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वाकई अजीत थे जोगी

राज्यसभा के सदस्य से लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद तक जोगी ने फिर पलट कर नहीं देखा। हां, मध्यप्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री की आड़ में दिग्विजय सिंह के खिलाफ कोशिशों में वह कामयाब नहीं हो सके, लेकिन यह कहना गलत होगा कि उनकी यह कोशिस फुस्स हो गई थी। बल्कि सच तो यह है कि जोगी की इन कोशिशों को काउंटर करने के लिए दिग्विजय सिंह को सारे पैंतरे अपनाने के लिए मजबूर हो जाना पड़ गया था। जिस शख्स ने राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले अर्जुन सिंह को भी धता बता दी, उसे ही जोगी के विरुद्ध दांतों तले पसीना बहाने के लिए विवश होना पड़ गया था। और जोगी की कामयाबी यह कि इतना सब होने के बाद भी दिग्विजय सिंह छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी राह का रोड़ा नहीं बन सके। read more  आगे पढ़ें

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दो महीने बाद कमलनाथ ने सीएम निवास किया खाली, मुख्यमंत्री शिवराज अच्छे मुहूर्त में जल्द करेंगे प्रवेश

करीब दो महीने बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने श्यामला हिल्स स्थित सीएम हाउस बुधवार को खाली कर दिया है। अब जल्द ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अच्छे मुहूर्त में इसमें शिफ्ट होंगे। कमलनाथ का श्यामला हिल्स पर ही एक अन्य बंगले में शिफ्ट होंगे। फिलहाल, कमलनाथ छिंदवाड़ा के दौरे पर हैं। गुरुवार को वहां से लौटने के बाद वे सीधे अपने नए निवास पर जाएंगे। दिसंबर 2018 में मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद कमलनाथ इस बंगले में जून 2019 में शिफ्ट हुए थे। वे करीब 11 महीने इस बंगले में रहे।  आगे पढ़ें

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समय तीन तिगाड़ा, काम बिगाड़ा का

बहनजी बीते समय से राजनीति में असफलताओं से जूझ रही हैं और निकट भविष्य में उनके लिए शुभ-लाभ के पट आसानी से खुलते नहीं दिख रहे। इसलिए मुमकिन है कि ऐसा होने तक वह कांग्रेस के लिए अपने गुस्से का ईंधन जलाये रखें। दूसरी बात यह भी है कि बसपा हो या सपा, ये दोनों दल उत्तरप्रदेश में सिर मार रही प्रियंका और कांग्रेस को किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेंगे। कारण यही है कि आखिर ये दोनों क्षेत्रीय दल पनपे तो कांग्रेस के वोट बैंक में ही सेंध लगाकर है। सवाल यह कि बसपा के इस रौद्र रूप का क्या भाजपा को कोई लाभ मिलेगा? जिन सीटों पर उपचुनाव हैं, वहाँ शिवराज और ज्योतिरादित्य का चेहरा ही मुख्य भूमिका अदा करेगा। चुनाव में मुख्य मुकाबला भी भाजपा तथा कांग्रेस के बीच ही होना तय है।  आगे पढ़ें

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गुस्सा अजय सिंह का...

राकेश सिंह की वापसी पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ही शिवपुरी में कराई थी। अब भला अजय सिंह 11 जुलाई 2013 को कैसे भूला सकते हैं। उस दिन शिवराज सरकार के खिलाफ विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक दल के उपनेता रहते हुए चौधरी राकेश सिंह ने सदन में ही अचानक पाला बदल लिया था। वे उसी दिन कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गए थे। 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने चौधरी राकेश सिंह को चुनाव लड़ाने की बजाय उनके भाई मुकेश चतुर्वेदी को मेहगांव से मैदान में उतारा था। मुकेश ने यहां से चुनाव जीत लिया था लेकिन राकेश सिंह को भाजपा ने पिछले पांच सालों में कहीं एडजस्ट नहीं किया। 2018 में मुकेश का टिकट काट कर भिंड से राकेश सिंह को जरूर चुनाव लड़वाया गया। read more  आगे पढ़ें

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लक्षमण सिंह से पूछिए यह सवाल.....

लक्ष्मण नामक अनुज को अपने भ्राताश्री यानी दिग्विजय सिंह की चिंता सता रही है। अंदाज खालिस, तुम न जाने किस जहां में खो गए वाला है। दिग्विजय सिंह ने एक ट्वीट कर श्रमिक वर्ग की आड़ में भाजपा पर निशाना साधा। कांवड़ में अपनी बच्चियों को लेकर तेलंगाना से छत्तीसगढ़ पैदल जा रहे मजदूर की तस्वीर साझा की। साथ में लाड़ली लक्ष्मी वाला नारा भी चस्पा कर दिया। इस पर अनुज ने प्रतिक्रिया दी। इस चिंतन के लिए भाई को सराहा और यह भी उलाहना जड़ दिया कि बड़े भैया राजनीति की चकाचौंध में न जाने कहां गुम हो गए थे। वेलकम बैक वाली इस पोस्ट की वह लाइन खासी गौरतलब है, जिसमें लक्ष्मण ने भाई के लिए लिखा है, लौट आइये, नहीं तो दुष्ट आपको निचोड़ते जाएंगे। यानी इस ट्वीट के मुताबिक जयेष्ठ भ्राता सियासी जंगल से घर वापसी का अभी आधा रास्ता ही तय कर सके हैं। read more  आगे पढ़ें

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राजाजी तुमसे दिल लगाने की सजा है......

