आरटीआई में खुलासा: सरकार ने वीवीआईपी चार्टर्ड फ्लाइट्स सेवाओं के लिए 822 करोड़ रु. का भुगतान नहीं किया



नई दिल्ली। सरकार ने एयर इंडिया को नवम्बर 2019 तक ली गई वीवीआईपी चार्टर्ड फ्लाइट्स सेवाओं के लिए 822 करोड़ रु. का भुगतान नहीं किया है। इसके अलावा बचाव अभियान 12.65 करोड़ रु. और विदेशी अतिथियों को लाने और ले जाने के लिए 9.67 करोड़ रु. भी सरकार पर बकाया है


यह जानकारी सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत बुधवार को एयरलाइन्स ने सेवानिवृत्त कमांडर लोकेश बत्रा को दी। एयर इंडिया वीवीआईपी चार्टर्ड फ्लाइट्स सेवाओं के तहत राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को विमान सेवाएं उपलब्ध करवाती है। इसके बिल का भुगतान विभिन्न मंत्रालयों द्वारा किया जाता है।


दरअसल, कमांडर बत्रा ने एयर इंडिया से वीवीआईपी चार्टर्ड फ्लाइट्स के साथ ही विभिन्न सरकारी अधिकारियों पर बकाया राशि का विवरण मांगा था। उन्होंने एयरलाइन्स से सरकार के पास बकाया राशि की जानकारी बिल और इनवाइस के साथ उपलब्ध कराने की मांग की थी।


क्रेडिट पर जारी टिकटों की राशि भी बकाया: एयर इंडिया ने बताया है कि मार्च 2019 तक सरकारी अधिकारियों को क्रेडिट पर जारी टिकटों के लिए भी 526.14 करोड़ रु. बकाया है। इनमें से 236.16 करोड़ रु. का भुगतान पिछले तीन साल से नहीं किया गया है।


पैसे की रिकवरी होने की संभावना नहीं पर इस बकाया राशि पर 281.82 करोड़ रु. का अकाउंटिंग चार्ज भी लगाया गया है। पिछले दिनों एयर इंडिया ने बकाया राशि का भुगतान न होने पर सरकारी एजेंसियों को क्रेडिट पर टिकट जारी करने से इनकार कर दिया था। सरकार एयर इंडिया को बेचने की घोषणा कर चुकी: वहीं, कर्ज में दबी एयर इंडिया की 100% हिस्सेदारी बेचने की घोषणा सरकार पहले ही कर चुकी है। सरकार ने 17 मार्च तक बोलियां आमंत्रित की हैं। शर्तों के मुताबिक, खरीदार को एयर इंडिया के सिर्फ 23,286.5 करोड़ रुपए के कर्ज की जिम्मेदारी लेनी होगी। एयरलाइन पर कुल 60,000 करोड़ रुपए का कर्ज है। यानी करीब 37,000 करोड़ रुपए के कर्ज का भार सरकार खुद उठाएगी। खरीदार को एयर इंडिया का मैनेजमेंट कंट्रोल भी सौंपा जाएगा।


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