एक सीट, दो नारी, कौन पड़ेगी भारी...?



उत्तर प्रदेश की रामपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव और फिल्म अभिनेत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता जयाप्रदा के बीच दिलचस्प मुकाबले के आसार हैं


  सपा विधायक मोहम्मद आजम खां के लोकसभा के लिये निर्वाचित होने के बाद रिक्त हुयी रामपुर विधानसभा सीट पर कन्नौज की पूर्व सांसद डिंपल यादव के उतरने के कयास लगाये जा रहे हैं, जबकि रामपुर संसदीय क्षेत्र से खां के हाथों पराजित हुयी भाजपा की जयाप्रदा के उपचुनाव में शिरकत करने का अनुमान है।  सपा सूत्रों के मुताबिक खां ने रामपुर विधानसभा सीट पर नौ बार विजय पताका फहरायी है और पार्टी किसी भी सूरत में इस सीट को खोना नहीं चाहेगी।


इस लिये पार्टी के एक चर्चित और योग्य चेहरे को यहां से उम्मीदवार बनाये जाने पर गंभीरता से विचार कर रही है और इस फेहरिस्त में पहला नाम डिंपल का है। इस बारे में जल्द निर्णय लिया जायेगा। आसार यह हैं कि सपा और बसपा भले ही उपचुनाव में अलग अलग किस्मत आजमा रहे हैं, लेकिन पार्टी को भरोसा है कि बसपा रामपुर से अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी। ऐसी उम्मीद कांग्रेस से भी की जा रही है, क्योंकि कांग्रेस भी मत विभाजन कर भाजपा का पक्ष मजबूत करना पसंद नहीं करेगी।


सितंबर-अक्टूबर के बीच संभावित इस उपचुनाव के बारे में डिपंल यादव की उम्मीदवारी पर फैसला जल्द लिया जायेगा। दूसरी ओर, भाजपा के खाते में रामपुर विधानसभा सीट कभी नहीं आयी है, लेकिन इस बार जयाप्रदा पार्टी के लिये उम्मीद की किरण बनकर उभरी हैं। खां से परास्त होने के बाद रामपुर का नियमित भ्रमण कर रही जयाप्रदा लोगों से संवाद करने में जुटी है और इसी बहाने सपा के किले में अपनी जमीन तैयार कर रही हैं।


  बता दें कि भाजपा में शामिल होने से पहले जयाप्रदा रामपुर लोकसभा सीट पर वर्ष 2004 और 2009 में विजय पताका फहरा चुकी है। खां 1980 से लगातार रामपुर के विधायक रहे है। वर्ष 1992 में सपा की स्थापना के बाद वह लगातार पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतते रहे हैं। खां के प्रभाव के चलते भाजपा के अलावा बसपा की भी रामपुर में जीत की तलाश पूरी नहीं हो सकी है। इधर, डिंपल यादव ने अपना करियर वर्ष 2009 में फिरोजाबाद उपचुनाव में हार के साथ शुरू किया था, लेकिन कन्नौज में 2012 में हुये लोकसभा उपचुनाव में उन्हे जीत का स्वाद मिला जब उनके पति अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह सीट रिक्त हुयी थी। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होने अपनी सीट को सुरक्षित रखा था। हालांकि पिछले संसदीय चुनाव में उन्हे भाजपा के सुब्रत पाठक के हाथों करीब 12 हजार वोटों से हार का मुंह देखना पड़ा था।  

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