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वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम में उत्साहित निवेशकों ने सीएम से कहा- मप्र जल्द ही इकोनॉमिक फोर्स बनेगा

दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम की वार्षिक बैठक में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने निवेशकों के साथ कई दौर की बातचीत की। इससे उत्साहित निवेशकों ने कहा कि मप्र जल्द ही इकोनॉमिक फोर्स बनेगा। मुख्यमंत्री ने सभी को भरोसा भी दिलाया कि मप्र को भंडारण का हब बनाया जाएगा, क्योंकि यह देश के केंद्र में स्थित है। निकट भविष्य में लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित होगा। इससे जुड़े उद्योगपतियों से मुख्यमंत्री ने अलग से बात की। दावोस में वार्षिक बैठक का बुधवार को दूसरा दिन था। मुख्यमंत्री ने विश्व के नामी उद्योगपतियों के साथ मप्र में सूचना प्रौद्योगिकी, स्वागत क्षेत्र और पर्यटन के नए क्षेत्रों में निवेश पर बात की।  आगे पढ़ें

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तो फिर काहे के कमलनाथ

2019 में लोकसभा की करारी हार के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेसाध्यक्ष का पद भले ही जिद करके छोड़ दिया हो लेकिन पर्दे के पीछे से कठपुतलियों की डोर अभी उनके ही हाथ में है। अगर इस समिति पर नजर डालेंगे तो साफ समझ आएगा कि सब कुछ राहुल गांधी के इशारे पर ही हुआ है। समिति में मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को छोड़ दिया जाए तो बाकी सब पर राहुल गांधी की छाप साफ नजर आएगी। समिति में पूर्व प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर इकलौते अरूण यादव शामिल किए गए। अरूण के कांटेक्ट सीधे सोनिया और राहुल दोनों तक हैं। बाकी कांतिलाल भूरिया और सुरेश पचौरी को इस लायक नहीं समझा गया। जाहिर है एक की नजदीकी केन्द्र में लंबे समय तक मंत्रिपद पर रहने के बाद दिग्विजय सिंह तक सीमित है तो दूसरे की पार्टी के राजनीतिक प्रबंधक अहमद पटेल तक। पर शायद अहमद पटेल सोनिया गांधी के दाएं-बाएं हो लेकिन राहुल से उनका वास्ता बेपटरी ज्यादा है।  आगे पढ़ें

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सिंधिया ने कहा- प्रदेश के विकास के लिए अभी तक मुझसे चर्चा नहीं की गई, पूछने पर राय जरूर दूंगा

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि मध्य प्रदेश के विकास के लिए अभी तक उनसे कोई चर्चा नहीं की गई है। जब उनसे इस बारे में पूछा जाएगा तो वे अपनी राय जरूर देंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अभी सभी क्षेत्र में बहुत काम होना बाकी है। रविवार सुबह ज्योतिरादित्य भोपाल में चिकित्सा शिक्षा मंत्री विजय लक्ष्मी साधौ के यहां पहुंचे थे। सिंधिया रविवार को भोपाल में कई कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे।  आगे पढ़ें

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माफिया पर सख्ती: 128 सोसायटियों में करीब 800 शिकायतें आई, 15 दिन में कराई जाएगी जांच, जांच पूरी होने पर 2000 लोगों को दिया जाएगा प्लाट

मुख्यमंत्री कमलनाथ की सख्ती के बाद संभागायुक्त कल्पना श्रीवास्तव ने बैठक ली। इस बैठक में कलेक्टर तरुण पिथोड़े, सहकारिता विभाग, जिला प्रशासन व पुलिस विभाग के अफसर मौजूद थे। संभागायुक्त श्रीवास्तव ने कहा कि इस अभियान के बाद सबसे ज्यादा शिकायतें जमीन की गड़बड़ियों की सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि अभी 128 सोसायटियों की करीब 800 शिकायत आई हैं, जिनकी जांच 15 दिन में कराई जाएगी।  आगे पढ़ें

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गजब की ये गला लगाई

प्रदेश सरकार के शरीर में दिग्विजय सिंह का स्थान नाक से कम नहीं है। इधर, इंदौर की सियासत में कैलाश विजयवर्गीय की भी यही भूमिका है। भाई लोगों ने अपने-अपने तरीके से यह अहम मुकाम हासिल किया है। इसलिए आज इंदौर में जब दो नाक यानी दिग्विजय और कैलाश एक-दूसरे से हाथ मिलाते साथ ही लिपट गये तो इसकी सियासी व्याख्या नहीं की जाना चाहिए। न कांग्रेसियों और न ही भाजपाइयों को यह शिकायत हो कि क्यों उनके नेता ने विरोधी गुट की शख्सियत के साथ ऐसा सामीप्य जताया।  आगे पढ़ें

