प्रभु ... देवभूमि भारत पहले कोरोना मुक्त होगी या कांग्रेस मुक्त ...!



कौशल किशोर चतुर्वेदी त्राहिमाम...त्राहिमाम ... घोर संकट से रक्षा करो! बचाओ! मुझे कष्ट से उबारो! करुणा भरी यह आवाज़ें इतनी तेज हो गईं कि सुरा सुंदरियों और रासरंग में डूबे देवराज इंद्र के कानों तक इनकी गूँज पहुँच ही गई। हालाँकि वर्ष 2020 के पहले ही पूरी दुनिया में हाहाकार मच गया था लेकिन करुणा भरे ऐसे क्रंदन स्वर इंद्र के कानों तक नहीं पहुँचे थे। अभी तो बारिश भी सभी जगह ठीक-ठाक हो रही थी...हालाँकि मनुष्य की अपेक्षाएँ कभी पूरी नहीं होतीं लेकिन देवता इसकी परवाह भी नहीं करते। पर अब जो आवाज़ें इंद्र के कानों तक पहुँची वह देवभूमि भारत से थीं। इंद्र को अचानक याद आ गया त्रेता युग, जब ऋषि-मुनि राक्षसराज रावण के आतंक से कराह रहे थे। देवता भी हाहाकार कर रहे थे।आख़िर में जब सभी देवताओं ने प्रभु की शरण में देवताओं, ऋषि-मुनियों को बचाने की गुहार लगाई थी तब जाकर राम अवतार और रावण का वध हुआ था। तब जाकर पृथ्वी करोड़ों वर्ष के लिए राक्षसों के आतंक से मुक्त हो पाई थी। उसमें भी अगर विभीषण न होते तब भी मुश्किल पड़ जाती। खैर इंद्र पुरानी यादों के बादलों से निकलकर एक बार फिर कानों में गूँज रहे दारुण दुख से भरे क्रंदन स्वरों को सुनने लगे। तो लोगों की हालत देखकर उन्हें भी पसीना आ गया। लोग अपनों की किसी अदृश्य कोरोना राक्षस के आक्रमण से हो रही मौतों से व्याकुल हैं


लोग भय से इतने भीरू हैं कि जिस पर आक्रमण हो उसे अकेला छोड़कर अछूत बना रहे हैं। और अगर उसकी मौत हो जाए तो कर्मकांड करना तो दूर की बात, उसकी लाश को दफ़नाने या जलाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे हैं। चारों तरफ़ हाहाकार मचा है। यह तो हुआ एक मामला। पर जब देवराज ने और ज़्यादा ध्यान से देखा तो राजनीति में भी हड़कंप मचा नज़र आया। यहाँ पर भी दल विशेष के नेता खुद को दिखा तो रहे मज़बूत लेकिन अकेले में रोए जा रहे रोए जा रहे और चुप होने का नाम ही नहीं ले रहे। इंद्र ने मामले की तह में जाकर देखा तो पता चला कि दल विशेष पर कोरोना राक्षस से भी ज़्यादा अदृश्य तरीक़े से हमला किया जा रहा है। इतनी ताक़त से प्रहार हो रहा है कि विधायकगण इस्तीफा दे देकर दूसरे दल में शामिल हो रहे हैं और अपनी सरकारें गिराकर अपने पूर्व दल के नेताओं पर ही भ्रष्ट होने का आरोप लगा रहे हैं।यह सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। देवराज इंद्र को याद आया कि महामुनि ऋषिश्रेष्ठ देवर्षि नारद अभी हाल ही में देवभूमि का दौरा करके लौटे हैं। क्यों न उनसे देवभूमि की ब्रेकिंग न्यूज़ और ताज़ा हालातों पर उनसे ज्ञान का अर्जन किया जाए। यह विचार करते हुए देवराज ने देवर्षि नारद जी का स्मरण किया। देवराज की पुकार सुन नारायण-नारायण का स्मरण करते हुए देवर्षि उनके सामने प्रकट हो गए।


देवराज ने उनकी अगवानी की, अभिवादन किया और आसन ग्रहण करने का अनुरोध भी किया।सेवा सुश्रुषा करने के बाद देवराज ने देवर्षि के सामने अपनी जिज्ञासा प्रकट की। देवर्षि मंद-मंद मुस्कुराए और देवराज पर कटाक्ष किए बिना नहीं रह पाए कि अपने रासरंग में डूबे रहने वाले सुंदरियों और सुरा प्रेमी इंद्र को देवलोक के देवताओं का कष्ट निवारण करने की फ़ुरसत नहीं मिलती, फिर देवभूमि के कष्टों की फ़िक्र कब से होने लगी? क्या कोई सुंदरियाँ श्रापग्रस्त होकर देवभूमि में वनवास काट रही हैं या फिर देवलोक में सुरा की कमी हो गई है जिसकी पूर्ति के लिए देवराज की निगाहें देवलोक पर टिक गईं हों।देवर्षि की उनकी अय्याशी और चरित्रहीनता पर सटीक टिप्पणी सुनकर देवराज झेंप गए और देवर्षि की मान मनुहार करते हुए देवभूमि के ताज़ा हालातों पर रोशनी डालने का अनुनय-विनय किया। तब देवर्षि ने अपने देवभूमि दौरे का निचोड़ देवराज के सामने रखा। बड़े गंभीर स्वर में उन्होंने पूरा वाक़या सामने रख दिया। नारद जी ने बताया कि जब देश कोरोना से सुरक्षित था तब कांग्रेस नामक दल की सरकार गिराने पर कमल दल के दिल्ली से भोपाल तक के नेताओं का पूरा ध्यान केंद्रित था।यह वाक़या देवभूमि के दिल मध्य प्रदेश का है।जहाँ नाथ को गिराकर कमल को खिलाने की होड़ में कोरोना की तरफ़ से दिल मोड़ लिया गया था।


