मानसून की बेरूखी: जून में 114 प्रतिशत अधिक पानी गिरने के बाद जुलाई में गिरा 399.8 मिमी पानी, बारिश का कोटा नहीं हुआ पूरा



भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून आने के दो महीने बाद भी प्रदेश में ठीक से बारिश नहीं हो रही है। ऐसे में अब तक यह औसत तक भी नहीं पहुंच पाई है। जून में झमाझम बारिश से सभी रिकॉर्ड टूट गए, लेकिन अब भी यह औसत से 11% कम है


वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक जेडी मिश्रा ने बताया जून में 114% से भी ज्यादा बारिश हुई थी, लेकिन जुलाई में मानसून की बेरुखी चल है। ऐसे में 1 जून से 28 जुलाई तक 399.8 मिमी पानी गिर जाना था, लेकिन अब तक सिर्फ 357.6 मिमी बारिश ही हुई है।


52 में से 34 जिलों में औसत से कम: राज्य के अलग-अलग जिलों की बात की जाए, तो 52 जिलों में से 34 जिलों में तो सामान्य बारिश से बहुत कम बारिश हुई है।


एक्का-दुक्का जिलों को छोड़कर शेष में तो औसत से 50% से ज्यादा बारिश नहीं हो सकी है। पश्चिमी की अपेक्षा पूर्वी क्षेत्र में कम पानी गिरा: मौसम विभाग मध्यप्रदेश में मानसून को पश्चिमी और पूर्वी हिस्से में बांटकर आंकलन करता है।


अब तक पश्चिमी मध्यप्रदेश की अपेक्षा पूर्वी मध्यप्रदेश में ज्यादा बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसी कारण प्रदेश में बारिश की स्थिति ठीक नहीं है। पूर्वी हिस्से में इस समय तक 447.5 मिमी बारिश होनी थी, लेकिन यह 13% कम 389.9 मिमी ही हुई है। इधर अगर पश्चिमी हिस्से की बात की जाए तो 363.2 मिमी बारिश की तुलना में 8% कम 332.8 मिमी बारिश दर्ज की गई।


वेब खबर

वेब खबर



प्रमुख खबरें

राज्य

राजनीति