आवारा पशुओं का शहर में आतंक, रोज हो रही दुर्घटना...



मंदसौर। आवारा मवेशियों की समस्या नगर के लिए नई नहीं है। शहर के हर क्षेत्र में यह समस्या आम बात है। आवारा पशुओं की वजह से रोज सड़क दुर्घटना हो रही है। कई दुर्घटनाओं में जहां नागरिकों की मौत हो रही है, वहीं कई नागरिक जीवल भर के लिए अपाहिज हो रहे है। एक जन हित याचिका में न्यायालय ने मंदसौर नगर पालिका को आवारा पशुओं पर कार्यवाही करने के लिए आदेशित किया था


जिस पर आज तक दिखावे के लिए भी कोई करवाई नहीं की गई। अब जबलपुर हाई कोर्ट ने मामले में संज्ञान लिया है। लेकिन, नगर पालिका के अधिकारियों के कान पर जूं नहीं रेंग रही है। आवारा पशु आज भी जस के तस सड़कों पर डेरा डाले बैठे रहते है। जिससे रोज दुर्घटना हो रही है। इन दिनों आवारा मवेशियों के साथ ही सड़क पर बड़े बड़े गड्ढे भी दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ा रहे है।


आमजन अपनी जान से जा रहे है लेकिन नगर पालिका के अधिकारियों को इस से कोई लेनादेना नहीं है। न्यायालय के निर्देश के बाद भी नगर पालिका द्वारा कार्यवाही नहीं करना, इसे न्यायालय की अवमानना ही कहा जाएगा। किसी भी मामले में न्यायालय के आदेश की अवमानना करने पर जैल भेजे जाने तक कि सजा हो सकती है। फिर भी ना नगर पालिका ओर ना ही प्रशासन इस ओर ध्यान दे रहे है।


इधर मंगलवार को जबलपुर हाई कोर्ट ने आवारा पशुओं की समस्या को लेकर राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए नाराजगी व्यक्त की है। जस्टीज जेके माहेश्वरी ओर अंजुलि पालो कि बैंच ने मंगलवार को कहा पिछले कुछ समय से आवारा पशुओं के कारण सड़क पर चलना मुश्किल हो रहा है। कितनी ही दुर्घटनाओं में आमजन की जान जा रही है, तो कई दुर्घटनाओं में नागरिक जीवन भर के लिए अपाहिज हो रहे है।


बेंच ने कहा आवारा पशुओं की वजह से जो सड़क हादसे हो रहे है, उसमें कलेक्टर, एसपी ओर मुख्य नगर पालिका अधिकारी को दोषी पाते हुए सजा दी जाएगी। अब देखना होगा की हाई कोर्ट के निर्देश के बाद शहर के हालात सुधरते है या नगर पालिका अधिकारी जिला न्यायालय की तरह हाई कोर्ट की भी अवमानना करेंगे। जबकि, नगर पालिका सीएमओ एवं नपा में पदस्थ 9 दरोगा मंदसौर न्यायालय में उपस्थित होकर यह कह चुके है, कि हम निरंतर कार्यवाही कर रहे है और आगे भी करवाई जारी रहेगी।

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