महाकाल मंदिर प्रबंधन समिति का अहम निर्णय, मप्र के निवासी ही कर पाएंगे बाबा के दर्शन, बाहर से आने वालों को मंदिर में नहीं मिलेगा प्रवेश



उज्जैन। उज्जैन में कोरोना मरीजों की बढ़ रही संख्या को देखते हुए शनिवार को मंदिर प्रबंधन समिति ने दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को लेकर अहम निर्णय लिया है। अब केवल मध्य प्रदेश के निवासी ही बाबा महाकाल के दर्शन कर पाएंगे। बाहर से आने वालों को मंदिर में प्रवेश नहीं दी जाएगी। टोल फ्री और आॅनलाइन बुकिंग करने वाले बाहर के भक्तों को भी इसकी सूचना दी जाएगी


परिस्थितियों के अनुसार आगे भी निर्णय लिया जाएगा। महाकाल मंदिर प्रशासक सुजान सिंह रावत ने बताया कि उज्जैन में पिछले कुछ दिनों में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या में काफी कमी आई थी। कई बार तो संख्या शून्य तक पहुंची। 10 से 12 दिनों में फिर से कोरोना मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है।


पड़ताल करने पर सामने आया कि इनमें से अधिकांश वे लोग हैं, जो बाहर से आए हैं या फिर बाहर से आने वालों के संपर्क में हैं।प्रदेश के बाहर के श्रद्धालुओं को बाबा के अभी दर्शन अनुमति नहीं होगी। जो आॅनलाइन बुकिंग करवा रहे हैं, उन्हें अब मैसेज मिलेगा कि आप यदि मप्र के बाहर के हैं तो अभी बुकिंग न करें। टोल फ्री नंबर पर कॉल आने पर भी उन्हें बताया जाएगा।


लॉकडाउन के बाद 79 दिन बाद 8 जून को शुरू हुए थे दर्शन: लॉकडाउन के चार चरण और अनलॉक-1 के सात दिन बाद यानी लॉकडाउन के 79 दिन बाद 8 जून को महाकाल मंदिर दर्शनार्थियों के खुला था। दर्शन के लिए एक दिन पहले अनुमति लेनी होती है। तड़के 4 बजे होने वाली भस्मारती और दिन में होने वाली पूजन-आरती और रात की शयन आरती में श्रद्धालुओं को प्रवेश पर रोक है।


65 साल व इससे ज्यादा उम्र के बुजुर्गों, शुगर, ब्लड प्रेशर, दमा जैसी गंभीर बीमारी वाले मरीजों, 10 साल से छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।& महाकाल दर्शन की यह व्यवस्था मंदिर के मोबाइल ऐप पर या टोल फ्री नंबर 18002331008 पर एक दिन पहले अनुमति लेना होती है। श्रद्धालुओं को जूते-चप्पल गाड़ी में या पार्किंग में बने जूता स्टैंड पर स्वयं की जिम्मेदारी पर रखना होता है। महाकालेश्वर के दर्शन के अलावा परिसर के अन्य मंदिरों में प्रवेश बंद। मंदिर में मोबाइल, बैग, पूजन सामग्री, जल-दूध व अन्य किसी भी तरह का सामान लेकर जाने पर मनाही। एक मोबाइल नंबर पर सप्ताह में एक बार ही कुल 5 लोगों की अनुमति। श्रद्धालुओं के लिए मास्क पहनना अनिवार्य है।


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