आतंक की राह से हटे पाकिस्तान वर्ना तबाही तय



पाकिस्तान पिछले कई दशकों से जम्मू कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए तरह -तरह की साजिशे करता रहा है, परंतु मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को जब से निष्प्रभावी किया है, तब से तो वह इस कदर बौखला उठा है कि अपनी साजिशों को अंजाम देने के लिए किसी भी हद तक गिरने से परहेज नहीं कर रहा है। आश्चर्य की बात तो यह है कि भारत के विरुद्ध दुनिया भर में दुष्प्रचार करने के बावजूद जब उसे कुछ भी हासिल नहीं हुआ ,तब भी वह अपनी हरकतों से बाज आने को तैयार नहीं है। उसकी हर नापाक हरकत पर भारत की ओर से मुंह तोड़ जवाब मिल रहा है। हाल ही में उसकी ओर से कश्मीर घाटी के गंगवार इलाके में अकारण गोलीबारी की गई थी, जिसमें भारतीय सेना के दो जवान शहीद हो गए थे। भारतीय सेना ने उसकी हिमाकत का माकूल जवाब देने के लिए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चल रहे तीन आतंकी शिविरों को तबाह कर दिया। सेना की कार्रवाई में कुख्यात आतंकी संगठनों हिज्बुल मुजाहिदीन एवं जैश ए मोहम्मद के लगभग तीन दर्जन आतंकी मारे गए और लगभग 10 पाकिस्तानी सैनिक ढेर हो गए। भारत के थल सेना अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत द्वारा पाकिस्तान को बार-बार चेतावनी दिए जाने का उस पर कोई असर नहीं हुआ तो सेना ने इस बार उसे सबक सिखाने के लिए तोपखाने का इस्तेमाल किया। गौरतलब है कि केंद्र में मोदी सरकार के गठन के बाद से पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए तीन बार भारतीय सेना स्ट्राइक कर चुकी है


सितंबर 2016 में उरी में आर्मी हेड क्वार्टर में आतंकी हमले के बाद भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक कर कश्मीर में चल रहे शिविरों को निशाना बनाया गया था। पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों के काफिले पर हुए आतंकी हमले के बाद से पाकिस्तानी सीमा के पांच किलोमीटर घुसकर शक्तिशाली बम बरसा कर बालाकोट में चल रहे आतंकी अड्डों को ध्वस्त कर दिया था। वायु सेना की कार्रवाई से पाकिस्तान की सरकार और सेना इस तरह घबरा उठी कि उसने दुनिया भर में गुहार लगाना शुरू कर दिया ,लेकिन उन्हें कहीं भी सहानुभूति हासिल करने में सफलता नहीं मिली। इसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि अब थका हारा पाकिस्तान अपने गिरेबान में झांकने की जरूरत महसूस करेगा, परंतु ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। सीमा पर उसकी नापाक हरकतों का जवाब देने के लिए भारतीय सेना ने इस बार तो तोपखाने का इस्तेमाल कर उसे हक्का-बक्काकर दिया। भारतीय सेना के पराक्रमी कार्रवाई से बौखलाई पाकिस्तानी सरकार ने भारतीय उच्चायुक्त को बुलावा भेजा और अपना विरोध दर्ज कराया ,जबकि उम्मीद की जा रही थी कि अब पाकिस्तान की ओर से भारत को यह आश्वासन मिलेगा की वह भविष्य में नियंत्रण रेखा के पार से कश्मीर के अंदर घुसपैठ कराने की कोशिशें नहीं करेगा ,परंतु पाकिस्तान से की गई हर उम्मीद अब तक बेमानी ही साबित हुई है। इसलिए सेना अध्यक्ष रावत के द्वारा उसकी हर हिमाकत के विरुद्ध न केवल उसे कड़ी चेतावनी दी जा रही है, बल्कि कठोर कदम भी उठाए जा रहे हैं।


जनरल रावत ने कहा कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से पाकिस्तान लगातार यहां अशांति फैलाने की कोशिशों में लगा हुआ है, ताकि सारी दुनिया को यह संदेश जाए कि यहां माहौल सामान्य नहीं है। बताया जाता है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 350 से अधिक आतंकियों का जमावड़ा किया गया है, जो केवल इस फिराक में है कि वे बर्फबारी शुरू होने के पहले ही अधिक से अधिक संख्या में कश्मीर घाटी में प्रवेश करने में कामयाब हो जाए ,ताकि कश्मीर में तेजी से सामान्य हो रहे माहौल में जहर घोल कर अपने मंसूबों को अंजाम दे सकें। उनकी साजिश को नाकाम करने के लिए सेना ने तोपों से गोले बरसा कर पीओके में चल रहे हैं तीनों आतंकी शिविरों को ध्वस्त कर दिया और चौथे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। भारतीय सेना का उद्देश्य आतंकी नेटवर्क को तहस-नहस करना था, जिसमें वह सफल हुई है। आतंकी शिविरों के नष्ट हो जाने से नियंत्रण रेखा के उस पार से कश्मीर घाटी में घुसपैठ कराने के पाकिस्तानी मंसूबों पर एक बार पानी फिर गया है। आश्चर्य की बात तो यह है कि भारत के हाथों बार-बार मुंह की खाने के बावजूद पाकिस्तान कोई भी सबक सीखने के लिए तैयार नहीं है। इसमें कोई संदेह नहीं है भारत की ओर से की गई इस तीसरी स्ट्राइक के बाद वह सारी दुनिया में फिर भारत के विरुद्ध दुष्प्रचार करने में जुट जाएगा ,परंतु उसे यह याद रखना चाहिए की विश्व जगत अब मोदी सरकार के साथ एकजुट हो चुका है और आतंकवाद के विरुद्ध भारत के हर अभियान में उसके साथ हैं।


