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राम मंदिर पर फैसला सुनाने वाले पूर्व सीजेआई गोगोई को राष्ट्रपति ने राज्यसभा के लिए किया नॉमिनेट

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राम मंदिर पर फैसला सुनाने वाले पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई को सोमवार को राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया। वे 13 महीने तक सीजेआई रहे और 17 नवंबर 2019 को रिटायर हुए थे। उन्होंने अयोध्या के रामजन्म भूमि विवाद पर लगातार सुनवाई करके निपटारा किया था। राफेल लड़ाकू विमान की खरीद के मामले में केंद्र सरकार को क्लीन चिट दी थी। इससे पहले पूर्व जस्टिस रंगनाथ मिश्रा भी कांग्रेस से जुड़कर संसद सदस्य बन चुके हैं। वहीं, पूर्व सीजेआई पी.सतशिवम को मोदी सरकार ने केरल का पहला राज्यपाल बनाया था।  आगे पढ़ें

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पश्चिम बंगाल में गृहमंत्री ने ममता पर बोला हमला, कहा- सीएए के खिलाफ अल्पसंख्यकों को भड़काया

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ममता बनर्जी पर अयोध्या में राम मंदिर का विरोध करने का आरोप लगाया। कोलकाता में 'हम अन्याय नहीं सहेंगे' अभियान की शुरूआत करते हुए रविवार को उन्होंने कहा- ममता दीदी ने कांग्रेस, सपा, बसपा, वामपंथियों के साथ मिलकर राम मंदिर का विरोध किया। ममता ने अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध किया और नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ अल्पसंख्यकों को भड़काया। इस बीच, राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि दिल्ली कुछ दिनों से जल रही है। उन्होंने कहा- केंद्र की सत्ताधारी पार्टी दिल्ली चुनाव नहीं जीत सकी इसलिए उसने सांप्रदायिकता फैलाकर समाज को बांटने की कोशिश की।  आगे पढ़ें

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दिग्गी ने रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट गठन को लेकर पीएम को लिखा पत्र, कहा- एक धार्मिक ट्रस्ट में अपराधी और सरकारी लोगों का क्या काम है

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए गठित रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट लेकर सवाल उठाए हैं। इस संबंध में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2 पेज का पत्र लिखकर कई बिंदुओं पर आपत्ति जताई है। उन्होंने ट्रस्ट के गठन और इसमें शंकराचार्य को शामिल नहीं किए जाने पर आपत्ति जताई। पूछा- एक धार्मिक ट्रस्ट में अपराधी और सरकारी लोगों का क्या काम है? दिग्विजय ने अपनी चिट्ठी में हवाला दिया कि आरएसएस भगवान रामचंद्रजी को भगवान का अवतार नहीं मानती है। उन्हें मयार्दा पुरुष ही मानती है और उनका स्मारक बनाना चाहती है। सनातन धर्म में रामचंद्र भगवान के अवतार हैं। उनमें करोड़ों लोगों की आस्था है।  आगे पढ़ें

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स्वरूपानंद सरस्वती ने मोदी सरकार पर साधा निशाना, कहा- राम मंदिर की लड़ाई लड़ने वालों की अनदेखी की गई

स्वामी स्वरूपानंद ने नरसिंहपुर जिले के झोतेश्वर स्थित मणिदीप आश्रम में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जो 500 वर्षो से राम मंदिर के लिए लडाई लड़ रहे थे, जो कानूनी पक्ष एवं समाज के प्रतिनिधि हैं। ऐसे हिन्दू समाज की अनदेखी करके इस ट्रस्ट का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि इस ट्रस्ट में देश के शंकराचार्यो एवं धमार्चायों को दूर कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े लोगों को शामिल किया गया है।  आगे पढ़ें

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राम मंदिर ट्रस्ट के निर्माण पर उमा भारतीय ने कहा-यह गर्व और खुशी का दिन, बोलीं- हम भव्य राम मंदिर को बनते देखना चाहते हैं

भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमा भारती ने राम मंदिर ट्रस्ट के निर्माण पर कहा कि ये बेहद गर्व और खुशी का दिन है। हम भव्य राम मंदिर को बनते देखना चाहते हैं। अब मुझसे और आडवाणी जी से जुड़े 2 ट्रायल के लिए हम तैयार हैं। हम जो कर सकते हैं, करेंगे। मैंने शुरू से ही यह कहा है कि हम इसके लिए फांसी पर चढ़ने को भी तैयार हैं।  आगे पढ़ें

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राम मंदिर ट्रस्ट और दिल्ली चुनाव...

