लोकसभा चुनाव 2024: चौथे चरण के बाद सीटें जीतने का ‘माइंड गेम’ तेज

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लोकसभा चुनाव के चौथे चरण के मतदान के बाद मटन, मंगलसूत्र और पाकिस्तान जैसे मुद्दों के बाद जीतने वाली सीटों की संख्या का ‘माइंड गेम’ हावी होता दिख रहा है। इस माइंड गेम की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद में यह घोषणा करते हुए की थी कि इस चुनाव में भाजपा 370 तथा एनडीए 400 पार सीटें जीतेगी। उस समय बहुत से लोगों ने इसे दंभोक्ति के रूप में लिया था। भाजपा और एनडीए सचमुच यह आंकड़ा पार कर पाते हैं या नहीं, यह तो 4 जून को ही पता चलेगा, लेकिन चुनाव में जीत की मनोवैज्ञानिक बढ़त की नींव उसी वक्त रख दी गई थी।

भाजपा को 400 पार क्यों चाहिए?

जब विपक्ष को देर से यह चाल समझ आई तब उसने पलटवार करते हुए सवाल उठाया कि आखिर भाजपा को 400 पार सीटें क्यों चाहिए। विपक्ष का कहना था कि भाजपा संविधान बदलने के लिए ऐसा चाहती है। अधिकांश लोगों के लिए संविधान का मतलब आरक्षण होता है, और जब यह कहा जाने लगा कि भाजपा दरअसल आरक्षण व्यवस्था खत्म करने के लिए 400 पार सीटें चाहती है, तो भाजपा को एहसास हुआ कि उसका नारा बूमरैंग हो रहा है। यह नारा आत्मविश्वास का परिचायक कम और विघातक ज्यादा हो सकता है।

भाजपा का पलटवार

भाजपा ने तुरंत विपक्ष के इस नरेटिव की काट यह कहकर ढूंढी कि विपक्ष हिंदुओं में ओबीसी, दलित और आदिवासियों का आरक्षण खत्म कर मुसलमानों को देना चाहता है। हालांकि, तथ्य यह है कि देश में मुसलमानों में भी करीब 41 फीसदी आबादी ओबीसी की है और वह ओबीसी आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था में पहले से हकदार है। फर्क सिर्फ इतना है कि यह आरक्षण उन्हें जाति के आधार पर मिला है, न कि धर्म के आधार पर।

चौथे चरण के बाद का परिदृश्य

चौथे चरण के साथ कुल 543 में से 380 सीटों पर मतदान हो चुका है। अब हार-जीत के नए कयास और गणित लगाए जा रहे हैं। अगर भाजपा के दावों को सही मानें तो तुलनात्मक रूप से वह चार चरणों के बाद सरकार बनाने के करीब दिखती है। हालांकि, विपक्षी दलों का मानना है कि भाजपा हवा में है और उसकी जीत के दावे वास्तविकता से दूर हैं।

निष्कर्ष

इस चुनावी माहौल में भाजपा और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने नरेटिव को मजबूत करने के लिए अलग-अलग मुद्दों का सहारा लिया है। भाजपा ने जहां सीटों की बड़ी संख्या जीतने का दावा किया, वहीं विपक्ष ने इसे संविधान और आरक्षण के मुद्दे से जोड़कर भाजपा को घेरने की कोशिश की। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 4 जून को चुनाव परिणाम क्या तस्वीर पेश करते हैं और किसकी रणनीति सफल होती है।