इंदौर में नीट की परीक्षा देने पहुंचे 20 हजार छात्र, छात्रों को रिपोर्टिंग के लिए दिए गए थे अलग-अलग टाइम स्लॉट, थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजर का किया गया प्रयोग



इंदौर। मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता और प्रवेश परीक्षा (नीट) रविवार को आयोजित की गई। शहर के 63 परीक्षा केंद्रों पर करीब 20 हजार छात्र परीक्षा देने पहुंचे। प्रतिभागियों के हॉल में प्रवेश से लेकर बाहर निकलने तक के लिए एनटीए ने सख्त निर्देश जारी किए थे। प्रवेश के समय केद्रों पर भीड़ ना लगे इसलिए छात्रों को रिपोर्टिंग के अलग-अलग टाइम स्लॉट दिए। 40-40 मिनट के टाइम स्लॉट में 80 से 100 छात्रों को केंद्र में प्रवेश मिला


दोपहर 2 बजे से शुरू होने वाली परीक्षा के लिए 11 बजे से छात्र पहुंच गए थे। इस दौरान थर्मल स्क्रीनिंग, सैनिटाइजर का प्रयोग किया गया। दो मीटर की दूरी बनाकर ही छात्रों को अंदर भेजा गया। इस दौरान बाहर खड़े परिजन दूर से ही हाथ हिलाकर लौटे। ऐसा था परीक्षा के दौरान का नजारा गेट से स्कूल परिसर में जाने से पहले हाथ सैनिटाइज कराए गए, फिर क्यू मैनेजर में से होते हुए रजिस्ट्रेशन रूम तक गए। लड़कों और लड़कियों की अलग-अलग लाइन थी।


लाइन में दो मीटर की दूरी पर छात्र खड़े हुए, मास्क जरूरी, लाइन में फुटमार्क पर ही खड़ा होना था। रजिस्ट्रेशन रूम के बाहर पहले थर्मल गन से तापमान मापा गया, लंबे हैंडल वाले मेटल डिटेक्टर से जांच गई। रजिस्ट्रेशन रूम में पहले 10 बच्चों को प्रवेश मिला। पांच बच्चों के बाहर निकलने पर अगले पांच को प्रवेश मिला। छात्रों ने यहां प्रवेश पत्र, आई कार्ड सहित अन्य कागज दिखाए। सीट अलोकेशन लिस्ट से छात्र को एग्जाम हॉल की जानकारी दी गई।


रजिस्ट्रेशन रूम के कर्मचारी द्वारा किसी भी छात्र के किसी डॉक्यूमेंट को हाथ नहीं लगाए गए। टेबलों के बीच भी कम से कम तीन फीट की दूरी रखी गई थी। रजिस्ट्रेशन रूम से निकलने वाले छात्र परीक्षा हॉल में गए यहां पर छात्रों की टेबल पर लिफाफे रखे गए। लिफाफे में प्रश्न पत्र के साथ ओएमआर शीट थी। छात्रों की मैन्युअल अटेंडेंस और हैंडराइटिंग के नमूने के साथ साइन भी लिए गए। कर्मचारियों का ग्लव्ज पहनना जरूरी था। छात्रों के अंगूठे का निशान नहीं लिया गया।


साइन और राइटिंग के नमूने लेने की प्रक्रिया के दौरान 50% इंविजिलेटर ही हॉल में मौजूद रहे। सीसीटीवी की लाइव स्ट्रीमिंग, जैमर भी: सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह पालन करवाने के लिए एनटीए ने परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाई थी। एक कमरे में 12 से 15 छात्र ही परीक्षा देने बैठे। पहले मेटल डिटेक्टर से जांच हुई। केद्रों पर ब्लूटूथ और सेंसर की जांच की गई। जैमर भी लगाए गए थे। सीसीटीवी कैमरों की लाइव स्ट्रीमिंग भी की गई। किसी भी कर्मचारी ने किसी भी प्रतिभागी के डॉक्यूमेंट्स को टच नहीं किया। एनटीए ने पूरी प्रक्रिया को ही टच फ्री बनाने पर जोर दिया था। मास्क, ग्लव्ज और सैनिटाइजर लेकर गए: परीक्षार्थी मास्क, हैंड ग्लव्ज, 50 एमएल सैनिटाइजर, पानी की पारदर्शी बोतल के साथ प्रवेश पत्र व परिचय पत्र लेकर भीतर गए। आभूषण, मोबाइल सहित अन्य उपकरण, घड़ी, फुल स्लीव के कपड़े प्रतिबंधित थे। वहीं, चप्पल पहनकर आने की सलाह भी दी गई थी।


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