चुनाव आचार संहिता की आड़ में चल रहा है अफसरों को ब्लेकमैल करने का खेल



भोपाल। उपचुनाव भले ही प्रदेश की अट्ठाईस सीटों पर ही हो रहे हैं लेकिन चुनाव आचार संहिता का खामियाजा प्रदेश भर के सरकारी कर्मचारियों और अफसरों को भुगतना पड़ रहा है। इनमें भी खासकर परिवहन और आबकारी विभाग के अफसरों की शामत आ रही है


आचार संहिता के कारण चुनाव आयोग में इन विभागों के अफसरों की लगातार सच्ची झूठी शिकायतें हो रही हैं। इन शिकायतों को राजनीतिक दलों से ज्यादा आरटीआई कार्यकर्ता या कथित तौर पर पत्रकार कर रहे हैं।


इन शिकायतों के आधार पर इन विभागों के मुख्यालयों में बैठे अफसर भी चुनाव आयोग की आड़ में विभागीय अफसरों को निपटा रहे हैं। भोपाल में आबकारी विभाग के एक बड़े अफसर को ऐसी ही शिकायतों के चलते हटा दिया गया है।


सूत्रों का कहना है कि इंदौर से चुनाव आयोग को ढेÞर सारी शिकायतें मिली हैं और अधिकांश शिकायतें परिवहन और आबकारी विभाग को लेकर है। मजेदार बात यह है कि विभागों के आला अफसर इन शिकायतों की सच्चाई को जानते हैं लेकिन जाहिर है कि चुनाव आयोग इन फर्जी शिकायतों के बारे में नहीं जानता है।


उपचुनावों की आड़ में शिकायतों का यह खेल भी एक तरह से ब्लेकमैलिंग का धंधा बन गया है। इसके शिकार कई प्रभावशाली अफसर हो रहे हैं। शिकायत करने वाले अफसरों को सीधे केरियर खराब करने की धमकी देकर पैसा वसूलने में जुटे हैं। सरकार के यह दोनों ही विभाग एक तरह से कमाऊ पूत की तरह हैं। हालांकि दबाव डालना, फर्जी शिकायतें करना, हर काम को चुनाव से जोड़ना, पैसे लेकर शिकायतें करना या शिकायत वापस लेने जैसे कृत्य भी चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के दायरे में आते हैं। चुनाव आयोग को इस फर्जी ब्लेकमैलिंग के खिलाफ भी कार्रवाई करना चाहिए।


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