दरअसल पाकिस्तान इस समय यह समझ ही नहीं पा रहा है कि आखिर किस राह पर चलकर वह अपना भला कर सकता है। वहां की सेना के हुक्मरान प्रधानमंत्री इमरान खान को अपनी कठपुतली बनाकर रखना चाहते हैं। सेना के इशारों पर नाचना ही उनकी नियति है। भारत के विरुद्ध जहर उगलना बंद करके वह कुर्सी पर बने नहीं रह पाएंगे, इसलिए संयुक्त राष्ट्र में भी उन्होंने यही किया और अपनी किरकिरी करा कर पाकिस्तान वापस लौटे। पाकिस्तान लौटकर उन्हें वाहवाही तो नहीं मिली उल्टे अपने देश में उन्हें जिल्लत झेलना पड़ी और यह सिलसिला थमने वाला भी नहीं है। सेना उन्हें केवल खिलोने के रूप में इस्तेमाल कर रही है। इमरान खान को सेना से कोई महत्व नहीं मिल रहा है, इसका नजारा देखने को मिल चुका है। विगत दिनों पाकिस्तानी सेना के अध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा ने देश के शीर्ष कारोबारियों के साथ तीन बैठक के कर ली ,परंतु प्रधानमंत्री इमरान खान को उनसे दूर रखा गया। इमरान खान चाह कर भी अपना विरोध दर्ज नहीं करा सके। उन्हें धीरे-धीरे यह समझ में आने लगा है कि वे कोई भी फैसला लेने के लिए स्वतंत्र नहीं है। इसलिए वे सैनिक हुक्मरानों को खुश करने की हर संभव कोशिश है कर रहे हैं और इसका सबसे आसान तरीका उन्हें यही समझ में आता है कि भारत के विरुद्ध अधिक से अधिक जगह जहर उगलते रहे। उसके बावजूद देश के अंदर और देश के बाहर उनकी स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। अपने देश की हर खुराफात की कीमत उन्हें अपनी प्रतिष्ठा खोकर बचाने पड़ती है ,परंतु इसके अलावा उनके पास कोई चारा भी नहीं है।


दरअसल यह इमरान खान का दुर्भाग्य है कि वे प्रधानमंत्री की कुर्सी पर तब आसीन हुए है, जब भारत में प्रधानमंत्री पद की बागडोर नरेंद्र मोदी के हाथों में है, जो आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई लड़ने के लिए कृतसंकल्प है। इसमें विश्व का जनमत भी मजबूती से उनके साथ खड़ा हुआ है। इमरान खान क्या पाकिस्तान के किसी भी प्रधानमंत्री ने यह अनुमान नही लगाया होगा कि भारत में एक दिन सत्ता की बागडोर ऐसे हाथों में होगी ,जो एक झटके में जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म कर देगी। प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल यह साहस दिखाया बल्कि दुनिया की बड़ी ताकतों को भी अपने पक्ष में खड़ा करने में कामयाबी हासिल कर ली। इमरान खान की स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि वे अब कहीं के नहीं रहे है। इमरान खान ने अब तक जितना बड़बोलापन दिखाया है, वह सब उन पर ही भारी पड़ा है। जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर जब उन्हें दुनिया में कहीं से भी सहानुभूति नहीं मिली तो उन्होंने पाक अधिकृत कश्मीर के लोगों को नियंत्रण रेखा पार कर भारतीय सीमा में घुसने के लिए उकसाया, ताकि वे लोग भारतीय सीमा में प्रवेश करें तो भारतीय सुरक्षा बल उन पर कार्रवाई करें और फिर पाकिस्तान इसे मानव अधिकार हनन का मुद्दा बनाकर दुनियाभर में भारत के विरुद्ध दुष्प्रचार का नया अभियान छेड़ सकें। लेकिन अगले दिन उन्हें अपनी गलती का एहसास हो गया और उन्होंने पाक के कब्जे वाले कश्मीर के लोगों को ऐसा न करने की सलाह दे डाली। अपने नए बयान में गिरगिट की तरह रंग बदलते हुए उन्होंने कह दिया कि अगर पाक अधिकृत कश्मीर के लोगों ने नियंत्रण रेखा पार कर भारतीय सीमा में घुसने का प्रयास किया तो यह भारत के जाल में फसने जैसा होगा और भारत को अपना इस्लामिक आतंकवाद का दावा सच करने का एक सबूत मिल जाएगा। इमरान खान के रोजाना बदलते बयानों से उनकी अपने ही देश में किरकिरी हो रही है और पाकिस्तान की जनता अब यह मानने लगी है कि जब तक इमरान खान प्रधानमंत्री कुर्सी पर आसीन है ,तब तक पाकिस्तान की बातों का दुनिया में कोई भरोसा नहीं करेगा।

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कृष्णमोहन झा

कृष्णमोहन झा

लेखक IFWJ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और डिज़ियाना मीडिया समूह के राजनैतिक संपादक है.



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