अतिवृष्टि से प्याज की पैदावार हुई प्रभावित, मांग और आपूर्ति में अंतर से भावों में आई तेजी, थोक भाव 60 रुपए तक पहुंचा



मालवा-निमाड़। अतिवृष्टि से प्याज की पैदावार भी प्रभावित हुई है। मांग और आपूर्ति में अंतर से इसके भावों में तेजी आ गई है। व्यापारिक क्षेत्रों के अनुसार भाव बढ़ने की दो वजह हो सकती हैं। पहली, फसल का खराब होने और दूसरी, निर्यात फिर से शुरू होना। थोक में प्याज 50 से 60 रुपए किलो तक पहुंच गया है। झाबुआ में तो खेरची में 80 रुपए किलो बिक गया। महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और राजस्थान में भी पैदावार कम होने से आवक नहीं हैं


रतलाम-झाबुआ में होटल वालों ने खाने के साथ प्याज देने में हाथ खींचना शुरू कर दिया है। कहीं-कहीं तो प्याज के लिए अतिरिक्त पैसा भी वसूला जा रहा है। आगामी दिनों भी प्याज के भावों में गिरावट के संकेत नहीं हैं। रतलाम में सोमवार को थोक में 5700 रुपए क्विंटल बिका प्याज मंगलवार को हालांकि 4900 रुपए हो गया, लेकिन भाव में तेजी के चलते होटलों, भोजनालयों में खाने के साथ दिए जाने वाले प्याज की मात्रा कम कर दी गई। कहीं-कहीं तो थाली से प्याज हटा लिए गए।


कुछ होटलों प्याज के लिए अलग से चार्ज किया जा रहा है। मंगलवार को मंडी में प्याज की आवक 6277 कट्टे रही। खुले बाजार में प्याज के भाव 60 से 65 रुपए किलो बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार पहले अफगानिस्तान से प्याज खरीदने पर भाव में कुछ कमी आई थी, लेकिन अन्य देशों में प्याज भेजने पर भाव फिर बढ़ गए। शाजापुर में मंगलवार को प्याज थोक में अधिकतम 55 रुपए किलो तक बिका। अतिवृष्टि के चलते जिले में बरसाती प्याज की आवक नहीं हो पाई है।


इधर, रबी सीजन में बोई फसल अगले साल तक आने के चलते भाव में तेजी आ गई है। पर्याप्त पानी होने से इस बार प्याज फसल आठ हजार हेक्टेयर में बोने की संभावना है। जिले में पिछले सीजन में करीब 30 लाख क्विंटल प्याज का उत्पादन हुआ था। धार में पिछले एक सप्ताह में प्याज के भावों में 25 से 30 रुपए के उछाल के साथ भाव 50 रुपए पर पहुंच गए हैं। बदनावर में तो प्याज 60 रुपए किलो तक बिक गया। बदनावर में करीब दो हजार कट्टे प्याज की आवक रही। एक सप्ताह पहले प्याज 30 से 35 रुपए प्रति किलो था।


मप्र में प्याज की फसल एक माह देरी से आएगी जबकि महाराष्ट्र, गुजरात, कनार्टक और राजस्थान में नए प्याज की आवक शुरू हो चुकी है। बारिश से वहां भी पैदावर कम हुई है इससे अधिकतम खपत वहीं होने से अन्य बाजारों में नहीं पहुंच पाया है। झाबुआ में कुछ दिनों पहले 45-50 रुपए किलो बिक रही प्याज 75-80 रुपए किलो तक बिक रही है। होटलों के साथ घरों की रसोई भी प्याज नजर नहीं आ रही है। सब्जी व्यवसायी यूसुफ बागवान का कहना है कि झाबुआ में प्याज की पैदावार नहीं होती। महाराष्ट्र से ही यहां प्याज आता है। इस बार वर्षा से प्याज की फसल 90 प्रश तक बर्बाद हो गई है। सरकार ने प्याज का निर्यात भी फिर से शुरू कर दिया है। ऐसे में माल की कमी होने से भाव बढ़ रहे हैं।


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