मनरेगा से मिलता रहेगा गरीबों के हाथों को काम



कौशल किशोर चतुर्वेदी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना देश के गरीबों के हाथों को काम मुहैया कराती रहेगी। केंद्र सरकार लगातार इस योजना के जरिए गरीबों के रोजगार की चिंता कर रही है। कोविड 19 त्रासदी के दौर में यही योजना केंद्र सरकार की संवेदनशीलता से गरीबों के लिए वरदान साबित हो रही है। पंचायती राज, ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के विभाग ने मनरेगा के बजट में इस बार त्रासदी को देखते हुए 40 हजार करोड़ की बढ़ोतरी कर रिकार्ड बना दिया है। इससे एक बात तय है कि गरीबों के हित में यह योजना लगातार काम करती रहेगी। जब तक गरीब रहेगा, तब तक महात्मा गांधी राष्ट्रीय योजना गरीबों को रोजगार मुहैया कराती रहेगी। इसीलिए योजना को लगातार पारदर्शी, प्रभावी बनाने और ज्यादा बजट देने का काम केंद्र सरकार कर रही है


एक लाख करोड़ से ज्यादा राशि व्यय होगी : केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि वर्तमान कोविड समस्या के चलते काफी प्रवासी मजदूर वापस अपने गांव लौटे हैं। तात्कालिक व्ययवस्था हेतु रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत उन्हें रोजगार उपलब्ध करवाया जा रहा है। जिनके पास कोई जॉब कार्ड नहीं है, उन्हें जॉब कार्ड उपलब्ध कराने के निर्देश राज्यों को दिए गए हैं। प्रधानमंत्री जी के द्वारा मनरेगा बजट में 40 हजार करोड़ रुपए की राशि अतिरिक्त दी गई है, ताकि मजदूरों को ज्यादा रोजगार मिल सके। कुल बजट अब बढक़र एक लाख एक हजाऱ पांच सौ करोड़ रुपया हो गया है। यही नहीं 33 हजार 300 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत हो चुकी है और मंत्रालय ने 27 मई तक 26798 करोड़ रुपए की राशि जारी कर दी है।


योजना के इतिहास में पहली बार किसी वित्त वर्ष में मनरेगा अंतर्गत एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि व्यय की जाएगी। कृषि क्षेत्र भी रोजगार देने में सहायक होगा : महत्वपूर्ण बात यह है कि तोमर कृषि मंत्री भी हैं। उनका मानना है कि कोविड की स्थिति नियंत्रित होने पर लोग अपने पुराने रोजगार पर भी वापस लौट जाएंगे। कुछ लोग गांवों में ही रहने का फैसला ले सकते हैं। चूंकि ज्यादातर लोग कुशल मजदूर हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। भारत सरकार उनके लिए पर्याप्त रोजगार उपलब्ध करवाने की दृष्टि से ग्रामीण क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण, कृषि अधोसंरचना को बढ़ावा देने सहित अन्य कार्ययोजनाओं के माध्यम से भी इन्हें रोजगार देने का प्रयास करेगी।


एक दिन में 3.18 करोड़ मजदूरों को जॉब आफर: पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा के अंतर्गत 28 मई तक कुल 5.54 करोड़ मनरेगा कामगारों को जॉब आफर किया गया है और कुल 38.10 करोड़ से ज्यादा श्रम दिवस सृजित हो चुके हैं। 28 मई के दिन रिकार्ड 3.18 करोड़ मजदूरों को जॉब आफर दिया गया। यह संख्या 14 अप्रैल 2020 को करीब 14 लाख थी। मई 2019 की तुलना में मई 2020 में 50 प्रतिशत से ज्यादा जॉब आफर दिए जा रहे हैं। मनरेगा में एक अप्रैल 2020 से 20 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से औसत मजदूरी में बढोतरी की गई है। पिछले वर्ष की तुलना में यह 11 प्रतिशत से ज्यादा की बढोतरी है। पीएम ग्रामीण आवास और ग्राम सडक़ योजना भी: मजदूरों, गरीबों को रोजगार मुहैया कराने में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना भी महत्वपूर्ण साबित होंगी।


आवास योजना में 2.21 करोड़ स्वीकृत आवासों में से एक करोड़ 2 लाख 51 हजार आवास पूरे हो चुुके हैं तो 48 लाख आवासों की तीसरी/चौथी किस्त जारी हो चुकी है। इस योजना में 12 हजार 482 करोड़ की राशि राज्यों के पास उपलब्ध है। तो प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना में फेस-1 के अंतर्गत 6 लाख 46 हजार 408 किलोमीटर सडक़ स्वीकृत थी। इसमें से करीब 5 लाख 89 हजार 309 किलोमीटर सडक़ पूके ण हो चुकी हैं। फेस-2 के 50 हजार किलोमीटर सडक़ में से 49832 किमी सडक़ स्वीकृत और 35 हजार किमी से ज्यादा निर्मित हो चुकी हैं। फेस-3 में 1 लाख 25 हजार किमी में से 13 हजार 900 किमी सडक़ें स्वीकृत की जा चुकी हैं। करीब 17 हजार किमी सडक़ों का प्रस्ताव अगले एक महीने में स्वीकृत हो जाएगा। कोविड से निपटेगा ग्रामीण विकास मंत्रालय: केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय कोविड 19 से उत्पन्न स्थिति का डटकर सामना करने में कामयाब होगा। यह भरोसा है केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का। इस वित्त वर्ष 2020-21 में विभाग दो लाख पांच सौ करोड़ से ज्यादा की राशि ग्रामीण विकास के लिए खर्च करेगा। इनमें से 51 हजार करोड़ रुपए की राशि राज्यों को जारी की जा चुकी है।


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