चीन के साथ सीमा पर तनाव के बीच राष्ट्रपति से मिले पीएम मोदी, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के कई मुद्दों पर हुई चर्चा



नई दिल्ली। चीन के साथ लगी सीमा पर तनाव के बीच रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। एक समाचार एजेंसी के मुताबिक, करीब आधे घंटे की इस मुलाकात में दोनों के बीच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के कई मुद्दों पर चर्चा हुई। दूसरी तरफ, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी अहम ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, भारत इतिहास के बेहद नाजुक मोड़ से गुजर रहा है। हम एक साथ कई आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। लेकिन हमें जो चुनौतियां दी जा रही हैं, उसका सामना करने का हमारा निश्चय दृढ़ रहना चाहिए। पीएम मोदी शुक्रवार को अचानक लेह पहुंच गए थे


नीमू में प्रधानमंत्री ने सेना, एयरफोर्स और आईटीबीपी के जवानों से मुलाकात की। उनका हालचाल जाना, उनका उत्साह बढ़ाया। ऐसा कर पीएम मोदी ने चीन को साफ संदेश दिया। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को बता दिया गया है कि भारत सरकार पूरी तरह अपने सैनिकों के साथ खड़ी है। पीएम मोदी को पहले सेना ने ताजा हालात के बारे में ब्रीफ किया, जिसके बाद उन्होंने फ्रंटलाइन पर तैनात जवानों से खुद बात की। इस दौरान पीएम जहां बंकरनुमा एक चैंबर में बैठे थे, वहीं जवान उनके सामने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए कुर्सियों पर थे।


& विस्तारवाद के बहाने चीन पर निशाना: लेह में पीएम मोदी ने चीन की 'विस्तारवादी' नीति पर हमला बोला था। उन्होंने चीन का नाम लिए बिना कहा कि 'विस्तारवाद का युग समाप्त हो चुका है और अब विकासवाद का वक्त है।' पीएम मोदी ने चीन को साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 'किसी पर विस्तारवाद की जिद सवार हो तो वह हमेशा विश्व शांति के सामने खतरा है। इतिहास गवाह है कि ऐसी ताकतें मिट जाती हैं।' नाम नहीं लिया फिर भी बौखलाया चीन: पीएम मोदी के लेह दौरे से सबसे बड़ा संदेश चीन को गया है। मोदी के नीमू दौरे से चीन को मिर्ची तो लगी है।


तभी तो उनके विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि 'किसी को भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे तनाव और बढ़े।' चीन ने सीमा पर जैसी आक्रामक मोचार्बंदी की है, उसे पीएम मोदी के इस दौरे से पता लग गया होता कि भारत पीछे हटने वाला नहीं। लाइन आॅफ एक्चुअल कंट्रोल की रक्षा के लिए भारत की सेना और राजनीतिक ताकतें भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। चीन को यह भी संदेश गया होगा कि धीमे-धीमे कब्जा करने वाली उसकी रणनीति को भारत सहन नहीं करेगा।


जिस तरह से सैनिकों के साथ पीएम मोदी ने बातचीत की, उससे साफ है कि भारत ने चीन के साथ बातचीत का रास्ता खुला छोड़ा है मगर किसी भी आक्रामक कार्रवाई का करारा जवाब देने को तैयार है। हम बांसुरी वाले कृष्ण के उपासक, सुदर्शन चक्रधारी के भी: सैनिकों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, यह भूमि उनके बलिदानों को याद रखेगी। आपने हर भारतीय को गौरवान्वित किया है। मोदी ने कहा, लद्दाख से लेकर कारगिल तक आपके साहस को सभी ने देखा है। लद्दाख भारत का ताज है और यह भूमि हमारे लिए पवित्र है। हम देश के लिए अपने जीवन का बलिदान करने के लिए तैयार हैं। दुनिया भारत की ताकत को जानती है, हमारे दुश्मनों के कपटपूर्ण मंसूबे सफल नहीं होंगे। उन्होंने यह संदेश भी दिया कि भारत के संयम को अन्यथा नहीं देखा जाना चाहिए। मोदी ने कहा, हम वो लोग हैं, जो बांसुरी बजाने वाले भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं, लेकिन हम वो लोग भी हैं जो भगवान कृष्ण को मानते हैं, जिन्होंने सुदर्शन चक्र धारण किया था।


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