हनी ट्रैप मामले में सीएम ने आला अफसरों की ली क्लास, पूछा- जांच में एटीएस का क्या काम



भोपाल। हनी ट्रैप मामले में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोमवार को आला अफसरों की जमकर क्लास ली। मुख्यमंत्री ने रात 9 बजे मुख्य सचिव एसआर मोहंती, डीजीपी वीके सिंह और एटीएस चीफ संजीव शमी को सीएम हाउस तलब किया


विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने अफसरों से सवाल किया कि हनी ट्रैप कोई आतंकी गतिविधि तो हैं नहीं, फिर इसकी जांच में एंटी टेररिस्ट स्कवॉड (एटीएस) कहां से आ गई? घंटे भर तक चली बैठक में यह बात भी उठी कि एटीएस हनी ट्रैप का खुलासा करने के लिए तीन महीने से किसकी अनुमति लेकर सर्विलांस कर रही थी? आखिर यह सब क्या चल रहा है? अफसरों ने इस मसले पर सीएम को सफाई देने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने अफसरों से दो टूक कहा कि बेवजह की बयानबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


बैठक शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री ने एटीएस के गठन से संबंधित नोटिफिकेशन मंगाकर उसका भी अध्ययन किया था। नाथ ने दी अफसरों को चेतावनी: मुख्यमंत्री ने अफसरों को हिदायत दे दी है कि वे बयानबाजी बंद कर काम पर फोकस करें। साथ ही चेतावनी भी दी कि प्रदेश की छवि खराब करोगे तो किसी को नहीं छोड़ूंगा। सायबर सेल के डीजी पुरुषोत्तम शर्मा भी सीएम की फटकार के बाद से ही चुप हैं। अन्य अफसरों ने भी मीडिया से बात करने से परहेज दिखाया।


अफसर बोले- एक महिला खुद को विदेशी बता रही थी: बैठक में अफसरों ने यह भी तर्क दिया कि हनी ट्रैप से जुड़ी एक महिला आरोपी खुद को विदेशी नागरिक के तौर पर प्रोजेक्ट कर रही थी। ऐसे में एटीएस का इन्वॉल्वमेंट जरूरी था। हालांकि मुख्यमंत्री ने उनका यह तर्क खारिज कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हनी ट्रैप की शिकायत इंदौर के एक थाने में हुई थी तो उसे इंदौर पुलिस को ही देखना था।


उस आधार पर प्रदेश के तमाम अफसरों को उसकी जांच के दायरे में लेने का क्या मतलब है? मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले ही व्यापमं महाघोटाले की वजह से मध्यप्रदेश की बहुत बदनामी हो चुकी है। अब लोग हनी ट्रैप की चर्चा कर रहे हैं। हनी ट्रैप से प्रदेश की छवि को जो क्षति हुई है, उसकी भरपाई कैसे होगी?/span> आरोपी महिलाओं को एक दिन की ट्रांजिट रिमांड पर भेजा गया: पुलिस ने आरोपी श्वेता पति विजय, श्वेता पति स्वप्निल तथा बरखा सोनी को सोमवार को भोपाल कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें एक दिन की ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया गया। मंगलवार सुबह 11:30 बजे तक उन्हें इंदौर कोर्ट में पेश किया जाएगा। नगर निगम इंजीनियर हरभजन सिंह को ब्लैकमेल करने में पर्दे के पीछे मास्टरमाइंड श्वेता विजय जैन है। उसी ने आरती दयाल को हरभजन से मिलवाया। यह बात हरभजन भूल गया और उसने सिर्फ आरती पर शंका जताई थी। अब पूछताछ में आरती ने कबूला कि उसे श्वेता ही कमांड कर रही थी। जब आरती ने ब्लैकमेलिंग के लिए 3 करोड़ मांगे तो हरभजन ने राशि ज्यादा होने की बात कही थी। इस पर आरती ने एक फोन लगाया और राशि 2 करोड़ कर दी थी। वह फोन श्वेता को ही लगाया गया था। एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र के अनुसार सभी से पूछताछ में श्वेता के मास्टमाइंड होने का खुलासा हुआ। आरती ने कबूला कि श्वेता का मानना था कि उसके भाई राजा की हरभजन ने कई ठेकों में मदद की है, इसलिए वह सीधे उसे ब्लैकमेल नहीं कर सकती है।

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