सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण के अभिजीत बनर्जी के विचार से असहमत: जयराम रमेश



नई दिल्ली। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मंगलवार को कहा कि वह नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी के बैंकों को लेकर दिए गए विचार से असहमत हैं


बनर्जी ने कहा था कि सरकार को देश में बैंकिंग संकट से निपटने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण करना चाहिए। उन्होंने देश में बैंकिंग संकट को भयावह करार दिया था।


साथ ही इस स्थिति से निपटने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सरकारी हिस्सेदारी को कम करने की बात कही थी।


अभिजीत ने कहा था, सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अपनी हिस्सेदारी को 50% से कम करनी चाहिए, ताकि बैंक केंद्रीय सतर्कता आयोग के दायरे से बाहर हो जाएं।


रमेश ने ट्वीट किया- मैं अभिजीत बनर्जी के बौद्धिक कौशल से बिल्कुल असहमत हूं। बैंकिंग सिस्टम करीब पांच सालों के नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) के चलते संकट में है। एनपीए के चलते इस क्षेत्र में नेट वर्थ में कमी हुई है। कई घोटाले भी हुए हैं। हाल ही में पंजाब और महाराष्ट्र सहकारी बैंक का घोटाला सामने आया है। बैंकिंग सेक्टर की स्थिति खराब- बनर्जी: बनर्जी को पत्नी एस्तेय डुफ्लो के साथ अर्थशास्त्र का नोबेल मिला है। उन्होंने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने कहा था कि भारत में बैंकिंग सेक्टर संकट में है। हालात बेहद डरावने हैं। हमें सावधान रहने की जरूरत है।

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