हे धरती माता हमें माफ नहीं करना..!



जो पीढ़ी अपने पुरखों का आदर नहीं करती उसका भविष्य विनाशकारी होता है। वृक्ष हमारे पुरखे हैं। अकेले मध्यप्रदेश के नेशनल हाइवेज विस्तार में एक करोड़ से ज्यादा ऐसे पुरखे(बरगद, पीपल,आम,इमली,जामुन.. आदि) काटे गए जिनकी उम्र पचास से तीन सौ वर्ष की थी


विनाश की बुनियाद पर विकास के हाइवेज बन सकते हैं, इमारतें तानी जा सकती हैं लेकिन वृक्षों के बिना उनमें प्राण नहीं फूँके जा सकते। विकास की हवस में हमने अपनी ही आक्सीजन नली काट दी है। हरे-भरे राजमार्ग मरुभूमि में बदल दिए। परिणाम तापमान 47 डिग्री पहुंच गया। धरती माता बुखार से तप रही हैं। आसमान अंगारों के आँसू बहा रहा है। नदियां असमय विधवा हो गईं।


पहाड़ बूढ़े और जर्जर हो चले। जंगलों को सूखा रोग खा रहा है। प्रकृति अपने पुत्रों के अत्याचार से विकल है। और हम अपने श्मशान पर खड़े इंचटेप से समाज की ग्रोथ रेट नाप रहे हैं। ऐसे ह्रदयहीन विकास का सर्वनाश हो ! टर्की में तो एक पहाड़ को लिफ्ट एन्ड शिफ्ट कर दिया गया। यदि सड़क के मुकाबले पुराने दरख्त काटने पड़े तो ऐसी सड़क किस काम की।


यह क्रूर और निर्दय विकास है।अपने यहां तो सड़क की योजना बनने के साथ ही पेड़ कटने शुरू.. हाल यह कि सतना की एक अकेली प्लायवुड इंडस्ट्री असम को टक्कर दे रही है..। अधिकारियों और ऐसी इंडस्ट्रीज के अंतरसंबंध पता लगाएं तो आँखें फटी रह जाएंगी। सड़क के किनारे के पेंड़ बचाए जा सकते हैं। पुरानी सड़क को जस का तस रखते हुए उसके समानांतर भू अधिग्रहण कर सड़क बनाइए।


बमीठा से खजुराहो तक यही माडल अपनाया गया.. पुरानी सड़क और वृक्ष दोनों ही सही सलामत हैं। यहां विदेशी पर्यटक आते हैं इसलिए नककटी बचाने के चक्कर में पेंड़ बच गए। सड़कों के किनारे के पेंड़ काटना एक बड़े और ह्रदयहीन भ्रष्टाचार का नमूना है...जो भी इसमें लिप्त हैं उनका कल्याण कभी नहीं होगा..वे धन तो अर्जित कर लेंगे लेकिन वे तथा उनकी आल औलाद शापित जीवन जिएंगी...स्कंदपुराण में कहा गया है..हरे आम के पेंड़ को काटना पुत्रवध के समान है..। बरगद और पीपल काटना गुरू व इष्ट वध के सदृश है। इस पाप से वे कैसे बच सकते हैं।

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जयराम शुक्ला

जयराम शुक्ला

जयराम शुक्ला मध्यप्रदेश की पत्रकारिता के एक सशक्त हस्ताक्षर। राजनीति से लेकर समसामयिक विषयों पर आपकी जबरदस्त पकड़ है। लेखन शैली की विशेषता शुक्ला जी का एक अलग स्थान तय करती है। विंध्य में पत्रकारिता की पहचान और मध्यप्रदेश में वरिष्ठ पत्रकारों में शुमार जयराम शुक्ला ने मुख्यधारा के तमाम बड़े अखबारों को अपने अनुभव से संवारा है।



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