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कैलाश विजयवर्गीय का हमला, कहा- खाती बर्तन बजने लगे तो अब माफिया मुक्त मुहिम के बहाने वसूली पर उतर आई कांग्रेस

कमलनाथ सरकार द्वारा चलाई जा रही माफिया मुक्त मुहिम को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा 15 साल से कांग्रेस घर में बैठी थी, खाली बर्तन बजने लगे तो अब माफिया मुक्त मुहिम के बहाने वसूली पर उतर गई है। अफसरों ने भी पैसा देकर अपनी पोस्टिंग करवाई है। इसलिए 10 लोगों को नोटिस देकर एक का निर्माण तोड़ रहे तथा 9 लोगों से वसूली करने में लगे हैं। विजयवर्गीय सोमवार सुबह 11.30 बजे रतलाम से दूधाखेड़ी माताजी जाते वक्त होटल में रुके। इस दौरान मीडिया से चर्चा में उन्होंने उक्त बात कही।  आगे पढ़ें

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मायने सिंधिया के कथन के

वैसे कांग्रेस में सिंधिया जैसे कद और विरसे में मिली राजनीति वाले लोगों को बिना मांगे ही सब मिलता रहा है। ये तो लंबी परम्परा है। तो अब कांग्रेस में सिंधिया के समर्थक तथा विरोधियों के बीच इस कथन को लेकर, अश्वत्थामा हत: इति नरो वा कुंजरो वा वाले भ्रम का कुहासा गाढ़ा हो गया है। एक तरह से आप मान सकते हैं कि सिंधिया ने अपनी पीड़ा को अहं के तौर पर सामने रखा है। दूसरी तरह से यह भी माना जा सकता है कि मामला विशिष्ट तरह के मेहमानों का हो सकता है। वे जो किसी के घर में भोजन का निमंत्रण मिलते ही कहते हैं कि यूं तो उनका पेट भरा हुआ है, किंतु मेजबान इतना आग्रह कर रही रहा है तो वे कुछ और भोजन कर सकते हैं।  आगे पढ़ें

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कमलनाथ सरकार में भी ताकत बड़ी है शराब माफिया की

इस समय यह जरूर लग रहा है कि कमलनाथ सरकार माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई करती नजर आ रही है। पिछले सप्ताह ही इंदौर संभाग में तीन अलग-अलग मामलों में शराब के अवैध व्यापार के मामले पकड़ने में आए। इनमें सबसे बड़ा हाथ अलीराजपुर में आबकारी विभाग ने मारा। यहां 12 लाख रुपए की अंग्रेजी शराब के साथ एक ट्रक पकड़ा गया। यह ट्रक दस जनवरी को पकड़ा गया। जाहिर है धार, झाबुआ और अलीराजपुर मध्यप्रदेश से गुजरात में तस्करी का एक बड़ा सेंटर है। read more  आगे पढ़ें

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कमलनाथ ने लगाया आरोप, कहा- भाजपा से किसी ने स्वतंत्रता संग्राम में नहीं लिया हिस्सा, मगर वे राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ा रहे

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गुरुवार को भाजपा पर मूल मुद्दों से ध्यान हटाने का आरोप लगाया। कमलनाथ ने कहा- भाजपा से किसी ने भी स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा नहीं लिया मगर वे राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ा रहे हैं। कमलनाथ कांग्रेस सेवादल के प्रशिक्षण सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मोदी सरकार के एनपीआर लागू करने के तरीके पर भी सवाल उठाया। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट किया- कमलनाथ का बयान, कांग्रेस की मानसिकता को दशार्ता है, जो केवल राजवंश पर चलती आ रही है।  आगे पढ़ें

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दिल्ली की धमक क्या मध्यप्रदेश में भी हलचल मचाएगी...?

दिल्ली विधानसभा चुनाव मध्यप्रदेश को भी प्रभावित करेगा। दिल्ली दंगों का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। 1984 दंगों के कुछ ऐसे प्रत्यदर्शियों के बयान के आधार पर एसआईटी को यदि एफआईआर करने की अनुमति मिलती है तो उसमें मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ भी लपेटे में आ सकते हैं। इसके अलावा मुझे लगता है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव तक भाजपा कमलनाथ सरकार को शायद छेड़ने की कोशिश नहीं करें। कर्नाटक और महाराष्ट्र के घटनाक्रम के बाद भाजपा नेतृत्व इस मामले में सर्तक हुआ है कि मध्यप्रदेश में अब मिस फायर की गुंजाइश नहीं है। इसके अलावा मध्यप्रदेश में एक मसला भाजपा के बीच नेता का भी फंसा है। लेकिन दिल्ली विधानसभा के संदर्भ में अगर सिख विरोधी दंगों में सुप्रीम कोर्ट में कुछ होता है तो इसकी धमक मध्यप्रदेश की राजनीति में निश्चित तौर पर सुनाई देगी। read more  आगे पढ़ें

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