नज़रिया

ऐसे आफताब से बच के रहना, नहीं तो 35 टुकड़ों में मिलोगी….

उसने तो प्यार किया और प्यार को हासिल करने के लिए अपना परिवार छोड़ा और बदले में उसे क्या मिला। 300 लीटर का फ्रिज जिसमें उसकी ही लाश के 35 टुकड़े रखें गए।

नई दिल्ली – अपने परिवार से लड़कर जिसके साथ जीने मरने की कसमें खाई थी, उसी ने प्यार में इतना बड़ा धोखा दिया.. ये शायद सपने में मायानगरी की लड़की श्रद्धा ने सोचा नहीं होगा। सपनों की नगरी मायानगरी से निकली श्रद्धा ने डेंटिंग साइट से मिलें आफताब पर इतना भरोसा कर लिया था कि सबके मना करने के बाद उसे “अपने” आफताब पर इतना भरोसा हो गया था वो उसे सबसे बड़ा सेक्युलर मानने लगी थी क्योंकि आफताब मंदिर जाता था। फिर उसी आफताब ने श्रद्धा की लाश की टुकड़ों को रखने के लिए 300 लीटर की फ्रिज खरीदा। खुद उसी आफताब ने अपनी श्रद्धा.. जिसके लिए साथ जीने मरने की कसमें उसने भी खाई थी, फिर भले ही वो झूठी कसमें हो। उसी श्रद्धा की लाश को चाकू से 35 टुकड़े में काटा। श्रद्धा को शायद जीते जी कोई खुशियां आफताब न दे पाया हो लेकिन मरने के बाद श्रद्धा की लाश से दुर्गंध न आए इसके लिए घर में खूब डियो और अगरबत्ती लगाई। लेकिन आफताब भूल गया था इसी धरती पर उसके गुनाहों का हिसाब होना हैं। आफताब को तो उसके गुनाहों का हिसाब मिल जाएगा लेकिन उस मासूम श्रद्धा की क्या गलती थी, उसने तो प्यार किया और प्यार को हासिल करने के लिए अपना परिवार छोड़ा और बदले में उसे क्या मिला। 300 लीटर का फ्रिज जिसमें उसकी ही लाश के 35 टुकड़े रखें गए।

माना जाता है कि शहरों की लड़कियों ज्यादा पढ़ी लिखी होती है, होशियार होती है। फिर आखिरकार श्रद्धा को क्या हो गया था। आखिर उसे ऐसा क्या नज़र आया उस आफताब ने जिसके खिलाफ उसे परिजन तक थे। उसके साथ जिंदगी जीन के लिए श्रद्धा दिल्ली के छतरपुर इलाके के जाकर एक किराए के फ्लैट में रहने लगी। आफताब से श्रद्धा ने ज्यादा तो कुछ नहीं मांगा था। उसने तो बस शादी की बात की थी, क्योंकि आफताब ने भी शादी का झूठा वादा करके उसे फंसाया था। घर छोड़ने पर मजबूर किया था। श्रद्धा ने तो उसी वादे को पूरा करने के लिए आफताब पर दबाव बनाया था। श्रद्धा भूल गई थी को आफताब तो केवल अपनी हवस को पूरा करने के लिए उसका इस्तेमाल कर रहा है। शादी तो उसे कभी करनी ही नहीं थी। नहीं तो कोई अपने प्यार का इतने शातिराना तरीके कत्ल नहीं करता है। श्रद्धा के बारे में तो कभी पता भी नहीं चल पाता वो उसका परिवार थी जिससे उसने तो नाता तोड़ दिया था लेकिन वे अपनी मासूम श्रद्धा को भूल नहीं पा रहे थे। जिनके कारण आज आफताब जेल में हैं। उसे जब पुलिसकर्मी उन जंगलों में लेकर गए जहां उसे श्रद्धा की लाश के टुकडों को फेंका था तब भी उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी।

खैर श्रद्धा तो अब इस दुनिया में नहीं है। लेकिन उसकी मौत जरूर उन लड़कियों के लिए सबक है, जो अपने ऐसे ही किसी आफताब का साथ पाने के लिए अपने परिजनों का छोड़ कर चली जाती है। शुरुआत में ऐसे आफताब आपको बहुत समय देते है, आपकी बहुत इज्जत करते हैं, हर फरमाइश पूरी करते हैं। लेकिन कुछ समय बाद ये भी बदल जाते हैं। श्रद्धा के साथ भी आफताब ने ऐसा ही किया था। तो सावधान रहिए.. सतर्क रहिए.. ऐसे आफताब आपके आस पास ही घूम रहे हैं। इनकी नजरें आप पर ही हैं। और अब आपको ही तय करना है कि क्या आपको ऐसा आशिक चाहिए जो आपकी लाश के 35 टुकड़े कर उसे फ्रीज में रख कर अपनी गर्लफ्रेंड के साथ उसी घर में संबंध बनाए। या फिर आपको वो लड़का चाहिए जो भले ही आपकी फरमाईश पूरी न कर पाए, समय न दे पाए, जो आपके सपनों को पूरा न कर पाएं, लेकिन उन्हें पूरा करने की कोशिश करें। जो जिंदगी भर आपका साथ निभाएं।

वैभव गुप्ता

वैभव गुप्ता मध्यप्रदेश की पत्रकारिता में जाना-पहचाना नाम हैं। मूलतः ग्वालियर निवासी गुप्ता ने भोपाल को अपनी कर्मस्थली बनाया और एक दशक से अधिक समय से यहां अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों में उल्लेखनीय सेवाएं दी हैं। वैभव गुप्ता राजनीतिक तथा सामाजिक मुद्दों पर भी नियमित रूप से लेखन कर रहे हैं।

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