कर्नाटक संकट: विधायकों के इस्तीफे पर विधानसभा अध्यक्ष ले सकते हैं फैसला, कांग्रेस में बैठकों का दौर शुरू



नई दिल्ली। कर्नाटक में जेडीएस-कांग्रेस सरकार पर मंडरा रहे संकट को लेकर आज एक अहम फैसला हो सकता है। विधानसभा स्पीकर विधायकों के इस्तीफे पर अपना रुख साफ कर सकते हैं। अगर वो सभी 13 विधायकों के इस्तीफे मंजूर करते हैं तो राज्य की वर्तमान सरकार के सामने बहुमत का संकट खड़ा हो जाएगा। दूसरी तरफ सुबह से ही कांग्रेस की बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। कांग्रेस नेता सिद्धारमैया के आवास पर कांग्रेस नेताओं की बैठक शुरू हो चुकी है


वहीं दूसरी तरफ येद्दियुरप्पा के आवास पर भाजपा नेताओं की बैठक जारी है। कर्नाटक की कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार दो निर्दलीय विधायकों व मंत्री एच. नागेश व आर. शंकर के इस्तीफे से सोमवार को पतन के और करीब पहुंच गई। उनके समेत बागियों की संख्या 15 हो गई है। हालांकि, बागियों को मनाने के लिए कांग्रेस के 21 और जेडीएस के नौ मंत्रियों ने भी मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी को अपने इस्तीफे सौंप दिए, ताकि वे सरकार बचाने के लिए बागियों को जगह देकर मंत्रिमंडल का पुनर्गठन कर सकें।


हालांकि बागियों ने साफ कर दिया है कि वे फिर गठबंधन में नहीं लौटेंगे। कुमारस्वामी ने अपनी सरकार बचाने के लिए 14 जून को ही निर्दलीय नागेश व शंकर को मंत्री बनाया था। नागेश व शंकर ने सोमवार को राज्यपाल वजुभाई वाला को अपने त्यागपत्र सौंपे। उन्होंने यह भी कहा है कि राज्यपाल यदि भाजपा को सरकार बनाने का न्योता देंगे तो वह उसे साफतौर पर समर्थन देंगे। इस्तीफे के बाद दोनों मुंबई रवाना हो गए, जहां अन्य बागी विधायक ठहरे हुए थे।


नागेश व शंकर के इस्तीफे से कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार की हालत और खराब हो गई है, क्योंकि उनके 13 विधायक पहले ही स्पीकर को इस्तीफे दे चुके हैं। यदि आज विधानसभा स्पीकर इनके इस्तीफे स्वीकार कर लेते हैं तो सत्तारूढ़ गठबंधन बहुमत खो देगा। नागेश व शंकर को मिलाकर भाजपा के 107 विधायक हो गए हैं, जबकि बागियों के इस्तीफे मंजूर होने पर गठबंधन के 103 विधायक रह जाएंगे।


15 बागी विधायक मुंबईसे गोवा रवाना हुएउधर शनिवार से मुंबई की एक पंचतारा होटल में डेरा जमाए बैठे कांग्रेस-जेडीएस के 10 बागी विधायकों व निर्दलीयों समेत कुल 15 विधायकों को सोमवार शाम मुंबई से गोवा भेज दिया गया। उधर मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने कन्नड में ट्वीट कर बताया कि गठबंधन सरकार में शामिल कांग्रेस के 21 मंत्रियों की तर्ज पर जेडीएस के भी 9 मंत्रियों ने उन्हें अपने इस्तीफे सौंप दिए हैं। जल्द ही कैबिनेट का पुनर्गठन किया जाएगा। कुनबा एकजुट रखना होगा मुश्किल अगर राज्यपाल ने सरकार को सदन के अंदर बहुमत साबित करने का निर्देश दिया तो कुनबा समेटना और एकजुट रखना और मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति बनी तो नतीजा आने के बाद ही सरकार गठन का एक असफल प्रयास कर चुकी भाजपा के लिए फिर से रास्ता खुल सकता है। 

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