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आम चुनाव से पहले सितंबर में भारत आएंगे इजरायल के पीएम नेतन्याहू, पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात

नेतन्याहू 20 जुलाई को इजरायल के प्रधानमंत्री के रूप में सबसे अधिक समय तक सेवारत रहने वाले व्यक्ति बन गए थे। उनसे पहले यह रेकॉर्ड यहूदी देश के प्रथम प्रधानमंत्री डेविड बेन गुरियोन के नाम था। इस समय नेतन्याहू को कड़ी राजनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में उनकी लिकुड पार्टी की स्थिति अस्थिर नजर आती है। नेतन्याहू के गठबंधन सरकार का गठन करने में विफल रहने के बाद इजरायली सांसदों ने मई में 45 के मुकाबले 74 मतों से नेसेट (संसद) को भंग करने और दोबारा आम चुनाव कराने की सिफारिश की थी।  आगे पढ़ें

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कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित का 81 साल की उम्र में निधन, पीएम समेत कई बड़े नेताओं ने जताया दुख

कांग्रेस में शीला दीक्षित का कद कितना बड़ा था, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे दिल्ली में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहीं। बतौर सीएम 15 साल यानी 1998 से 2013 तक दिल्ली में उनका सिक्का चलता था। हालांकि दिसंबर 2013 में अरविंद केजरीवाल के हाथों उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2014 में पार्टी ने उन्हें केरल राज्यपाल बना दिया, लेकिन शीला ने 25 अगस्त 2014 को इस पद से इस्तीफा दे दिया और सक्रिय राजनीति में लौट आईं।  आगे पढ़ें

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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बर्खास्त बीएसएफ जवान की याचिका पर पीएम को भेजा नोटिस

बता दें कि चुनाव के समय तेज बहादुर यादव की उम्मीदवारी खारिज हो गई थी। निर्वाचन अधिकारी ने तेज बहादुर का नामांकन रद्द कर दिया था। नामांकन रद्द होने पर तेज बहादुर ने कहा था, 'मेरा नामांकन गलत तरीके से रद्द किया गया। इस मामले में मैंने सबूत दिए भी। इसके बावजूद मेरा नामांकन रद्द कर दिया गया। हम इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।' हालांकि, बाद में उच्चतम न्यायालय ने तेज बहादुर की याचिका खारिज कर दी थी।  आगे पढ़ें

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...मगर दिल तो धड़कता रहे

सत्ता संभालने के बाद से ही कमलनाथ निरंतर मुसीबतों से दो-चार हो रहे हैं। उनके मंत्रिमंडल के अलग-अलग गुट जहां चार यार मिल जाएं.. की शैली में अपनी-अपनी ताकत दिखाने में जुटे हुए हैं। अध्यक्ष पद को लतियाते राहुल गांधी की हालत भी उम्रे-दराज मांगकर लाये थे चार दिन। दो आरजू में कट गये, दो इंतजार में। वाली हो गयी है। आरजू थी नरेंद्र मोदी को हराने की। अब उन्हें इंतजार है पार्टी के भीतर मौजूद निकम्मों के इस्तीफे का। एक ही गेंद पर चार रन यानी चौक्का तो गोपाल भार्गव ने भी बड़ी खूबसूरती से जड़ दिया। पौधारोपण की बात पर विधानसभा में ऐसी चुनौती दे दी कि शिवराज के खिलाफ जांच का पुख्ता इंतजाम हो गया। भार्गव स्वभाव से ही धाकड़ हैं। उस पर बुंदेलखंड का पानी उन्हें और ताकत से भरा हुआ है। फिर सबसे खास बात यह कि पौधारोपण से उनका दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं रहा था। इसलिए उन्हें जो कहना, करना था वह कह और कर गुजरे।  आगे पढ़ें

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जाधव की फांसी पर सीजेआई के निर्णय से पीएम ने जताई खुशी, कहा- न्याय की हुई जीत

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट कर कहा, 'कुलभूषण जाधव के फैसले से बहुत खुशी हुई। आखिरकार इंसाफ हुआ। पूरा भारत इस खुशी में कुलभूषण के परिवार के साथ शामिल है।' पूर्व गृह मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा, 'आईसीजे ने इस मामले में सही मायनों में इंसाफ किया है और मानवाधिकार, उचित प्रक्रिया एवं कानून को बरकरार रखा है।' नीदरलैंड स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत (आइसीजे) ने कहा कि कुलभूषण की सजा पर पाकिस्तान पुनर्विचार करे। इसके साथ ही कुलभूषण को काउंसलर एक्सेस की भी इजाजत दी गई है।  आगे पढ़ें

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17वीं लोकसभा का पहला सत्र तय समय से अधिक समय कर रहा काम, 20 वर्षों में सबसे ज्यादा चली कार्यवाही

