कमलनाथ का शिवराज पर हमला: बोले- कन्या पूजन का निर्णय स्वागत योग्य, मासूम हर दिन हो रही हैं दरिंदगी का शिकार,आपकी सरकार इस दिशा में हैं लापरवाह



भोपाल। कन्या पूजन के साथ कार्यक्रमों की शुरूआत के निर्देश मध्य प्रदेश की जनता को भावनात्मक रूप से छलने का प्रयास है। यह प्रदेश की जनता की भावनाओं से धोखा है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि 'शिवराज जी, कन्या पूजन के निर्णय का सदैव स्वागत है, लेकिन उनकी सुरक्षा का दायित्व भी सरकार का है, यहां पर हर रोज मासूम दरिंदगी का शिकार हो रही हैं। कमलनाथ ने कहा कि 'शिवराज जी हमारे समाज में बेटियों की सर्वत्र पूजा होती है


उनका सम्मान किया जाता है, यह हमारे सामाजिक संस्कार भी हैं, लेकिन क्या सिर्फ कन्या पूजन करना ही काफी है, उन्हें सुरक्षा देने का दायित्व सरकार का नहीं है? आंकड़े खुद स्थिति बयां कर रहे हैं, आपकी पूर्व की सरकार की बात करें या वर्तमान सरकार की, बहन-बेटियां ही सबसे ज्यादा असुरक्षित रही हैं।'कमलनाथ के मुताबिक 'आपकी सरकार इस दिशा में लापरवाह है। ऐसा लग रहा है कि स्थिति सरकार के नियंत्रण से बाहर हो चुकी है, मौत का आंकड़ा निरंतर बढ़ता जा रहा है।


एक समीक्षा बैठक के बाद आप भी गायब हैं। जरा उन मासूमों को सुरक्षा और समुचित इलाज देने का अपना दायित्व भी निभाइए।' 2014 में मंत्रालय में किया था कन्या पूजनट: राज्य सरकार ने आदेश निकाला है कि मप्र में अब कोई भी सरकारी कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है, तो बेटियों की पूजा से उसे आरंभ किया जाए। कड़ाई से शासन के समस्त विभाग और जिले इसका पालन करें। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम के दौरान 15 अगस्त 2020 को इसकी घोषणा की थी।


मप्र में इस तरह का आदेश पहली बार निकला है। शिवराज सिंह की पिछली सरकार में भी बेटियों की पूजा और पैर धोने के साथ कार्यक्रम शुरू किए जाते थे, लेकिन तब ऐसा आदेश नहीं था। इस बार यह व्यवस्था की गई है। अब आने वाले तमाम कार्यक्रम से पहले बेटियों की पूजा होगी। इसकी शुरूआत 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर होने वाले कार्यक्रमों से होगी।


बेटियों को पूजा नहीं, सुरक्षा चाहिए... 10 महीने में 3837 ज्यादती, 509 हत्या: मप्र में महिलाओं के साथ हुए अपराधों का ग्राफ 45920 पहुंच गया है। पुलिस मुख्यालय से मिला ये आंकड़ा महज जनवरी 2020 से अक्टूबर 2020 तक का है। इन आठ महीनों में 3837 महिलाओं के साथ ज्यादती की गई और 509 को तो मार डाला गया। हालांकि, 24 मार्च से 31 मई के 69 दिनों में प्रदेश के सभी जिलों में लॉकडाउन जारी रहा। इस दौरान संपत्ति संबंधी अपराधों में तो गिरावट आई, लेकिन महिलाओं के साथ अपराध जारी रहे। इस दौरान भी ऐसे 11 हजार से ज्यादा अपराध हुए। पुलिस ने इन्हें 21 अलग-अलग कैटेगरी में दर्ज किया है। वर्ष 2019 के 12 महीनों में महिलाओं से ज्यादती के 4675 केस दर्ज किए गए थे। अक्टूबर महीने तक ये आंकड़ा 3951 पर था।


वेब खबर

वेब खबर



प्रमुख खबरें

राज्य

राजनीति