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जिला मुख्यालय पर हुआ करोड़ो का नुकसान, सांसद विधायक ने किया व्यापारियों के गुस्से का सामना

13 सितंबर की रात से हुई भारी वर्षा ने 14 तारीख होते होते रौद्र रूप ले लिया था। संपूर्ण जिले में तबाही का मंजर था, नदी नाले उफान पर थे। बुजुर्गों की माने तो 50 साल बाद ऐसा मंजर देखा है। आस पास के गांवों से जिला मुख्यालय का संपर्क पूरी तरह से टूट गया था। मंदसौर नगर ने भी यह भारी तबाही का मंजर देखा। नगर के मुख्य मार्ग दयामंदिर रोड़, घंटाघर, खाल, सम्राट रोड़, बस स्टैंड ओर धानमंडी पूरी तरह जलमग्न हो गए थे। व्यापारियों का भारी नुकसान हुआ। हर व्यापारी के यहां कम से कम 50 हजार से 50 लाख तक का नुकसान हुआ है। बड़े व्यापारियों के यहां तो करोड़ों का नुकसान है। पताशी गली, अशोक नगर, शनि विहार कॉलोनी, सरस्वती नगर, अभिनंदन नगर सहित नगर की अनेक निचली बस्ती में नागरिकों के मकानों में भी लाखों का नुकसान हुआ है।  आगे पढ़ें

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ये हवा और पानी का संगम

तेज हवा में सूखी रेत उड़कर कहर ढा जाती है। यह लोगों की आंख में चली जाए तो कुछ देर के लिए सब-कुछ दिखना बंद हो जाता है। फिर यहां तो मामला उस रेत का है, जो पूरे तीन घंटे तक सुखायी गयी। भ्रष्टाचार की आग पर रखकर। वह भी होशंगाबाद कलेक्टर के कार्यालय में। आग कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने लगायी या एसडीएम रवीश श्रीवास्तव ने, मैं नहीं जानता। हां, इतना पता है कि तीन घंटे बाद जब चैम्बर का दरवाजा खुला तो रेत ने आरोप-प्रत्यारोप की हवा के असर से ऐसा कहर बरपाया कि भोपाल में बैठे शासक वर्ग तक को सब-कुछ दिखना बंद हो गया। सोचिए कि सीताशरण शर्मा यदि सत्तारूढ़ दल में होते तो इस रेत की उड़ान का वेग और कितना अधिक हो जाता। फिलहाल अब रेत जर्रा-जर्रा होकर वल्लभ भवन की फाइलों में कैद है। read more  आगे पढ़ें

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निर्दलीय विधायक सुरेन्द्र सिंह ने कहा- युवा मंत्रियों का रवैया नहीं ठीक, 10 बार फोन लगाओं फिर भी नहीं उठाते

एनवीडीए मंत्री सुरेंद्र सिंह बघेल को 10 बार फोन लगाओ, लेकिन वे कभी नहीं उठाते हैं। ठाकुर ने युवा मंत्रियों को अनुभवी मंत्रियों से मिलनसारिता सीखने की नसीहत भी दी है। ठाकुर ने अपने बंगले की खस्ताहालत पर पीडब्ल्यूडी के अफसरों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि दो माह से मेंटेनेंस के लिए कह रहा हूं, लेकिन आज तक किसी ने सुध नहीं ली।  आगे पढ़ें

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कमलनाथ की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, गृह मंत्रालय खोलेगा 1984 सिख दंगों की फाइल

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के खिलाफ 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामलों को फिर से खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। शिरोमणि अकाली दल के दिल्ली के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने सोमवार को यह जानकारी दी। सिरसा ने एक ट्वीट में कहा, 'अकाली दल के लिए एक बड़ी जीत। 1984 में सिखों के नरसंहार में कमलनाथ के कथित तौर पर शामिल होने के मामलों को रकळ ने दोबारा खोला। पिछले साल मैंने गृह मंत्रालय से अनुरोध किया था जिसके बाद मंत्रालय ने कमलनाथ के खिलाफ ताजा सबूतों पर विचार करते हुए केस नंबर 601/84 को दोबारा खोलने का नोटिफिकेशन जारी किया है।'  आगे पढ़ें