फिर क्या था कोरोना राक्षस ने तो इसे अपना अपमान समझ कर बदला लेना शुरू कर दिया? अब वह ऐसा भस्मासुर बन गया है कि पिछले चार महीनों में सबसे ज़्यादा मुसीबत शिव को ही उठानी पड़ी।पर वह है कि पीछा छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा है।दूसरी तरफ़ कमल दल अब पूरे देश को कांग्रेस मुक्त करने में लगातार आहुतियां दे रहा है।मध्य प्रदेश में कांग्रेस को यह भी पता नहीं चलता कि रात में उनके पास जो विधायक हैं वह दूसरे दिन उनके पास रहेंगे भी कि नहीं। इसके अलावा कमल दल ने अब पड़ोसी राज्य राजस्थान पर निगाहें डाल दी हैं।हालाँकि राजस्थानी रेगिस्तानी इलाक़े में कमल को खिलने के लिए कीचड़ आसानी से नहीं मिल पा रहा है। मध्य प्रदेश में तो 15 साल लगातार कमल खिले रहने से कमल को खिलने की जैसे आदत ही पड़ी थी।पर कमल भी है ज़िद का पक्का, सोच लिया तो जब तक खिलेगा नहीं तब तक चैन नहीं लेगा।यथा राजा तथा प्रजा की मानिंद देवभूमि में अभी कमल भी बड़ा हठीला हो गया है। दूसरी तरफ़ कोरोना राक्षस भी हार मानने को तैयार नहीं है। ताली बजाईं, थाली बजाईं, दिया जलाए, जमाती का टोटका किया, लॉक-अनलॉक का छुपा छुपी का खेल खेला लेकिन कोरोना है जो मुँह चिढ़ा-चिढ़ा कर कह रहा है डरो न, डरो न ... और ही-ही करके ठिलठिला रहा है।


माथे पर हाथ रखते हुए गंभीर मुद्रा में नारद जी बोले देवभूमि में 11 लाख से ज़्यादा मरीज़ कोरोना के शिकार हो गए और 27 हज़ार से ज़्यादा मौतें होती हो गयी हैं। मध्य प्रदेश में 22 हज़ार से ज़्यादा मरीज़ और 7 सौ से ज़्यादा मौतें सरकार के सिर पर नंगे होकर नाच रही हैं। अब प्रजा के पास त्राहिमाम त्राहिमाम करने के अलावा और क्या है? अब किसकी भूल है जब कोई मानें तब हम जानें। कमल दल ने तो कोरोना को कांग्रेस समझ कर नादानी कर डाली।कमल दल ने तो यही सोचा था कि कल देश को कांग्रेस मुक्त कर देंगे और परसों कोरोना मुक्त। अब कल पहले आएगा या परसों यह तो कमल दल ही बता पाएगा।कमल दल भी ज़िद्दी और कोरोना भी दुस्साहसी...एक सेर दूसरा सवा सेर।सेर सवा सेर के चक्कर में जनता त्राहिमाम त्राहिमाम कर रही है।कमल दल के लोग तो ख़ुद को टाइगर कहकर कांग्रेस और कोरोना को मानो खेत की मूली समझ रहे हैं। नारद जी ने बड़ी सोच की मुद्रा में लंबी साँस लेते हुए देवराज इन्द्र की तरफ़ मुख़ातिब होकर चुटकी ली। देवराज अब तुम ही बताओ देवभूमि पहले कांग्रेस मुक्त होगी या फिर कोरोना मुक्त।इन्द्र ने देवर्षि के चरण पकड़े और दयनीय मुद्रा में जिज्ञासा प्रकट करते हुए कहा कि तीनों लोकों की पल-पल की ख़बर रखने वाले देवर्षि नारद यह तो आप ही बता सकते हैं। यह सुनकर देवराज की तरफ़ आशीर्वाद की मुद्रा करते हुए देवर्षि नारद नारायण- नारायण कहकर अंतर्ध्यान हो गए।देवराज इन्द्र के कानों में अब भी त्राहिमाम त्राहिमाम के स्वर गूंज रहे थे। एक पल बाद ही देवराज मृत्युलोक के वासिंदों के इस ग़म को भुलाने के लिए वापस अपने लोक में गुम हो गए...।


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