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शिवराज का यह फैसला.....

शिवराज सरकार के तीसरे कार्यकाल के आखिरी दिनों में सामने आए ई-टेंडरिंग घोटाले को सामने लाने का श्रेय भी मनीष रस्तोगी के खाते में दर्ज है। वे इस मामले के एक महत्वपूर्ण गवाह हैं। इस घोटाले के उजागर होने के बाद उन्हें मध्यप्रदेश इलेक्ट्रानिक्स डेवलपमेंट कार्पोरेशन में सचिव और एमडी के पद से हटाया गया था। तीसरे कारण से मनीष रस्तोगी को याद करना चाहे तो कमलनाथ सरकार में राजस्व विभाग के प्रशासनिक मुखिया रहते ही मध्यप्रदेश के किसानों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कृषक सम्मान निधि का फायदा नहीं मिला। इसके तहत हर किसान को साल में तीन किश्तों में छह हजार रूपए केन्द्र सरकार से मिलने थे। मध्यप्रदेश के किसानों को यह नहीं मिले तो इसका जिम्मेदार कमलनाथ के साथ मनीष रस्तोगी को भी माना जा सकता है। फिर आखिर क्या कारण बना कि आम तौर पर कम से कम राजनेताओं को रास नहीं आ सकने वाले एक अफसर को मुख्यमंत्री सचिवालय में शिवराज ने प्राथमिकता से शामिल किया।  आगे पढ़ें

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काहे को रोना, हमपेशा के इस आचरण पर

लेकिन मीडिया अगर भीड़ में बदलता नजर आ रहा है तो इसका कारण इसका ग्लेमर भी है। हालांकि यह दूर के ढोल सुहावने जैसा है। लेकिन इस भीड़ ने वास्तविक पत्रकारों के लिए बेहतर काम करने के रास्ते में बाधाएं खड़ी कर दी है। चाहे मुख्यमंत्री की पत्रकार वार्ता हो या फिर विधानसभा के सत्र, वहां ऐसे ढेरों फालतू घूम रहे होते हैं जिन्हें न कहीं लिखना होता है न पढ़ना। या इस प्रक्रिया से उनका कोई वास्ता ही नहीं है। लेकिन विडम्बना यह है कि इस पेशे में शामिल होने के कोई तय मापदंड ही नहीं है। लिहाजा, ढाई सौ से ज्यादा मीडिया कर्मी इस समय अपने परिवारों के साथ दहशत में जी रहे हैं। read more  आगे पढ़ें

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मप्र में कोरोना संक्रमण के 15 मामले: पत्रकार में मिला संक्रमण तो कमलनाथ के आइसोलेट होने की आई खबर, फिर हुआ खंडन

मध्य प्रदेश में कोरोनावायरस के संक्रमण के अब तक 15 सामने सामने आ चुके हैं। बुधवार को इंदौर में 4, उज्जैन और भोपाल में एक पॉजिटिव केस मिला। सबसे पहले जबलपुर में 6, उसके बाद भोपाल, ग्वालियर और शिवपुरी में एक-एक मामले की पुष्टि हुई थी। उज्जैन की संक्रमित 65 वर्षीय महिला ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। यह प्रदेश में कोरोना से पहली मौत है। वहीं, भोपाल की प्रोफेसर कॉलोनी में रहने वाले पत्रकार में संक्रमण मिला तो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के आइसोलेट होने की खबरें आईं। इसके बाद उनके मीडिया संयोजक ने इन खबरों का खंडन किया।  आगे पढ़ें

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इस्तीफा से पहले कमलनाथ ने सिंधिया को कोसा, कहा- मैं चाहता था कांग्रेस महल में न जाए, महल कांग्रेस में आए

कार्यवाहक मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस्तीफा देने से पहले सरकार गिराने के लिए जिम्मेदार ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम लिए बगैर कहा कि मैं चाहता था कि कांग्रेस महल में नहीं बल्कि महल कांग्रेस में आए ताकि जनता शक्तिशाली बने। जनता द्वारा नकारे गए महत्वाकांक्षी, सत्तालोलुप महाराज और उनके द्वारा प्रोत्साहित 22 लोभियों के साथ मिलकर भाजपा ने खेल रचकर लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या की, जिसकी सच्चाई सबके सामने आएगी। नाथ शुक्रवार को सीएम हाउस में मीडिया से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जनता के साथ धोखा करने वाले इन लोभियों को जनता कभी माफ नहीं करेगी।  आगे पढ़ें

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मप्र में सियासी उठापटक का हुआ अंत: कमलनाथ ने दिया इस्तीफा, भाजपा को जमकर कोसा

मध्य प्रदेश का सियासी ड्रामा 17 दिन पहले शुरू हुआ था। भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी खींचतान सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई थी और शीर्ष अदालत ने शुक्रवार शाम 5 बजे तक फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया था। हालांकि, इससे 4:30 घंटे पहले ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस्तीफा दे दिया। वे शुक्रवार दोपहर 12.30 बजे मीडिया के सामने आए। करीब 25 मिनट बोले। 15 महीने पुरानी अपनी सरकार की 20 उपलब्धियां गिनाईं और 16 बार कहा कि भाजपा को हमारे काम रास नहीं आए। उन्होंने कहा- भाजपा सोचती है कि वह मेरे प्रदेश को हराकर जीत सकती है। वह न मेरे प्रदेश को हरा सकती है और न मेरे हौसले को हरा सकती है।  आगे पढ़ें

