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रूह कांप जाएंगी अंतिम संस्कार की ये परंपरा देखकर,शव का पिया जाता है सूप और…

एक महीने बाद शव को जलाकर उसकी राख एक बर्तन में रखे लेते हैं उसके बाद उसका सूप बनाकर पिया जाता है।

डेस्क : हर धर्म में अलगअलग तरीके से अंतिम संस्कार करने की परंपरा रही है। खासतौर से हिंदू धर्म में काफी ज्यादा मान्यताएं है। ऐसे में अलगअलग समुदायों में अलग _अलग परंपरा रही है,लेकिन इस परंपरा के बारे में जानकर आपके रोंडटे खड़े हो जाएंगे। जब भी किसी व्यक्ति की मौत होती है तो उसके गम में लोग आंसू बहाते हैं तो वही कई कई दिनों तक लोगो को उबरने का समय चाहिए होता है,लेकिन इंडोनेशिया के बाली में मृतक को जीवित की तरह माना जाता है। कहा जाता है कि वह अभी सो रहे हैं। इसके साथ यदि वहां रहने वाले लोगों में से किसी व्यक्ति का महिला की मौत हो जाती है तो ऐसी स्थिति में भी उनके परिवार वाले आंसू नहीं बहा सकते हैं।

शव को लटकाया जाता है चट्टानों पर

चीन और फिलीपींस में मान्यता है कि यदि शव को ऊंचाई पर लटका दिया जाए तो उसकी आत्मा सीधे स्वर्ग जाती हैं। इसीलिए यहां कई जगहों पर व्यक्ति की मौत होने के बाद उसके शव को ताबूत में रखकर ऊंची चट्टानों पर लटका दिया जाता है।

शव के टुकड़े करके क्यों खिलाया जाता है गिद्धों को

वहीं दूसरी और तिब्बत के बौद्ध समुदाय में इंसान की मौत के बाद उसके शव के छोटे-छोटे टुकड़े करके उन्हें गिद्धों को खिला दिया जाता है. इसे स्काई बुरियल के नाम से जाना जाता है। वहां के लोगों को मानना है कि गिद्धों की उड़ान के साथ व्यक्ति की आत्मा भी उड़कर स्वर्ग तक पहुंच जाती हैं।

शव की राख का सूप पीना

अमेजन के जंगलों में पाई जाने वाली यानोमानी जनजाति की अगर हम बात करें तो इनका शव का अंतिम संस्कार करने का तरीका काफी हैरान कर देने वाला है। यह लोग एंडोकैनिबलिज्म रिवाज को फॉलो करते हैं। इस रिवाज के मुताबिक, जब भी घर में किसी की मौत होती है तो वह पहले मृतक के शव को पत्तों से ढक कर कहीं रख देते हैं।

मृतक की आत्मा को मिलती है शांति
फिर एक महीने बाद शव को जलाकर उसकी राख एक बर्तन में रखे लेते हैं उसके बाद उसका सूप बनाकर पिया जाता है। इस समुदाय के लोगों को मानना है कि उसे मृत व्यक्ति को तभी शांति मिलती है जब उसके शव को रिश्तेदारों ने खाया हो।

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