मस्जिद को जमीन देने के विरोध में हिन्दू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट दायर की पुनर्विचार याचिका



नई दिल्ली। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सोमवार को हिंदू पक्ष की तरफ से पहली पुनर्विचार याचिका दाखिल हुई। अखिल भारतीय हिंदू महासभा की तरफ से वकील विष्णु शंकर जैन ने यह याचिका दायर की। याचिका में मस्जिद बनाने के लिए मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ जमीन देने का विरोध किया गया है


हिंदू महासभा ने अदालत के फैसले से बाबरी मस्जिद गिराने को गैरकानूनी बताने वाली टिप्पणी हटाने की मांग भी की है। इससे पहले मुस्लिम पक्ष की तरफ से फैसले को लेकर पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की जा चुकी हैं।


याचिका दाखिल करने वाले वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा- हम मस्जिद बनाने के लिए मुस्लिम पक्ष को उनकी पसंद के मुताबिक 5 एकड़ जमीन देने के फैसले को चुनौती दे रहे हैं। हमने अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी को भी हटाने की मांग की है, जिसमें विवादित जमीन पर बनी मस्जिद गिराने की घटना को गैरकानूनी बताया गया है।


मुस्लिम पक्ष ने कई रिव्यू पिटीशन दाखिल कीं: अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ 2 दिसंबर को पहली पुनर्विचार याचिका दायर हुई थी। जमीयत के सेक्रेटरी जनरल मौलाना सैयद अशद रशीदी ने यह याचिका दाखिल की। रशीदी मूल याचिकाकर्ता एम सिद्दीक के कानूनी उत्तराधिकारी हैं।


6 दिसंबर को आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के समर्थन से 5 पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं। ये याचिकाएं मुफ्ती हसबुल्लाह, मौलाना महफुजुर रहमान, मिस्बाहउद्दीन, मोहम्मद उमर और हाजी महबूब की तरफ से दाखिल की गईं। अदालत ने विवादित जमीन हिंदू पक्ष को सौंपी: 40 दिनों की लगातार सुनवाई के बाद 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने अयोध्या की विवादित जमीन हिंदू पक्ष को सौंपी थी। अदालत ने कहा था- विवादित जमीम पर मंदिर का निर्माण ट्रस्ट करेगा, जिसे 3 माह के भीतर केंद्र सरकार को बनाना है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया था।

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