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दो महीने बाद कमलनाथ ने सीएम निवास किया खाली, मुख्यमंत्री शिवराज अच्छे मुहूर्त में जल्द करेंगे प्रवेश

करीब दो महीने बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने श्यामला हिल्स स्थित सीएम हाउस बुधवार को खाली कर दिया है। अब जल्द ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अच्छे मुहूर्त में इसमें शिफ्ट होंगे। कमलनाथ का श्यामला हिल्स पर ही एक अन्य बंगले में शिफ्ट होंगे। फिलहाल, कमलनाथ छिंदवाड़ा के दौरे पर हैं। गुरुवार को वहां से लौटने के बाद वे सीधे अपने नए निवास पर जाएंगे। दिसंबर 2018 में मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद कमलनाथ इस बंगले में जून 2019 में शिफ्ट हुए थे। वे करीब 11 महीने इस बंगले में रहे।  आगे पढ़ें

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अब ये चुप रहने का समय नहीं है

अपनी पिछली पार्टी की पंद्रह महीने की सरकार में ये मंत्री और विधायक थे ही। तो फिर मार्च से लेकर मई के बीच के दो महीनों में ऐसा क्या हो गया कि उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों के विकास के लिए इतनी बड़ी रकम की जरूरत आ गई? क्या यह मान लें कि कमलनाथ सरकार ने इनके क्षेत्र में कोई भी काम नहीं करवाए। आरोप तो ऐसे ही लगा कर इन लोगों ने दलबदल किया था। या यह समझ लिया जाए कि पंद्रह महीने तक इन महानुभावों ने ही अपने-अपने इलाके में जनोपयोगी काम करने में कोई रूचि ही नहीं ली? वरना इतनी भारी-भरकम रकम की दरकार का कोई खास औचित्य ही समझ नहीं आता है।  आगे पढ़ें

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गुस्सा अजय सिंह का...

राकेश सिंह की वापसी पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ही शिवपुरी में कराई थी। अब भला अजय सिंह 11 जुलाई 2013 को कैसे भूला सकते हैं। उस दिन शिवराज सरकार के खिलाफ विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक दल के उपनेता रहते हुए चौधरी राकेश सिंह ने सदन में ही अचानक पाला बदल लिया था। वे उसी दिन कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गए थे। 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने चौधरी राकेश सिंह को चुनाव लड़ाने की बजाय उनके भाई मुकेश चतुर्वेदी को मेहगांव से मैदान में उतारा था। मुकेश ने यहां से चुनाव जीत लिया था लेकिन राकेश सिंह को भाजपा ने पिछले पांच सालों में कहीं एडजस्ट नहीं किया। 2018 में मुकेश का टिकट काट कर भिंड से राकेश सिंह को जरूर चुनाव लड़वाया गया। read more  आगे पढ़ें

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पूर्व सीएम पर शिवराज ने किया पलटवार, कहा- भ्रष्टाचार में डूबी रही कमलनाथ सरकार, गरीबों की सुविधाएं चुन-चुनकर छीन ली थीं, सभी वर्ग परेशान हो गए थे

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पर आज पलटवार करते हुए कहा कि लगभग डेढ़ वर्ष के कांग्रेस के शासनकाल में राज्य के सभी वर्ग परेशान हो गए और तत्कालीन कमलनाथ सरकार भ्रष्टाचार में डूबी रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में जब डेढ़ साल बाद फिर से भाजपा की सरकार बनी, गरीब, किसान और मजदूर का भाग्य उदय हुआ है। वहीं पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने गरीबों की सुविधाएं चुन चुनकर छीन ली थीं और उन्हें दर दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर किया गया।  आगे पढ़ें

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मध्यप्रदेश में कोरोना पर्यटन क्यों नहीं...?

शिवराज की हिमायत नहीं। मुख्यमंत्री खुद न जा पा रहे हों तो मंत्री और आला अफसरों को मजदूरों के सेवा कार्य की निगरानी के लिए भेजना चाहिए। इसके बावजूद शिवराज और उनकी टीम का इस संकटकाल में मौके पर न जाना फिर भी समझ आता है कि वे मंत्रालय से भी निर्देश, आदेश और मॉनिटरिंग कर रहे होंगे। आखिर 8 करोड़ जनता की सेवा की जिम्मेदारी उनके कांधों पर है। इसलिए तमाम सुरक्षा प्रबंधों के बावजूद कोरोना संक्रमण का खतरा उठाना उनके लिए संभव न होगा। लेकिन कमलनाथ और उनकी कांग्रेस की क्या मजबूरी है? विपक्षी दल के नेता और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष होने के नाते वे जा सकते हैं। read more  आगे पढ़ें

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सरिया गपावनी का ये सियासी मौसम

