जेट एयरवेज की राह अभी भी नहीं है आसान, आगे और मुश्किलें



नई दिल्ली। जेट एयरवेज के बोर्ड और चेयरमैन पद से कंपनी के संस्थापक नरेश गोयल ने इस्तीफा दे दिया है। इस बीच भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने कंपनी को 1,500 करोड़ रुपये की तत्काल मदद देने की घोषणा भी कर दी है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि 23 हजार कर्मचारियों वाली भारी-भरकम विमानन कंपनी का अब क्या होगा। कई ऐसे मुद्दे हैं, जिनपर कंपनी का भविष्य निर्भर करता है। जानते हैं, अब जेट एयरवेज के सामने क्या रास्ते हैं


   पूंजी डालने के सिवा कोई चारा नहीं  विमानन उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि जेट की वित्तीय सेहत तब बिगड़नी शुरू हुई, जब उसके दो प्रतिद्वंद्वियों किफायती विमानन सेवा प्रदाता कंपनियों स्पाइसजेट और इंडिगो ने प्राइस वॉर को पूरी तरह से एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया। आने वाले समय में भी दोनों कंपनियों द्वारा प्राइस वॉर को जारी रखने की उम्मीद है, जिसका मतलब यही है कि जेट की सेहत सुधारने के लिए कंपनी में पूंजी डालने के सिवा और कोई रास्ता नहीं है।


  निकट भविष्य में जेट एयरवेज को होने वाले नुकसान को भी टाला नहीं जा सकता और झटके से उबरने में कंपनी को केवल पर्याप्त मात्रा में पूंजी ही मदद कर सकती है। इसके अलावा, बहुत कुछ आने वाले समय में जेट के कर्जदाताओं द्वारा उठाए गए कदमों पर भी निर्भर करेगा, चाहे ज्यादा से ज्यादा पूंजी डालना हो या मालिक बदलना।  सरकार का रुख भी महत्वपूर्ण  विमानन क्षेत्र में सरकार की हिस्सेदारी काफी बड़ी हो गई है, जिससे यह तय होगा कि सरकार कौन सा रास्ता चुनती है।


बीते साल नवंबर में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा था कि जेट एयरवेज जैसी निजी विमानन कंपनियों को पटरी पर लाने का काम सरकार का नहीं, बल्कि जेट के प्रबंधन का है। सभी संभावनाओं पर विचार करने के बाद मौजूदा हालात में आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए सरकार द्वारा भारी-भरकम खर्च के साथ जेट को उड़ान भरने देने की संभावना नहीं है।


लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सरकार जेट एयरवेज के साथ किंगफिशर से अलग व्यवहार करेगी?  अभी भी अधर में कंपनी का भविष्य  ध्यान में रखने वाली बात यह है कि भारी वित्तीय संकट में फंसी जेट एयरवेज की कथा का पहला अध्याय समाप्त हो चुका है। अब देखना यह है कि क्या अगला अध्याय कुछ अलग होगा। हालांकि, इस बात में दो राय नहीं कि जेट एयरवेज का भविष्य अभी भी अधर में है।  फिलहाल जेट एयरवेज पर कुल 26 बैंकों का कर्ज है। इसमें कुछ प्राइवेट और विदेशी बैंक भी शामिल हैं। पब्लिक सेक्टर बैंक में केनरा बैंक, बैंक आॅफ इंडिया, सिंडिकेट बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, इलाहबाद बैंक शामिल हैं। अब इस लिस्ट में एसबीआई और पीएनबी का नाम भी जुड़ जाएगा। एयरलाइंस पर करीब 8 हजार करोड़ का कर्ज है। जेट के पायलट पहले ही अल्टीमेटम दे चुके हैं कि अगर 31 मार्च तक उनका बकाया नहीं दिया गया तो वह किसी फ्लाइट को नहीं उड़ाएंगे।  

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