विश्लेषण

ऐसा शिवराज ही करते हैं

यह कहना तो अतिशयोक्ति होगी कि ऐसा शिवराज ही कर सकते हैं, किंतु यह कथन काफी हद तक सही है कि ऐसा शिवराज ही करते हैं। मध्यप्रदेश फिलहाल महाकाल की भक्ति में डूबा हुआ है। भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में नव-निर्मित महाकाल लोक के लोकार्पण का सबको अधीरता के साथ इंतज़ार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 11 अक्टूबर को लोकार्पण के लिए आ रहे हैं। कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि उस दिन प्रदेश का बड़ा हिस्सा दीपावली की जगमग से रोशन दिख जाए। उज्जैन में पांव रखने की भी जगह न बच पाए। शिवराज ने भी प्रदेश को महाकाल की नगरी में आमंत्रण दिया है। यह आह्वान किया है कि जो नहीं आ सकते, वे अपने-अपने घरों पर दीप प्रज्ज्वलित कर इस  पुनीत अवसर को अविस्मरणीय बना दें।

ये शिवराज ही करते हैं कि किसी ठेठ सरकारी आयोजन से पूरे प्रदेश को परिवार की तरह आबद्ध कर दें। तमाम पंचायतों में आम जनता के लिए खुले मुख्यमंत्री निवास के दरवाजे। प्रदेश के एक-एक क्षेत्र में खुले दिल से मुख्यमंत्री का आना-जाना। जन-आशीर्वाद यात्रा का वास्तव में जनता के भारी आशीर्वाद वाले आयोजन में बदल जाना। आखिर ये कैसे हो जा रहा है? ये ठीक उसी तरह हो रहा है, जैसे महाकाल लोक को लेकर एक बार फिर प्रदेश शिवराज की श्रद्धा एवं उत्साह के साथ कदमताल कर रहा है। वातावरण के हर्ष में कूनो के अफ्रीकी चीतों की प्राकृतिक गुर्राहट है और हर्ष के अगले चरण में महाकाल लोक के पूजन तथा जयकार की ध्वनि अभी से सुनी जा सकती है। 

दरअसल शिवराज ने एक बहुत बड़ी विशिष्टता के साथ यह विशेष क्रम निरंतर रखा है। वह आम जनता से जुड़ी ऐसी किसी भी अपनापन वाली प्रसन्नता का आरंभ करते हैं। इसके तुरंत बाद श्रेय या नेतृत्व वाले भाव को झाड़-पोंछकर वह संबंधित उल्लास का लोकार्पण कर देते हैं। तब शिवराज और जनता, दोनों के उत्साह के बीच कोई अंतर नहीं रह जाता। इसलिए ही ऐसा होता है कि इधर मुख्यमंत्री महाकाल लोक के सम्मान में सोशल मीडिया पर अपनी डीपी बदलते हैं और उधर ऐसा करने के लिए ख़ास से लेकर आम तक के बीच होड़ मच जाती है।

पहले भी अनेक अवसर पर सरकारी आयोजन की खुशी का बेहद असरकारी तरीके से प्रदेश की आवाम तक संचार शिवराज कर चुके हैं। फिर खुशी ही क्यों? कोरोना की विभीषिका याद कीजिए। गली-गली घूमकर शिवराज ने लोगों को इसके खतरों से आगाह किया। जब स्वयं संक्रमित हो गए, तब अस्पताल से भी निरंतर काम करके यह सन्देश प्रसारित किया कि समय रहते और सावधानी के साथ इलाज मिले तो इस बीमारी से रोजमर्रा की दिनचर्या के बीच भी पार पाया जा सकता है। बाढ़ में टापू बन गए गाँवों की आबादी क्या तब शासन तथा अपने बीच की दूरी को मिटता हुआ नहीं पाती होगी, जब खुद मुख्यमंत्री उनके पास पहुंचकर सुख-दुःख की बात करते हैं और मदद का प्रबंध भी? 

अपने ऐसे ही व्यवहार से शिवराज ने महाकाल लोक के आयोजन को भी घर-घर के आयोजन में परिवर्तित कर दिया है। बात केवल यह नहीं कि उज्जैन में काशी-विश्वनाथ से भी चार गुना बड़ा कॉरिडोर बन गया है। बात  मात्र यह भी नहीं कि इसके माध्यम से उज्जैन धार्मिक पर्यटन के वैश्विक नक़्शे में और सम्मानजनक स्थान पा जाएगा। बात यह भी है कि इस कॉरिडोर और उस नक़्शे में देश के हृदय मध्यप्रदेश की उत्साहमयी धड़कन जीवंत रूप से गुंजायमान है। ऐसा शिवराज ही करते हैं और ऐसा शिवराज ही कर रहे हैं।

रत्नाकर त्रिपाठी

रत्नाकर त्रिपाठी बीते 35 वर्ष से लगातार पत्रकारिता तथा लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में जन्मे एवं पले-बढ़े रत्नाकर ने इसी प्रदेश को अपनी कर्मभूमि भी बनाया है। वह दैनिक भास्कर और पत्रिका सहित ईटीवी (वर्तमान नाम न्यूज 18) राष्ट्रीय हिंदी दैनिक 'राष्ट्रीय सहारा' एवं पीपुल्स समाचार में भी महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दे चुके हैं। त्रिपाठी को लेखन की विशिष्ट शैली के लिए खास रूप से पहचाना जाता है। उन्हें आलेख सहित कहानी, कविता, गजल, व्यंग्य और राजनीतिक तथा सामाजिक विषयों के समीक्षात्मक लेखन में भी महारत हासिल है। उनके लेखन में हिन्दू सहित उर्दू और अंग्रेजी के कुशल संतुलन की विशिष्ट शैली काफी सराही जाती है। संप्रति में त्रिपाठी मध्यप्रदेश सहित छत्तीसगढ़ और उत्तरप्रदेश के न्यूज चैनल 'अनादि टीवी' के न्यूज हेड के तौर पर कार्यरत हैं।

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