पहली नजर में यह आश्चर्य का विषय लगता है कि कोरोना के भीषण प्रकोप के बीच शिवराज को अचानक ये जांच वाली बात कैसे सूझ गयी है। दन्न से सिलावट सहित नरोत्तम मिश्रा और कमल पटेल का मंत्री समूह गठित कर दिया गया। कहा गया है कि यह समूह बीती सरकार के निर्णयों की समीक्षा करेगा। इसके पीछे नरोत्तम मिश्रा की पीड़ा है। कमलनाथ सरकार ने मिश्रा को खूब घेरने की कोशिश की। उनके एक सरकारी सहयोगी को जेल भी भेजा गया। ये अलग बात है कि कमलनाथ, नरोत्तम का कुछ ज्यादा नहीं बिगाड़ सके।  आगे पढ़ें

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नाथ का ऐसा मसखरा विरोध

अब पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मांग की है कि महाराष्ट्र में ट्रेन के नीचे आकर मारे गए मध्यप्रदेश के मजदूरों के परिजनों को 50-50 लाख रुपये की राहत राशि प्रदान की जाए। इतनी ही राशि वे उन मृतकों के लिए मांग रहे हैं, जो नरसिहपुर के पास कल एक सड़क हादसे का शिकार हो गए। पूर्व मुख्यमंत्री ने अभूतपूर्व दरियादिली थोपते हुए कांग्रेस के विधायकों से कहा है कि वे राज्य के बाहर से आ रहे यहां के श्रमिकों के खाने-पीने का बंदोबस्त करें। वे इस बात से भी पूरे मजाकिया अंदाज में खफा हैं कि शिवराज सरकार ने कोरोना के भयावह संकट के बीच शराब की दुकानें खोलने की अनुमति प्रदान कर दी है।  आगे पढ़ें

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ब्यूरोक्रेसी में कमलनाथ टॉनिक: शिवराज का दृष्टि दोष या नेत्र ज्योति प्रक्षालन!

होता यह है कि सरकार बदलने के साथ लूप लाइन में रखे हुए कोई सीनियर ब्यूरोक्रेट नई सत्ता के संजय बन जाते हैं। उन्हीं की आंखों से सिंहासन पर आरुढ़ व्यक्ति अपनी प्रशासनिक व्यवस्था रचता है। पिछली सरकार के करीबी अफसर प्रमुख पदों अपदस्थ किए जाते हैं और नए बैठाए जाते हैं। दिसंबर 2018 में सत्तासीन होते ही कमलनाथ ने भी यही किया था। उनके संजय बने थे सुधि रंजन मोहंती, जो 15 साल की बीजेपी सरकार में निर्वासन जैसी स्थिति से कई बार दो-चार हुए थे। कमलनाथ ने मोहंती को अपना मुख्य सचिव बनाया और मंत्रालय से लेकर जिलों तक अफसरों का रंग देख कर उनकी पदस्थापना होने लगी।  आगे पढ़ें

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राजाजी तुमसे दिल लगाने की सजा है......

राजनीतिक सहोदर के लिए इस उदारता को दिखाना खालिस फिल्मी मामला है। मुगले-आजम जैसा। फिल्म में अकबर द्वारा मौत की सजा सुनाये जाने पर अनारकली कहती है, शहंशाह की इन बेहिसाब बख्शीशों के बदले ये कनीज अकबर-ए -आजम को अपना खून माफ करती है। विशुद्ध इसी नाटकीय अंदाज में कमलनाथ ने अपनी सरकार की हत्या के जुर्म से सिंह को माफ कर दिया है, लेकिन बड़ी तरकीब से। ऐसा करने से पहले वे दिग्विजय की करतूतों के प्रति अपनी पीड़ा का इजहार कर गए। उन्होंने यह जता दिया कि महज पंद्रह महीने ही चल सकी सरकार के औंधे मुंह गिरने की मूल वजह उनका दिग्विजय पर आंख मूंद कर भरोसा करना रहा।  आगे पढ़ें

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महारथी कमलनाथ...

2018 में कमलनाथ के प्रदेशाध्यक्ष और बाद में मुख्यमंत्री बनने तक दीपक बावरिया की पटरी कमलनाथ से कभी नहीं बैठी। दीपक बावरिया राजनीतिज्ञ कम और एक्टिविस्ट ज्यादा थे। वैसे ही जैसे राहुल गांधी को राजनीतिक शिक्षा-दीक्षा देने वाले उनकी टीम में कई और एक्टिविस्ट या एनजीओ के उस्ताद लोग शुमार हैं। जाहिर है राहुल गांधी के यह सारे उस्ताद जमीन की राजनीति से कौसों दूर हैं। जनाधार विहिन। राहुल गांधी के एक इकलौते खांटी राजनीतिज्ञ उस्ताद और जनाधार के साथ जमीनी पकड़ रखने वालों में अकेले दिग्विजय सिंह को शामिल किया जा सकता है। बाकी कांग्रेस में इस समय सब हवाहवाई नेताओं का दौर है।  आगे पढ़ें

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