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हुजूर आते-आते बहुत देर कर दी

जिन विधायकों को इसके पहले तक चलो-चलो कहकर हांका जाता था, उन्हें ही हमारे साथ चलो की शैली में मनाने के जतन शुरू कर दिये गये। जो निर्दलीय तथा गैर-भाजपाई विधायक इस पूरे समय में उपेक्षा का रोना रोते रहे, उन्हें अब कहीं जाकर महत्व देने की प्रक्रिया शुरू की गयी। लेकिन ऐसा होने तक मामला हाथ से निकल चुका था। बिसाहूलाल सिंह जैसे दिग्विजय के पटु समर्थक की बगावत इस बात का पुख्ता सबूत थी कि नाथ अब अपने सियासी भाई की मदद से भी इस कटी पतंग वाले हालात पर काबू नहीं पा सकेंगे। नाथ गलती पर गलती करते रहे। इनमें से कई तो गुनाह की श्रेणी वाली रहीं। अफसरशाही को ताश के पत्तों की तरह फेंटने का प्रयोग राज्य के लिए बेहद घातक साबित हुआ। कमलनाथ की चक्की में अगर कोई वाकई बारिक पिसा तो वो इस प्रदेश का प्रशासन था और वो केवल एक मात्र सकारण पिसा? वे हजारों हर तरह के अफसर इस सकारण को जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे।read more  आगे पढ़ें

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मप्र की सियासत: बहुमत परीक्षण से पहले दिग्विजय सिंह ने मानी हार, कहा- कमलनाथ सरकार के पास नहीं हैं नंबर

मध्य प्रदेश में कमलनाथ की सरकार बचेगी या वहां बीजेपी का कमल खिलेगा, इसका फैसला आज शाम 5 बजे तक हो जाएगा। विधानसभा का विशेष सत्र 20 मार्च को दोपहर दो बजे बुलाया गया है। लेकिन इससे पहले कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने एक टीवी न्यूज चैनल से बातचीत में कहा कि 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद कमलनाथ सरकार के पास नंबर नहीं है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि पैसे और सत्ता के दमपर बहुमत वाली सरकार को अल्पमत में लाया गया है।  आगे पढ़ें

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मप्र में जारी सियासी घमासान के बीच आज का दिन होगा अहम, कमलनाथ का इस्तीफा तय, दिग्गी बोले- सरकार सुरक्षित नहीं

मध्य प्रदेश में 17 दिन से जारी सियासी घमासान का शुक्रवार निर्णायक दिन है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आज कमलनाथ सरकार का विधानसभा में फ्लोर टेस्ट होगा। कांग्रेस और भाजपा ने अपने-अपने सदन में मौजूद रहने के लिए विधायकों को व्हिप जारी किया है। कमलनाथ ने सीएम हाउस पर 12 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस भी बुलाई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कमलनाथ फ्लोर टेस्ट से पहले ही इस्तीफे का ऐलान कर सकते हैं। वहीं, गुरुवार देर रात स्पीकर ने 16 बागी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए। इन इस्तीफों के स्वीकार होने के बाद कांग्रेस के विधायकों की संख्या घटकर 92 हो गई है। इधर, दिग्विजय सिंह ने भी अब स्वीकार कर लिया है कि उनकी सरकार सुरक्षित नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार का बचना मुश्किल है।  आगे पढ़ें

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर शिवराज ने कहा- हमारा विश्वास है, हम बहुमत में हैं, फ्लोर टेस्ट में सरकार पराजित होगी

मध्य प्रदेश में सरकार बचाने और बनाने के लिए चल रहे संघर्ष में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने शुक्रवार शाम 5 बजे तक फ्लोर टेस्ट कराने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीहोर के रिजॉर्ट में मीडिया से बात की। उन्होंने कहा- कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की हार हुई। आज फ्लोर टेस्ट हाथ उठाकर होगा। हमारा विश्वास है, हम बहुमत में हैं। फ्लोर टेस्ट में यह सरकार पराजित होगी। कल दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।'' कमलनाथ के बहुमत के दावे पर शिवराज ने कहा- हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े लिखे को फारसी क्या? उधर, दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के आवास पर भाजपा नेताओं की बैठक हुई। इसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया भी पहुंचे हैं। वहीं, कोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी मंत्रियों की एक बैठक सीएम आवास पर बुलाई थी।  आगे पढ़ें

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मप्र का सियासी ड्रामा: रात 12 स्पीकर ने 16 बागियों के इस्तीफे किए मंजूर, आज दोपहर 12 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम कर सकते हैं इस्तीफे का ऐलान

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश विधानसभा स्पीकर को आज 5 बजे तक फ्लोर टेस्ट करवाने का निर्देश दिया है। गुरुवार रात करीब डेढ़ बजे जारी विधानसभा की कार्यवाही की सूची में भी फ्लोर टेस्ट का जिक्र किया गया है। फ्लोर टेस्ट से कुछ घंटे पहले राज्य की सियासत में बड़े मोड़ आए। स्पीकर एनपी प्रजापति ने रात 12 बजे बेंगलुरु में ठहरे कांग्रेस के 16 बागी विधायकों के इस्तीफे स्वीकर कर लिए। कमलनाथ ने शुक्रवार दोपहर 12 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। सूत्रों के मुताबिक, कमलनाथ इस कॉन्फ्रेंस में इस्तीफे का ऐलान कर सकते हैं।  आगे पढ़ें

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