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ऐसा शर्मनाक और घटिया मामला

मीडिया रिपोर्ट कहती हैं कि राज्यपाल आयोजन के ठीक पहले उन्हें निमंत्रित करने की औपचारिकता पूरी न किए जाने से नाराज थे। अब इस हिसाब से घटनाक्रम का विश्लेषण करें। शिक्षा विभाग के उप संचालक या जिला शिक्षा अधिकारी की क्या यह जिम्मेदारी/हैसियत हो सकती है कि राज्य के संवैधानिक प्रमुख को निमंत्रित करने पहुंच जाएं! तय मानिए कि इन दोनो या इनमें से किसी एक ने यह गुस्ताखी की होती तो मामला उनकी बर्खास्तगी तक पहुंच जाना था। फिर यह जिला स्तरीय आयोजन नहं था। मामला प्रदेशव्यापी था। लिहाजा साफ है कि स्कूल शिक्षा विभाग के मंत्री सहित प्रमुख सचिव और आयुक्त लोक शिक्षण से इतर और किसी की यह जिम्मेदारी नहीं थी कि राज्यपाल को आमंत्रित करता। लेकिन जिस तरह नाथ की सरकार डर-डरकर चल रही है, उसमें यह उम्मीद बेमानी है कि किसी दिग्गज के सिर पर इसका जिम्मा रखा जाता। इसलिए हुआ यह कि अदने से लोग निलंबित कर दिये गये। राजभवन तक यह संदेश चला गया कि सरकार ने महामहिम के प्रोटोकॉल का पूरा ध्यान रखा है। सच्चाई से मुंह छिपाने की ऐसी शर्मनाक प्रक्रिया निर्लज्जता के बोलबाला वाले इस दौर में भी कम ही देखने को मिलती है। read more  आगे पढ़ें

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कांटे से कांटा निकालने का खेल

सियासी वन में तब्दील हो चुके प्रदेश में सिंघार किसी युवा शेर की तरह दहाड़ रहे हैं तो सिंह इसी प्रजाति के बुजुर्ग की भांति पूरी शांति के साथ बैठे हैं। लेकिन उनकी निगाह सिंघार से हट नहं रही। ठीक उसी तरह, जिस तरह जंगल में आखेट के समय शेर अपने शिकार से नजर नहीं हटाता है। चुपचाप उसकी ओर सरक कर उसे निशाना बना लेता है। शिकार बनने और करने, दोनो मामलों में सिंघार का बायोडाटा अभी खाली है। दिग्विजय सिंह ने आज कहा कि पचास सालों में वे बहुत से हमले देख चुके हैं। जाहिर है, कमलनाथ और कांग्रेस की सरकार को ये तलवार की नोक वाला बहुमत नहीं मिला होता तो शायद फिर उमंग को जवानी की उमंग और बुजुर्गीयत के धैर्य का अंतर पता चलता। इधर, अच्छे-अच्छों को सियासी निवाला बनाने के दृष्टिकोण से सिंह की कर्म कुंडली तमाम प्रहसनों से रंगी हुई है। इसलिए यह तय है कि दोनो पक्षों के बीच सफेद रुमाल लहराये जाने की संभावना फिलहाल नहीं है। जीत और हार का फैसला समय ही करेगा। तब तक यह घमासान देखना बेहद रोचक एवं यादगार अनुभव बन जाना तय है।  आगे पढ़ें

