प्रदेश की माली हालत को पटरी में लाने कमलनाथ ने फिर लिया एक हजार करोड का कर्ज



भोपाल। कर्जमाफी से गड़बड़ाई प्रदेश की माली हालत को पटरी पर लाने के लिए सरकार बाजार से लगातार कर्ज ले रही है। इसी महीने सरकार ने फिर एक हजार करोड़ रुपए उधार लिया है, ताकि विकास परियोजनाओं का काम न रुके। वर्ष 2019 में ऐसा कोई महीना नहीं बीता, जब सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से कर्ज न लिया हो। जनवरी से अगस्त तक सरकार 12 हजार 600 करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है। चालू वित्तीय वर्ष (अप्रैल से अब तक) में छह हजार करोड़ रुपए लिए गए हैं


हालांकि अभी सरकार 18 हजार करोड़ रुपए तक और कर्ज ले सकती है। सूत्रों के मुताबिक कमलनाथ सरकार ने 50 लाख किसानों की दो लाख रुपए तक कर्जमाफी करने का जो बड़ा फैसला लिया है, उसकी वजह से खर्च का हिसाब गड़बड़ा गया है। इसे पटरी पर लाने और दूसरे कामों के लिए बजट का इंतजाम करने मुख्यमंत्री कमलनाथ और वित्त मंत्री तरुण भनोत ने वित्तीय प्रबंधन के सूत्र अपने हाथ में ले लिए हैं।


इसके तहत पहली बार आठ प्रमुख विभागों (लोक निर्माण, जल संसाधन, नगरीय विकास, पंचायत, स्कूल शिक्षा, आदिम जाति कल्याण सहित अन्य) को विशेष दर्जा देकर मासिक खर्च की सीमा तय कर दी है। इसके पीछे मकसद यही है कि विभाग व्यवस्थित तरीके से बजट का उपयोग करें। ऐसा न हो, किसी एक माह में बहुत राशि खर्च कर दी जाए और किसी माह बिल्कुल भी नहीं। इसके साथ ही 250 से ज्यादा योजनाओं को अन्य योजनाओं में मिलाया जा चुका है।


साथ ही बाजार से एकमुश्त बड़ी राशि का कर्ज लेने की जगह विकास परियोजनाओं की जरूरत के हिसाब से राशि लेने की रणनीति बनाई गई है। इसके तहत ही जनवरी से अगस्त तक 12 हजार 600 करोड़ रुपए भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से कर्ज लिया गया है। दो अगस्त को जो एक हजार करोड़ रुपए लिए गए हैं, उसे चुकाने की मियाद वर्ष 2039 है। वित्तमंत्री तरुण भनोत का कहना है कि हम बजट में ही साफ कर चुके हैं जो भी कर्ज लेंगे उसका पूरा सदुपयोग होगा।


विकास कार्यों को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। राज्य के बेहतर वित्तीय प्रबंधन को देखते हुए राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का साढ़े तीन फीसदी तक कर्ज लिया जा सकता है। 15वें वित्त आयोग से राज्य ने इस सीमा को चार प्रतिशत तक करने की मांग भी रखी है। 20 लाख किसानों को मिली कर्जमाफी: कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी तक 20 लाख से ज्यादा किसानों को कर्जमाफी दी जा चुकी है। इसके एवज में बैंकों में सात हजार करोड़ रुपए जमा कराए गए हैं। वर्ष 2019-20 में आठ हजार करोड़ रुपए का बजट प्रावधान कर्जमाफी के लिए रखा है। अब एक लाख रुपए तक चालू खाते के कर्ज को माफ करने की प्रक्रिया चल रही है। इसमें भी पूरे प्रदेश में एक साथ की जगह जिलेवार कर्जमाफी की जा रही है।

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