करतारपुर साहिब के लिए वीजा फ्री यात्रा शुरू, भारत की ओर से 3.8 किमी सड़क के किनारे लगाए जा रहे 8 हजार पौधे और 226 लाइटें



जालंधर। कई साल के इंतजार बाद अब सिख तीर्थ करतारपुर साहिब के लिए वीजा फ्री यात्रा शुरू होगी। 9 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कॉरिडोर का लोकार्पण करेंगे। पिछले साल भारत में 26 नवंबर को और पाकिस्तान में 28 नवंबर को कॉरिडोर का शिलान्यास किया गया था। कॉरिडोर में भारत की ओर बनी 3.8 किमी सड़क के किनारे 8 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। सर्विस लेन पर 226 लाइटें और मेन रोड पर 114 लाइटें लगाई गई हैं


अब तक करतारपुर साहिब की यात्रा के लिए श्रद्धालुओं को वीजा लेकर 120 किमी लंबी यात्रा करनी पड़ती थी। कॉरिडोर बनने के बाद 7.80 किमी की वीजा फ्री यात्रा के बाद गुरुघर के दर्शन किए जा सकेंगे। जो श्रद्धालु वीजा लेकर पाकिस्तान नहीं जा पाते थे, वे गुरदासपुर से 40 किमी दूर अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित कस्बा डेरा बाबा नानक के गुरुद्वारा शहीद बाबा सिद्ध सैन रंधावा से दूरबीन की मदद से करतारपुर साहिब का दर्शन करते थे।


भारत ने खर्च किए करीब 500 करोड़: लैंड पोर्ट्स अथॉरिटी आॅफ इंडिया (एलपीएआई) के अध्यक्ष गोविंद मोहन के मुताबिक, कॉरिडोर भारत में गांव मान से अंतरराष्ट्रीय सीमा तक 3.8 किलोमीटर लंबा है। इसे बनाने में 13 दिसंबर 2018 को तारबंदी के पास निशानदेही हुई थी। 5 अप्रैल 2019 को रोड पर मिट्?टी डालने का काम शुरू हुआ था। 31 अक्टूबर को सड़क बनाने का काम पूरा हो गया। कॉरिडोर की लागत भी शुरूआत में लगभग 90 करोड़ मानी जा रही थी, फिर यह बढ़कर 290 करोड़ हुई।


100 करोड़ कॉरिडोर के निर्माण पर तो 190 करोड़ जॉइंट चेक पोस्ट के निर्माण पर खर्च होने थे। जुलाई 2019 में केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने कहा था कि करीब 500 करोड़ की लागत से कॉरिडोर बन रहा है। पाकिस्तान ने 300 करोड़ रु. खर्च किए: करतारपुर कॉरिडोर पाकिस्तान की तरफ 4 किमी लंबा है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इमरान सरकार ने 9 महीने में 300 करोड़ रुपए खर्च करके इसे तैयार किया है।


भारत का एक रुपया पाकिस्तान के 2.21 रुपए के बराबर है। 28 नवंबर 2018 को लोकार्पण के बाद पाकिस्तान ने 31 जनवरी 2019 से यहां काम शुरू किया था, जो अक्टूबर में पूरा हो गया। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाकर 10 हजार होगी: पाकिस्तान के कॉरिडोर प्रोजेक्ट डायरेक्टर आतिफ माजिद ने बताया कि शुरूआत में भारत से हर दिन 5 हजार तीर्थयात्री दर्शन के लिए आ सकेंगे। बाद में इस संख्या को बढ़ाकर 10 हजार श्रद्धालु प्रतिदिन कर दिया जाएगा। यात्रियों के लिए 152 काउंटर बनाए जाएंगे। जीरो पॉइंट से 350 मीटर दूर बॉर्डर टर्मिनल बनाए जाएंगे। यात्रियों को बिल्कुल एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी।

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