राजनीतिक सहोदर के लिए इस उदारता को दिखाना खालिस फिल्मी मामला है। मुगले-आजम जैसा। फिल्म में अकबर द्वारा मौत की सजा सुनाये जाने पर अनारकली कहती है, शहंशाह की इन बेहिसाब बख्शीशों के बदले ये कनीज अकबर-ए -आजम को अपना खून माफ करती है। विशुद्ध इसी नाटकीय अंदाज में कमलनाथ ने अपनी सरकार की हत्या के जुर्म से सिंह को माफ कर दिया है, लेकिन बड़ी तरकीब से। ऐसा करने से पहले वे दिग्विजय की करतूतों के प्रति अपनी पीड़ा का इजहार कर गए। उन्होंने यह जता दिया कि महज पंद्रह महीने ही चल सकी सरकार के औंधे मुंह गिरने की मूल वजह उनका दिग्विजय पर आंख मूंद कर भरोसा करना रहा।  आगे पढ़ें

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धमकी भरे फोन आने से परेशान दिग्विजय ने मोबाइल किया बंद, ट्वीटर पर नंबर शेयर कर डीजीपी से की शिकायत

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपना मोबाइल नंबर बंद कर लिया है। इसकी जानकारी उन्होंने शुक्रवार को ट्वीटर के जरिए दी। दिग्विजय के मोबाइल पर पिछले 4-5 दिनों से अभद्र भाषा और धमकी देने के लगातार फोन कॉल्स आ रहे थे। सिंह ने इन फोन नंबर्स के स्क्रीनशॉट ट्वीटर पर शेयर किए हैं। उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी से की है और सर्विस प्रोवाइडर को भी इसकी जानकारी दी।  आगे पढ़ें

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'बगावत के पहले और बगावत' के बाद दिग्विजयी फार्मूला

चित्रगुप्त की कलयुगी शैली में उन्होंने कांग्रेसी बही-खाते में एक ओर अपने पुण्य और दूसरी ओर ज्योतिरादित्य के पाप की सोदाहरण एंट्री कर डाली। अखबार को भी किसी पुराने नमक का कर्ज चुकाना होगा। इसलिए वो सब कुछ पाठकों सामने परोस दिया, जो मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ है, क्या मेरे हक में फैसला देगा, वाली बात से इतर और कुछ भी नहीं है। आरएसएस के नाम पर सिंधिया के काम लगाने वाली यह कोशिश पढ़ने में बेहद रोचक बन पड़ी है। संघ की विचारधारा से कांग्रेसी संघर्ष का परिणाम दिग्विजय सिंह ने बताया नहीं। जिस विचारधारा से कांग्रेस संघर्ष कर रही है, वो पिछले दस साल से देश की केन्द्रीय सत्ता पर बहुमत के ठप्पे के साथ कायम हैं। तो फिर कांग्रेस ने संघर्ष किससे किया? या संघ की विचारधारा से कांग्रेस का यह संघर्ष देश ने अप्रासंगिक ठहरा दिया? मुझे यह वह आलेख लगा, जिसे दिग्विजय के छायाचित्र के साथ पढकर मन रेलवे लाइन के पास चला जाता है। जहां से लगी दीवारों पर इसी तरह के चित्र के साथ, शादी के पहले और शादी के बाद जैसी बात लिखी रहती है। यहां लगा कि बगावत के पहले और बगावत के बाद के लिए शर्तिया खानदानी नुस्खे बताये गये हों।read more  आगे पढ़ें

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हुजूर आते-आते बहुत देर कर दी

जिन विधायकों को इसके पहले तक चलो-चलो कहकर हांका जाता था, उन्हें ही हमारे साथ चलो की शैली में मनाने के जतन शुरू कर दिये गये। जो निर्दलीय तथा गैर-भाजपाई विधायक इस पूरे समय में उपेक्षा का रोना रोते रहे, उन्हें अब कहीं जाकर महत्व देने की प्रक्रिया शुरू की गयी। लेकिन ऐसा होने तक मामला हाथ से निकल चुका था। बिसाहूलाल सिंह जैसे दिग्विजय के पटु समर्थक की बगावत इस बात का पुख्ता सबूत थी कि नाथ अब अपने सियासी भाई की मदद से भी इस कटी पतंग वाले हालात पर काबू नहीं पा सकेंगे। नाथ गलती पर गलती करते रहे। इनमें से कई तो गुनाह की श्रेणी वाली रहीं। अफसरशाही को ताश के पत्तों की तरह फेंटने का प्रयोग राज्य के लिए बेहद घातक साबित हुआ। कमलनाथ की चक्की में अगर कोई वाकई बारिक पिसा तो वो इस प्रदेश का प्रशासन था और वो केवल एक मात्र सकारण पिसा? वे हजारों हर तरह के अफसर इस सकारण को जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे।read more  आगे पढ़ें

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मप्र की सियासत: बहुमत परीक्षण से पहले दिग्विजय सिंह ने मानी हार, कहा- कमलनाथ सरकार के पास नहीं हैं नंबर

मध्य प्रदेश में कमलनाथ की सरकार बचेगी या वहां बीजेपी का कमल खिलेगा, इसका फैसला आज शाम 5 बजे तक हो जाएगा। विधानसभा का विशेष सत्र 20 मार्च को दोपहर दो बजे बुलाया गया है। लेकिन इससे पहले कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने एक टीवी न्यूज चैनल से बातचीत में कहा कि 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद कमलनाथ सरकार के पास नंबर नहीं है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि पैसे और सत्ता के दमपर बहुमत वाली सरकार को अल्पमत में लाया गया है।  आगे पढ़ें

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