नई अफीम नीति का विरोध जारी, किसान उतरे सड़कों पर



मंदसौर। एक बार फिर किसान केंद्र सरकार की नई अफीम नीति को लेकर सड़क पर उतर आए हैं। केंद्र सरकार ने जबसे नई अफीम नीति की घोषणा की है तब से किसान लगातार आक्रोशित हैं। केंद्र सरकार की नई अफीम नीति को लेकर कांग्रेस पहले ही दो चरणों में जिला मुख्यालय पर आंदोलन कर चुकी है और जो किसानों की मांग है उसी मांग का कांग्रेस भी समर्थन कर रही है। नई अफीम नीति के अंतर्गत अब किसानों को अफीम में पाई जाने वाली मार्फिन के आधार पर नए पट्टे जारी करने का निर्णय लिया गया है, जिसके तहत किसानों को मार्फिन के आधार पर पट्टे जारी किए गए हैं


नई नीति के कारण मन्दसौर-नीमच जिले के लगभग 7000 किसानों के अफीम लाइसेंस काट दिए गए हैं। वही, नारकोटिक्स विभाग ने अफीम का रकबा भी घटा दिया है। पहले दस आरी के पट्टे किसान को दिए जाते थे अब विभाग ने किसानों को 5 और 6 आरी के पट्टे जारी किए हैं। किसानों की मांग है कि कम से कम दस आरी का पट्टा दिया जाना चाहिए। किसानों की मांगों को लेकर मन्दसौर में मध्यप्रदेश अफीम किसान संगठन और किसान महासभा ने किसानों का एक धरना प्रदर्शन रखा जिसमें किसान संगठनों ने स्थान का चयन साल 2017 में हुए किसान आंदोलन का केंद्र पिपलिया मंडी रखा।


इस बार भी धरना प्रदर्शन में खासतौर से अफीम उत्पादक किसान धरने में शामिल हुए और किसान संगठनों के कई नेताओं ने इसका नेतृत्व किया। धरने के बाद प्रधानमंत्री के बाद नरेंद्र मोदी के नाम मल्हारगढ़ एसडीएम को ज्ञापन दिया गया। जिसमें मांग की गई की किसानों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए पुरानी नीति को ही लागू कर दिया जाए। नई नीति से किसानों का बहुत नुकसान हुआ है। इस वर्ष हुई अतिवृष्टि से परेशान किसानों को सरकार से बहुत उम्मीद और आशा थी परंतु किसानों को सरकार ने कोई राहत नहीं दी। किसानों के पट्टे कटने से किसानों में भारी आक्रोश और रोष व्याप्त है।


ज्ञापन में यह भी मांग की गई की मार्फिन की अनिवार्यता समाप्त की जावे और किसानों को औसत के आधार पर पट्टे जारी किया जाए। पांच आरी छह आरी के स्थान पर प्रत्येक किसान को 10- 10 आरी के पट्टे जारी किए जाएं। नारकोटिक्स विभाग के अधिकारी भ्रष्टाचार के नाम पर किसानों से अवैध वसूली करते है, लेकिन किसान अफीम के पट्टे कटने के डर से कहीं भी शिकायत भी नहीं कर सकते। मंदसौर और नीमच जिले में अफीम की खेती किसानों के लिए प्रतिष्ठा का विषय मानी जाती है, किसानों की मुख्य आजीविका का साधन भी अफीम की खेती ही है।


अभी हाल ही में मंदसौर और नीमच जिला बाढ़ से काफी प्रभावित हुआ है और किसानों की खरीफ की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। किसानों को उम्मीद थी कि इस बार अफीम का रकबा उन्हें बढ़कर मिलेगा और अफीम की फसल कमाई देगी जिससे वह अपने बाढ़ से हुए नुकसान की पूर्ति कर लेंगे।  किसान परेशान, सांसद हरियाणा चुनाव में व्यस्त... क्षेत्र से भारी भरकम वोटों से दो बार जीते सांसद सुधीर गुप्ता इन दिनों हरियाणा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रचार करने में व्यस्त हैं। क्षेत्र के किसान परेशान है और सांसद भाजपा को जिताने में लगे है। जिसका कांग्रेस पूरा फायदा उठा रही है। और सांसद सुधीर गुप्ता पर आरोप लगा रही है। ऐसा ना हो हरियाणा के चक्कर मे सुधीर गुप्ता को अपने संसदीय क्षेत्र के किसानों का विरोध झेलना पड़े।

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