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न थकने वाले ऐसे करामाती

उस सरकार की सोचिए, जिसके हिस्से ही यह शोर मचा रहे हों कि इसके तमाम लोग भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। मध्यप्रदेश ने ऐसे बदलाव वाले वक्त की कभी भी कामना नहीं की थी। क्योंकि मामला वक्त के बदलाव का नहीं, बल्कि बदला लेने वाले वक्त में तब्दील होकर रह गया है। यह सब देखकर जनता पार्टी की उस सरकार का कार्यकाल और हश्र याद आ गया, जो अंतत: अपने नेताओं के आपसी घमासान में ही खत्म हो गयी थी। ऐसा उदाहरण सामने होने के बावजूद राज्य की सरकार एवं कांगे्रस संगठन गुटाधीशों के हाथ का खिलौना बनकर रह गये हैं। क्या यह स्थिति उस समय किसी भी लिहाज से ठीक कही जा सकती है, जब प्रदेश के नगरीय निकायों के चुनाव तेजी से नजदीक आते जा रहे हैं। सरकार बनने के बाद लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद निकाय चुनाव ही कमलनाथ की इज्जत और राज्य में पार्टी की ताकत में कुछ इजाफा कर सकते हैं। लेकिन फिलहाल जो चल रहा है, उसे देखते हुए यह आशंका जतायी जा सकती है कि यहां भी मामला लोकसभा चुनाव जैसा ही हो सकता है।  आगे पढ़ें

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दिग्गी के खिलाफ उठी को आवाज को शांत करने सामने आए सीएम, कहा- उनके अनुभवों का लाभ लेने ली जाती है सलाह

दिग्विजय पर कमलनाथ सरकार के वन मंत्री उमंग सिंघार ने परदे के पीछे से सरकार चलाने समेत अनेक गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सिंह को शैडो सीएम तक कहा। इससे भाजपा को भी दिग्विजय सिंह के खिलाफ मुखर होने का मौका मिल गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा द्वारा जारी बयान में कमलनाथ ने कहा कि दिग्विजय सिंह प्रदेश के 10 वर्ष मुख्यमंत्री रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी रहे हैं। उनके अनुभव का लाभ प्रदेश हित में लेने के लिए उनसे भी वह समय-समय पर सलाह-मशविरा करते रहते हैं। नाथ ने कहा कि अकेले सिंह से नहीं, वे तमाम पूर्व मुख्यमंत्रियों व पूर्व प्रदेश अध्यक्षों से भी सलाह-मशविरा करते रहते हैं।  आगे पढ़ें

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मप्र में सियासी घमासान के बीच सिंधिया ने सिंघार का किया समर्थन, कहा- सीएम को उमंग की बात सुनना चाहिए

सिंधिया दो दिवसीय प्रवास पर ग्वालियर में हैं। वह बुधवार को शहर के मेला क्षेत्र में अनुसूचित जाति सम्मेलन के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। सिंधिया ने यह भी कहा कि प्रदेश में 15 साल बाद बड़ी मुश्किल से सरकार बनी है और अभी छह महीने भी नहीं हुए हैं। विकास और प्रगति को लेकर सरकार से लोगों को आशाएं और अभिलाषाएं हैं। कमलनाथ जी को उमंग सिंघार जी की बात को सुनना चाहिए और जो मुद्दे उठाए हैं, वह भी समझना जरूरी है। आरोप गंभीर हैं, इनकी जांच भी होना चाहिए।  आगे पढ़ें

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किसान कर्जमाफी और युवा स्वाभिमान योजना को लेकर कमलनाथ कैबिनेट में आज होगी चर्चा

प्रदेश में कर्जमाफी योजना का दूसरा चरण शुरू हो चुका है। इस चरण में उन किसानों का दो लाख रुपए तक कर्ज माफ होगा, जिन्होंने सहकारी और ग्रामीण विकास बैंकों से कर्ज लिया है। सूत्रों के मुताबिक तीसरे और अंतिम चरण में राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्जदार किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा। वचन पत्र में सरकार ने जो दो लाख रुपए तक कर्जमाफ करने का वादा किया है, उसे पूरा किया जाएगा। इसके लिए कृषि विभाग को जरूरी बजट भी मुहैया कराया जा रहा है।  आगे पढ़ें

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