सियासी उठापटक के बीच स्पीकर ने सीएम स्वामी को दी राहत, 6 दिन में लेंगे विधायकों के इस्तीफे पर फैसला



बेंगलुरु। कर्नाटक में चल रही सियासी उठापटक के बीच सीएम एचडी कुमारस्वामी के लिए मंगलवार का दिन थोड़ी राहत लेकर आया। विधानसभा स्पीकर केआर रमेश कुमार ने फैसला किया है कि वह 13 विधायकों के इस्तीफे के मामले को देखने के लिए कम से कम छह दिन का वक्त लेंगे। इस्तीफा देने वाले विधायकों में 10 कांग्रेस और 3 जेडीएस के हैं। स्पीकर का कहना है कि उन्हें सिर्फ पांच विधायकों के इस्तीफे ही सही फॉर्मैट में मिले हैं।  स्पीकर रमेश कुमार का कहना है, 'मैं जो भी कदम उठाऊंगा वह इतिहास बन जाएगा, इसलिए मैं कोई गलती नहीं कर सकता। मुझे यह पक्का करने की जरूरत है कि विधायकों के इस्तीफे स्वैच्छिक और असली हैं


' स्पीकर का यह कदम ऐसे वक्त में आया है जब निलंबित चल रहे कांग्रेस विधायक रोशन बेग ने इस्तीफा देते हुए कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार को एक और झटका दिया।  मंगलवार दोपहर अपना इस्तीफा सौंपने के बाद स्पीकर के दफ्तर से बाहर निकलते हुए बेग ने कहा कि वह बागी विधायकों के साथ नहीं जा रहे हैं। बेग ने कहा, 'मैं मुंबई या दिल्ली नहीं जा रहा हूं। स्टेट हज कमिटी का अध्यक्ष होने के नाते मैं एयरपोर्ट पर तीर्थयात्रियों के इंतजाम का मुआयना करने जा रहा हूं।'  रोशन बेग के इस्तीफे ने सत्ताधारी गठबंधन के लिए बहुमत के गणित को और कमजोर कर दिया है।


224 सदस्यों वाली कर्नाटक विधानसभा में दो निर्दलीय विधायक और इकलौते बीएसपी विधायक के समर्थन की बदौलत बीजेपी 108 के आंकड़े तक पहुंच सकती है। बहुमत का जादुई आंकड़ा 113 है। अगर बेग समेत 14 विधायकों के इस्तीफे मंजूर हो जाते हैं तो सदन में कांग्रेस-जेडीएस का संख्याबल घटकर 102 हो जाएगा। जब गठबंधन में बिखराव नहीं था उस वक्त स्पीकर समेत सरकार के साथ 119 विधायक थे। इनमें कांग्रेस के 79, जेडीएस के 37, 2 निर्दलीय और 1 बीएसपी विधायक थे।  स्पीकर ने फंसाया पेच  इस्तीफों की जांच करते हुए स्पीकर ने कहा कि 6 जुलाई को सौंपे गए 13 में से 5 इस्तीफे ही निर्धारित फॉर्मैट में थे।


इन पांच विधायकों में आर रामलिंगा रेड्डी, के गोपालैया, आनंद सिंह, के नारायण गौड़ा और प्रताप गौड़ा पाटिल का नाम है। स्पीकर ने कहा कि बाकी 8 विधायकों को दोबारा अपने इस्तीफे सौंपने होंगे।  स्पीकर का कहना है कि राज्यपाल वजूभाई वाला ने राजनीतिक हालात पर उन्हें दो खत भेजे हैं और उन्होंने भरोसा जताया है कि मैं संवैधानिक मयार्दाओं को बरकरार रखूंगा। स्पीकर ने यह भी बताया कि राज्यपाल ने उन्हें यह भी सुझाव दिया है वह इस्तीफों पर जल्द फैसला लें।


  12 और 15 जुलाई को 5 विधायकों को बुलाया  स्पीकर रमेश कुमार का कहना है, 'नियमों में साफ कहा गया है कि केवल स्पीकर को भरोसा हो जाए कि इस्तीफे स्वैच्छिक और सही हैं तभी उन्हें स्वीकार किया जा सकता है। अगर सब कुछ डाक के जरिए होगा तो मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं है।' दरअसल कुछ इस्तीफे कथित रूप से डाक के जरिए भेजे जाने के संदर्भ में स्पीकर ने यह बात कही। सदन के नियमों के मुताबिक इस्तीफे एक तय फॉर्मैट में होने चाहिए और वे स्पीकर को संबोधित करते हुए सौंपे गए हों।  स्पीकर का कहना है कि जिन पांच विधायकों के इस्तीफे सही फॉर्मैट में हैं, उनको 12 और 15 जुलाई को दो अलग-अलग बैच में बुलाया गया है। स्पीकर ने कहा, 'मुझे सोच-समझकर फैसला लेना होगा। भावी पीढ़ी मुझे एक आरोपी की तरह नहीं देखे, इसलिए मैं जनभावना, संवैधानिक प्रावधानों और नियमावली को ध्यान में रखकर निर्णय लूंगा।' 

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