं।

सोमवार को उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया और इस बार वह ‘धर्म युद्ध 2.0’ के लिए कमर कसते दिख रहे हैं। पन्नीरसेल्वम ने संवाददाताओं से कहा कि वह पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलेंगे, कानूनी कार्रवाई करेंगे और अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक के दो विरोधी नेताओं ई. के. पलानीस्वामी और पन्नीरसेल्वम के समर्थकों द्वारा पार्टी के कार्यालय के अंदर और बाहर हिंसा तथा तोड़ फोड़ किए जाने के बाद अधिकारियों ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय को सील कर दिया।
पन्नीरसेल्वम को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
इससे पहले पनीरसेल्वम ने वी. के. शशिकला के खिलाफ सालों पहले संघर्ष किया था और वह तथा पलानीस्वामी – दोनों धड़े एक साथ हो गए थे।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि मौजूदा संघर्ष में, इस तरह के कदमों के नतीजे अनिश्चित हैं। इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी भी अब तमिलनाडु में आक्रामक है और उसने अन्नाद्रमुक की आपसी कलह को लेकर अभी तक अपना रुख साफ नहीं किया है।
तीन बार मुख्यमंत्री रहने के बावजूद 2017 में पनीरसेल्वम उपमुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार हो गए थे।
पिछले साल विधानसभा चुनाव में द्रविड़ मुनेत्र कषगम की जीत के बाद, उन्होंने विधानसभा में पार्टी का उपनेता बनने का प्रस्ताव भी स्वीकार कर लिया था जबकि पलानीस्वामी विपक्ष के नेता बने। लेकिन पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद पनीरसेल्वम को विधानसभा में उपनेता पद खोना पड़गा।
पनीरसेल्वम पहले ही निर्वाचन आयोग से संपर्क कर चुके हैं और 27 जून को आयोग को सौंपे अपने ज्ञापन में दलील दी थी कि पार्टी में एकल नेतृत्व की मांग उठाकर उनकी उपेक्षा की गई और पार्टी के उपनियमों का उल्लंघन किया गया।
यह पूछे जाने पर कि इस कार्रवाई के बाद क्या स्थिति बन सकती है, राजनीतिक विश्लेषक सुमंत रमण ने पीटीआई-भाषा से कहा कि फिलहाल अन्नाद्रमुक में लौटने के लिए पनीरसेल्वम के पास बहुत विकल्प नहीं है।
राजनीतिक टिप्पणीकार एम. भरत कुमार ने कहा कि पन्नीरसेल्वम पार्टी के चुनाव चिह्न (दो पत्तियां) पर रोक के लिए पहल कर सकते हैं या पार्टी पर पलानीस्वामी की पकड़ कमजोर करने के लिए अन्य कानूनी कदम उठाने पर विचार कर सकते हैं।
उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘अगर भाजपा सहमत होती है तो पन्नीरसेल्वम उसमें शामिल हो सकते हैं या शशिकला का खेमा तैयार हो जाता है तो वह उसके साथ हाथ मिला सकते हैं। वह नयी पार्टी बनाने पर भी विचार कर सकते हैं। हालांकि, अन्नाद्रमुक में उनके लौटने और पिछली स्थिति हासिल करने की संभावना बहुत कम है।’’

साभार- पीटीआई-भाषा

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