संघ ने कहा- अयोध्या विवाद पर न्यायालय का फैसला सभी को मन स्वीकार करना चाहिए



नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने बुधवार को कहा- अयोध्या विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला सभी को खुले मन से स्वीकार करना चाहिए। आरएसएस ने कहा कि फैसला कुछ भी हो, लेकिन देश में सौहार्द कायम रखना सभी की जिम्मेदारी है। आरएसएस ने ट्वीट करके इस बात की जानकारी दी


हिंदू संगठन ने एक अन्य ट्वीट में कहा, अयोध्या विवाद पर अदालत के फैसले के बाद बनने वाले हालात पर चर्चा के लिए, राजधानी में वरिष्ठ पदाधिकारियों की 2 दिवसीय बैठक बुलाई गई है।


आरएसएस के प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने कहा, राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के बारे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला कुछ दिनों में आने की उम्मीद है। जो भी फैसला हो, सभी को उसे खुले मन से स्वीकार करना चाहिए। देश में सामाजिक समरसता बनी रहे, ये सभी की जिम्मेदारी है।


बैठक में भी इस मुद्दे पर विचार किया जा रहा है।


हाईकोर्ट के फैसले के वक्त देश ने एकता दिखाई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि 2010 में अयोध्या की विवादित जमीन पर इलाहाबाद हाइकोर्ट के फैसले से पहले सरकार, राजनैतिक दलों और नागरिकों ने देश को बांटने की कोशिशें नाकाम की थीं। उन्होंने कहा था कि यह उदाहरण है कि एक संगठित प्रयास किस तरह देश को मजबूत रख सकती है। आरएसएस ने प्रचारकों की बैठक टाली: 17 नवंबर को चीफ जस्टिस के सेवानिवृत्त होने से पहले इस मामले में फैसला आने की उम्मीद है। यह बैठक आरएसएस प्रचारकों के सम्मेलन के तौर पर 30 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच हरिद्वार में प्रस्तावित थी। बाद में आरएसएस ने प्रचारकों की बैठक टाल दी और वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक का स्थान बदलकर दिल्ली कर दिया।


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