तीन बड़ी फिल्में हाउसफुल 4, मेड इन चायना ओर सांड की आँख शुक्रवार से सिनेमाघरों में



 मंदसौरी मूवी रिव्यू। त्योहारों के राजा दीपावली पर बॉलीवुड दर्शकों के तीन बड़ी फिल्म लेकर आया है। जिहा हम बात कर रहे है इस शुक्रवार सिनेमाघरों में रिलीज हुई है हाऊसफूल 4, मेड इन चायना ओर सांड की आँख की। तीनो ही फिल्में अलग जॉनर की है। जो दर्शकों को सिनेमाघरों में खीचने में सक्षम है। हाउसफुल 4 में भारी भरकम स्टार कास्ट है, जबकि मेड इन चायना में राजकुमार राव ओर मौनी रॉय मुख्य किरदार में है। तीसरी फिल्म सांड की आँख में मुख्य किरदार में तापसी पन्नू ओर भूमि पेड़नेकर है। तीनो फिल्में अलग है हाउसफुल 4 एक सफल फ्रेंचाइज़ का चौथा भाग है यह फिल्म कॉमेडी है जो आप को गुदगुदाएगी। मेड इन चायना एक नए कंसेप्ट की फिल्म है। इस में आप किसी भी तरह का दिमाक ना लगाए। फिल्म फूलआन मसाला है। सांड की आँख फिल्म सत्य घटना पर आधारित है जो दो महिलाओं के संघर्ष को दिखाती है। कुल मिलाकर यह दीपावली आप के लिए फिल्मो का भंडार है, अब आप तय करे आप को कौन सी देखना है


हालांकि तीनों फिल्में केवल वन टाइम वाच है। फिल्मो से ज्यादा उम्मीद ना करे। हाउसफुल 4 की कहानी... 'हाउसफुल 4' की कहानी 1419 के सितमगढ़ की है।  जहां अक्षय, बॉबी, रितेश, कृति, पूजा और कृति एक दूसरे से प्यार करते हैं, लेकिन कुछ वजहों से जुदा हो जाते हैं। छह सौ साल बाद 2019 में तीनों जोड़े पुनर्जन्म लेते हैं, और इसके बाद फिर शुरू होती है, हाउसफुल फ्रेंचाइज़ का कन्फ्यूजन। कपल्स का मिस मैच और एक के बाद एक ढेर सारे कैमियो। कुल मिलाकर हाउसफुल 4 को पहले तीन पार्ट की तर्ज पर ही गढ़ने की कोशिश की गई है। कहानी बेहद कमजोर है, लेकिन सिंगल लाइनर्स आप को हसाएंगे। फिल्म में कुछ जबरदस्ती के जोक्स ठूंसे गए हैं। हाउसफुल 4 में एक्टिंग की बात करें तो फिल्म में ढेर सारे एक्टर हैं। लेकिन केवल अक्षय ही अपने किरदार के साथ न्याय करते नजर आए बाकी कई तो इतने बेतुके हैं कि समझ ही नहीं आता उन्हें फिल्म में क्यों डाला गया है।


रितेश देशमुख ओर बॉबी देओल की एक्टिंग फिल्म में की कमजोर नजर आई है। फिल्म के बाकी एक्टर भी कुछ खास करिश्मा नहीं कर पाए हैं। कुल मिलाकर एक कमजोर और बेतुकी कहानी के आधार पर सितारों की फौज को खड़ा किया गया है। जिस फिल्म अपनी पहली दो। फिल्म का कोई भी एक्टर ऐसा नहीं है जो दिल या दिमाग पर अपनी छाप छोड़कर जाता है। हाउसफुल सीरीज की यह चौथी फिल्म है पहली दो फिल्में हिट हुई थी। फिल्म का तीसरा पार्ट बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरा था। लगता है चौथे पार्ट के साथ भी ऐसा ही कुछ होने वाला है। कहानी मेड इन चायना की... दूसरी फिल्म है मेड इन चायना फिल्म की कहानी एक इंट्रेस्टिंग नोट पर शुरू होती है। जहां एक स्ट्रगलिंग गुजराती बिजनसमैन रघुवीर मेहता (राजकुमार राव) अब तक 13 अलग-अलग बिजनस के आइडियाज को इंप्लिमेंट करने के चक्कर में फेल हो चुका है। उसकी तेजतर्रार, खूबसूरत और पढ़ी-लिखी पत्नी रुक्मिणी (मौनी रॉय) हर कदम पर उसका साथ देती है। मगर उन पर छोटे बेटे की जिम्मेदारी भी है।


रघुवीर का कजिन वनराज (सुमीत व्यास) और उसके बड़े पापा ( मनोज जोशी) उसको आर्थिक सहायता तो देते हैं। मगर उसकी नाकामी को गिनाकर उसे नीचा दिखाने का एक भी मौका हाथ से नहीं जाने देते। तभी रघुवीर को चांस मिलता है वनराज के साथ चाइना जाने का। वहां उसकी मुलाकात अपनी ही कौम के जाने-माने सफल बिजनसमैन तन्मय शाह (परेश रावल) से होती है। जो उसे बिजनस का एक ऐसा गुरुमंत्र देता है, जिस पर अमल करके रघुवीर खुद को साबित कर सकता है। वह सेक्स लाइफ की संतुष्टि के लिए एक प्रॉडक्ट टाइगर सूप पर काम शुरू करता है और उसे सफल बनाने के लिए जहीन मगर लो-प्रोफाइल सेक्सॉलजिस्ट डॉक्टर वर्दी (बोमन ईरानी) को जोड़ता है। क्या रघुवीर इस बार सेक्स प्रॉडक्ट के बिजनस में सफल हो पाएगा? या हमेशा की तरह हाथ मलता रह जाएगा? यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी। फिल्म में आप को राजकुमार राव की दमदार अदाकारी देखने को मिलेगी। परेश रावल ओर बोमन ईरानी भी मंझे हुए एक्टर है उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है।


फिल्म की कहानी थोड़ी स्लो है जो बोर करती है। कहानी सांड की आंख फिल्म की... सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली तीसरी फिल्म सांड की आंख है। चंद्रो (भूमि पेडनेकर) और प्रकाशी (तापसी पन्नू) देवरानी-जेठानी हैं। फिल्म में भूमि पेडनेकर और तापसी पन्नू ऐसे महिलाओं के किरदार में हैं जिन्होंने बूढ़ी अवस्था में निशानेबाजी में देश का सिर ऊंचा किया और देश का गौरव बनीं। इंडिया की सबसे ओल्ड शार्पशूटर्स के तौर पर चंद्रो और प्रकाशी तोमर का नाम सबसे ऊपर आता है। चंद्रो की उम्र 87 साल और प्रकाशी की उम्र 82 है। उत्तरप्रदेश के छोटे से एक गांव से ताल्लुक रखने वालीं चंद्रो और प्रकाशी की जिंदगी पर आधारित फिल्म सांड की आंख में तापसी और भूमि इनदोनों महिलाओं की भूमिका निभा रही हैं। चंद्रो-प्रकाशी की बायोपिक में ढेर सारा इमोशनल ड्रामा है, फन है और कभी न भूलने वाले-सदा हिम्मत बढ़ाने वाली सीख है। इस बायोपिक को तुषार हीरानंदानी ने डायरेक्ट किया है। फिल्म में दिखाया गया कि कैसे इन दो महिलाओं ने समाज का भ्रम तोड़ा और एक अलग पहचान बनाई। इनकी जिंदगी में कैसी कैसी परेशानियां आईं ये देखने के लिए फिल्म देखना जरूरी है।

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