संसदीय इतिहास के पिछले बीस सालों में कल के दिन सबसे ज्यादा देर तक कार्यवाही चली। इस दौरान प्रश्नकाल और शून्यकाल के अलावा आम बजट में रेलवे से जुड़ी अनुदान मांगों पर चर्चा की गई पर सबसे ज्यादा समय अनुदान मांगों की चर्चा को दिया गया। मंगलवार को भी निचले सदन ने आधी रात तक काम किया था। सदन के अबाध तरीके से काम करने के बावजूद पीएम मोदी ने मंगलवार को कहा था कि अगर जरूरत पड़ी, तो सत्र को कुछ दिनों के लिए बढ़ाया जाएगा क्योंकि काम को पूरा करना है। बताते चलें कि अगला शीत कालीन सत्र शुरू होने में करीब 4 से 5 महीने का अंतर होगा। लिहाजा, सरकार कई प्रमुख कानूनों को लंबित नहीं रखना चाहती है क्योंकि इनमें से कई बिल सरकार को प्रमुख एजेंडे में से एक है। अब तक सत्र में कम से कम आठ बिल पास हो चुके हैं।  आगे पढ़ें

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वजह नरेंद्र मोदी के गुस्से की

सन 2024 में एक बार फिर सत्ता में वापसी के लिए इस सरकार को जितने सख्त अनुशासन और भारी परिश्रम की दरकार है, वह तब ही संभव हो सकेगा, जब एक-एक सांसद और पार्टी का प्रत्येक पदाधिकारी खुद को अनुशासन एवं नियमों में पूरी तरह आबद्ध कर दे। इसके लिए वैसी ही सख्ती की जरूरत है, जो मोदी ने इस कार्यकाल के आरम्भ से ही दिखाई है। उत्तराखंड के विधायक कुंवर प्रवीण सिंह चैम्पियन को छह साल के लिए पार्टी से निकालना इसी दिशा में एक ऐसा कदम है, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए। read more  आगे पढ़ें

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संसदीय दल की बैठक में मोदी ने दिखाई सख्ती, ड्यूटी पर नहीं आने वाले मंत्रियों के मांगे नाम

भारतीय जनता पार्टी की संसदीय दल बैठक मंगलवार को संसद लाइब्रेरी बिल्डिंग में हुई। बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने की। इस दौरान पीएम ने सांसदों से समाज सेवा से जुड़ने के लिए कहा। साथ ही मंत्रियों के काम को लेकर सख्ती भी दिखाई। उन्होंने कहा कि ड्यूटी के बाद भी मंत्रियों के नहीं आने पर विपक्ष शिकायत करता है। उन्होंने ऐसे मंत्रियों के नाम भी मांगे जो ड्यूटी पर नहीं जाते।  आगे पढ़ें

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झा के गुस्से की ऐसी टाइमिंग

रामलाल तो वापस संघ में चले गये। रामलाल का भाजपा से संघ में लौटना ही अपने आप में एक बड़ी घटना है। शाह संगठन की बागडोर नड्डा के हाथ सौंपकर गृह मंत्रालय के बिगड़े ग्रह सुधारने में जुट गये हैं। मोदी लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद कांग्रेस मुक्त भारत के सपने को पूरा करने में लग गये हैं। इन सबके बीच किस मुहूर्त में झा ने ऐसा किया है, यह समझ नहीं आ पा रहा। झा पर्याप्त रूप से चतुरसुजान हैं। संबंध एवं संपर्क की ऊष्मा को जिलाये रखने का उनका अपना प्रभावी तरीका है। याददाश्त के धनी हैं। तो ऐसा क्यों नहीं हुआ कि इस तरह की बातें समय रहते ही कह दी गयीं? यदि चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण को चंद घंटे पहले यकायक रोका जाना चौंकाता है तो इन मिसाइलनुमा ट्वीट्स के प्रक्षेपण में इतनी देरी भी हैरत में डाल रही है। यदि वाकई संगठन में इतना कुछ गलत हो रहा था, तो झा की यह जिम्मेदारी थी कि उसी समय अपनी बात रखते। वह धाकड़ हैं। पत्रकारिता करते हुए ग्वालियर में बैठकर महल के खिलाफ लिखने तथा कहने का साहस उन्होंने दिखाया था। यदि वह खुलकर पहले ही यह सब कहते तो संभव था कि पार्टी उनकी बात पर विचार कर कुछ सुधारात्मक कदम उठाती। या फिर यह होता कि उन्हें ही उठाकर सुधार देती, लेकिन कुछ न कुछ तो होता ही ना! अब सांप के गुजर जाने के बाद लाठी पीटने का भला क्या औचित्य रह जाता है। read more  आगे पढ़ें

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दोपहर से शुरू हुई लोकसभा की कार्यवाही रात 12 बजे तक चली, 18 साल में पहली बार हुआ ऐसा

विपक्ष के मुताबिक, सरकार आम बजट में रेलवे में सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी), निगमीकरण और विनिवेश पर जोर देने की आड़ में निजीकरण की ओर ले जा रही है। सरकार की मंशा रेलवे को निजी हाथों में देना है। सरकार को बड़े वादे करने की बजाय रेलवे की वित्तीय स्थिति सुधारना चाहिए। विपक्ष ने एनडीए सरकार पर लोगों को बुलेट ट्रेन जैसे झूठे सपने दिखाने का भी आरोप लगाया।  आगे पढ़ें

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