दिल्ली की सत्ता से बाईस साल से बाहर भाजपा यहां केजरीवाल को पटकनी देने की जी तोड़ कोशिश कर रही है। उसके लिए प्रतिष्ठा इसलिए भी दांव पर है कि अभी बीते साल ही उसने दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों पर भारी भरकम जीत हासिल की थी। इसके अलावा पिछले विधानसभा चुनाव में वो एक तरह से नेस्तनाबूत ही हो गई थी। सत्तर में से उसके खाते में केवल तीन सीटें आर्इं थी। इसलिए जो संभव हो सकता है, वो भाजपा चुनाव जीतने के लिए करेगी ही। केजरीवाल चाहे जितनी दिल्ली के विकास की बातें कर लें, भाजपा को पता है कि वो ऐसे कोई दावे कर चुनाव नहीं जीतेगी। वो जीतेगी तो शाहीनबाग, सीएए, राममंदिर, बटाला हाउस जैसे मुद्दे ही उसके मारक हथियार हो सकते हैं। लेकिन दिल्ली वो महानगर है, जिसके बारे में समझा जा सकता है कि यहां की अधिकांश आबादी सोच समझ कर फैसले लेने में सक्षम है।  आगे पढ़ें

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सात दिन की बैठक के बाद संघ ने सीएए और धारा 370 पर व्यापक जनसमर्थन जुटाने की बनाई योजना

संघ प्रमुख मोहन भागवत के सात दिनी प्रवास और बैठकों के दौर के बाद एक बात बिलकुल स्पष्ट हो गई है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नए साल का पहला एजेंडा नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) ही होगा। तीन दिन चली बैठकों में यूं तो प्रांतवार प्रतिनिधियों से उनके क्षेत्र के बारे में बात की गई, पर संघ ने पूरा ध्यान इस बिंदु पर केंद्रित किया, जिसे वह दशकों से अपना कोर मुद्दा मानता आया है। राम मंदिर, धारा 370 के बाद नागरिकता संशोधन कानून पर संगठन ने व्यापक जनसमर्थन जुटाने की योजना बनाई है। इसके तहत अब एक व्यक्ति के बजाय पूरे परिवार को जोड़कर यह बताया जाएगा कि सीएए देश के लिए क्यों जरूरी है। बीते 15 दिन से शाखाओं में भी चर्चा का यह बड़ा मुद्दा है।  आगे पढ़ें

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सत्यपाल मलिक ने कहा- भगवान रात की केवट और शबरी ने की थी मदद, अयोध्या में इनकी भी मूर्ति होना चाहिए स्थापित

गोवा के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर को लेकर सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि पर मंदिर बनाने वाले ट्रस्ट को मंदिर में केवट और शबरी की मूर्तियां भी स्थापित करनी चाहिए। ये दोनों जनजातीय और पिछड़े समुदाय से थे। केवट और शबरी ने लंका जाते समय भगवान राम की मदद की थी। ऐसे में मंदिर में इनकी मूर्तियां स्थापित करने के लिए भी स्थान आवंटित होना चाहिए।  आगे पढ़ें

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महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा- राम मंदिर के लिए अगल से ट्रस्ट बनाने की नहीं जरूरत

राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने बुधवार को कहा कि राम मंदिर के लिए अलग से ट्रस्ट बनाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इसके लिए पहले से ही एक ट्रस्ट अस्तित्व में है। सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को फैसला दिया था कि केंद्र मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का निर्माण करे। केंद्र ने इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। राम जन्मभूमि न्यास विश्व हिंदू परिषद (विहिप) द्वारा संचालित किया जाता है। नृत्य गोपाल दास ने कहा- राम जन्मभूमि न्यास पहले से ही है। हम इसे नया आकार दे सकते हैं और आवश्यकता के लिहाज से इसमें नए सदस्यों को शामिल किया जा सकता है।  आगे पढ़ें

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राम मंदिर निर्माण के लिए केन्द्र सरकार ट्रस्ट बनाने की जल्द शुरू करेगी प्रक्रिया, कोर्ट के आदेश का होगा अमल

अयोध्या विवाद में शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, केंद्र सरकार ट्रस्ट बनाने की प्रक्रिया जल्द शुरू करेगी। यही ट्रस्ट राम मंदिर का निर्माण और संचालन करेगा। सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्रालय सहित दूसरे विभागों के अधिकारी इसके लिए शुरूआती तकनीकी बिंदु तैयार करने में जुटे हैं। यह काम तेजी से किया जा रहा है, ताकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल किया जा सके।  आगे पढ़ें

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