बाला के दबाव में दागी अफसर को प्रमोशन देने के फेर में कमलनाथ सरकार



भोपाल। लोकायुक्त द्वारा भ्रष्टाचार के मामलों में पकड़े गए अफसरों को लेकर पिछली शिवराज सरकार और छह महीने पुरानी कमलनाथ सरकार में कोई ज्यादा अंतर नहीं है। भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टालरेंस का दावा करने वाली भाजपा सरकार के पिछले पन्द्रह सालों का एक मजेदार तथ्य यह भी रहा है कि इस दौरान दिग्विजय सिंह सरकार के दौरान लोकायुक्त में फंसे अफसरों तक के लिए चालान पेश करने की अनुमति सरकार ने लोकायुक्त को नहीं दी। ऐसा ही एक मामला इन दिनों कमलनाथ सरकार के गलियारों में दौड़ रहा है


हालांकि भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टालरेंस का दावा तो कमलनाथ सरकार भी कर रही है। बावजूद इसके एक लोकायुक्त दागी अफसर को विधि विभाग की राय के खिलाफ सरकार चालान पेश करने की अनुमति तो दे ही नहीं रही है बल्कि अफसर के प्रमोशन की कोशिश में लगी है। इस मामले में एक बड़ा शराब माफिया भी भरपूर दिलचस्पी ले रहा है।  मामला आबकारी विभाग से जुड़ा है।


फिलहाल आरक्षण के कारण डिप्टी कमिश्नर के पद तक जा पहुंचे एक अफसर के खिलाफ विधि विभाग ने लोकायुक्त द्वारा चालान की अनुमति मांगे जाने के मामले में अपनी राय अफसर के खिलाफ दी है। इस अफसर के खिलाफ इंदौर में डिप्टी कमिश्नर आबकारी रहते हुए लोकायुक्त ने छापामारी की थी। मामला अनुपातहीन संपत्ति से जुड़ा था। लोकायुक्त की इस कार्रवाई के बाद उक्त अफसर को हटा कर मुख्यालय ग्वालियर में पदस्थ कर दिया गया था।


छापे के बाद हुई जांच पड़ताल के बाद लोकायुक्त ने इस अफसर के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए चालान पेश करने की अनुमति शिवराज सरकार के दौरान मांगी थी। शिवराज सरकार ने इसे विधि विभाग से राय लेने के लिए भेज दिया था। विधि विभाग की राय कमलनाथ सरकार के दौरान अभी एक पखवाड़े पहले आई है। विधि विभाग ने अपनी राय में प्रकरण को अदालत में चलाने की अनुमति देने के लिए कहा है। पर इसे राज्य मंत्रालय ने अभी रोक रखा है।


इस मामले में गृहमंत्री बाला बच्चन की दिलचस्पी के कारण इसे मंत्रिमंडल की उपसमिति में लाने का प्रयास किया जा रहा है। इस समिति में बाला बच्चन खुद भी शामिल है। बाला बच्चन की कोशिश है कि इस अफसर को लोकायुक्त के चालान से मुक्ति दिला दें। हालांकि सूत्रों के अनुसार यह इतना आसान नहीं है। सरकार ने दर्जनों मामलों में अफसरों के खिलाफ मुकदमें चलाने की अनुमति नहीं दी है, लेकिन इससे सिर्फ दोषी अफसर के चालान को सरकार रोक ही सकती है। मामले में खात्मा लगाने का मौका सरकार को नहीं मिलता है और ऐसे मामलों में लोकायुक्त को अफसर के रिटायर होने तक का इंतजार करना पड़ता है। बहरहाल, गृहमंत्री बाला बच्चन इस अफसर के प्रमोशन के लिए आबकारी विभाग के आला अफसरों पर दबाव डाल रहे हैं। पर इस मामले में आला अफसर असमंजस में है और मामला फिलहाल किसी निर्णय तक नहीं पहुंच पा रहा है। 


वेब खबर

वेब खबर



प्रमुख खबरें

राज्य

राजनीति