पाक के गृहमंत्री ने अपनी ही सरकार कोसा, कहा- कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का समर्थन पाने में रहे विफल



इस्लामाबाद। पाकिस्तान के गृह मंत्री ब्रिगेडियर एजाज अहमद शाह ने बुधवार को कहा कि इस्लामाबाद कश्मीर मुद्दे पर अपने रुख से अंतरराष्ट्रीय समुदाय का समर्थन पाने में विफल रहा। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी सरकार को देश की छवि खराब करने के लिए जिम्मेदार ठहराया। एजाज ने एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को हम पर भरोसा ही नहीं है


हम कहते हैं कि भारत ने कश्मीर में कर्फ्यू लगाया और वहां के लोगों को दवाएं नहीं दे रहे, तो कोई हमारा विश्वास नहीं करता। लेकिन इंटरनेशनल कम्युनिटी भारत का भरोसा करती है। लोग हमारे देश को गंभीरता से नहीं लेते। एजाज ने पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो, परवेज मुशर्रफ को भी देश की छवि बिगाड़ने के लिए जिम्मेदार बताया।


कुरैशी का दावा- भारत ने कश्मीर को बंदी जेल में बदला: इससे एक दिन पहले ही पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) सत्र के दौरान दावा किया था कि भारत ने अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर को इस ग्रह की सबसे बड़ी ह्यबंदी जेलह्ण में बदल दिया है। वहां मानवाधिकारों का सख्ती से हनन किया जा रहा है।


भारत ने कुरैशी के आरोपों को खारिज किया और कहा कि जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान मनगढ़ंत कहानी कह रहा है। वह खुद ऐसा देश है जो सीमा पार से आतंकवाद का संचालन कर रहा है। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र में भी पाकिस्तान को किसी भी देश का समर्थन नहीं मिला था। अमेरिका, फ्रांस और रूस जैसे देशों ने भी कश्मीर मुद्दे को लेकर भारत का साथ दिया है।


पाक का दावा- 60 देशों का समर्थन मिला: वहीं, पाकिस्तान ने यूएनएचआरसी में जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार की स्थिति को लेकर कहा कि 60 देशों से उसे समर्थन मिला है। सार्वजनिक तौर पर देशों का नाम उजागर नहीं किया गया। जेनेवा में यूएनएचआरसी में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने कहा कि इन देशों की एक सूची भारतीय प्रतिनिधिमंडल को सौंपी जाएगी। इससे जुड़े लोगों ने पाक के दावे को खारिज किया: हालांकि, इस मुद्दे से जुड़े लोगों ने इससे इनकार किया। उन्होंने कहा कि पाक को 57 सदस्यीय संगठन इस्लामिक सहयोग संगठन (आईओसी) और चीन का समर्थन मिला है। हालांकि, इंडोनेशिया जैसे कई ओआईसी सदस्यों ने अपने भारतीय समकक्षों के साथ बातचीत के दौरान इस कदम से खुद को दूर कर लिया।

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