ताकतवर राजनेता के अभयदान से बच गया सोम का लायसेंस,ठंडी पड़ी लायसेंस निरस्त करने की कार्रवाई



भोपाल। अदालत से सजायाफ्ता होने के बाद भी लगता है सोम डिस्टलरी के साथ कमलनाथ सरकार नरमी बरत रही है। कायदे से अब तक सोम का लायसेंस रद्द हो जाना चाहिए था। लेकिन आबकारी कमिश्नर के निर्देश के बाद भी सोम के खिलाफ केवल इंदौर हाईकोर्ट में ही केविएट दायर की गई है। जबलपुर और ग्वालियर हाईकोर्ट में आबकारी विभाग के आला अफसरों ने केविएट दायर नहीं की थी। आबकारी विभाग से रवानगी के पहले पूर्व कमिश्नर रजनीश श्रीवास्तव ने केविएट लगाने के निर्देश विभाग के आला अफसरों को दिए थे। हालांकि वे खुद भी सोम डिस्टलरी का लायसेंस रद्द करने से बचते रहे और सोम के जवाब के बाद इस मामले की फाइल को उन्होंने प्रमुख सचिव के पास नहीं पहुंचाया था


अभी नए कमिश्नर राजेश बहुगुणा ने काम तो संभाल लिया है लेकिन जाहिर है विभाग को समझने में फिलहाल उन्हें समय लगेगा। लगभग पखवाड़ा बीतने के बाद भी सोम डिस्टलरी ने इस मामले में अदालत जाने का रूख नहीं किया है और ना ही विभाग ने कोई कार्रवाई की। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में कमलनाथ सरकार में ताकतवर माने जाने वाले एक वरिष्ठ राजनेता ने सोम डिस्टलरी को अभयदान दे दिया है। लिहाजा, उसने भी अब अपने लायसेंस को निरस्त होने से बचाने के लिए कोई और कदम नहीं उठाया है। यहां दो तथ्य उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के शासनकाल में प्रदेश में शराब के कारोबार पर सोम का एकछत्र राज्य था।


दूसरा यह कि नए नियुक्त हुए आबकारी कमिश्नर राजेश बहुगुणा कभी दिग्विजय सिंह के ओएसडी रह चुके हैं और उनके नजदीकी माने जाते हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि सोम के मामले को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ का रवैया सख्त है बावजूद इसके लायसेंस निरस्त होने की कार्रवाई अब शायद ही रफ्तार पकड़ पाए। उल्लेखनीय है कि मुरैना में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में सजायाफ्ता होने के मामले में आबकारी अधिनियम के तहत सोम डिस्टलरी का लायसेंस निरस्त करने की कार्रवाई शुरू की गई थी। आबकारी कमिश्नर ने इसके लिए नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब देने के लिए कहा था। 24 अक्टूबर को जवाब देने की आखिरी तारीख थी। सोम डिस्टलरी ने जवाब तो दिया लेकिन समयावधि बीतने के एक दिन बाद यानि 25 अक्टूबर को।


इस बिना पर ही कमिश्नर सोम डिस्टलरी का लायसेंस निरस्त कर सकते थे। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सोम डिस्टलरी और उसके मालिक जगदीश अरोरा को 23 साल पुराने शराब तस्करी के एक मामले में मुरैना में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने पिछले महीने 27 सितम्बर को चार अलग-अलग मामलों में न्यायालय उठने तक के कारावास और जुमार्ने की सजा दी थी। अभियोजन के अनुसार, 1996 में मुरैना सेल्स टैक्स बेरियर पर आबकारी विभाग के अफसरों ने तीन ट्रकों में भरी सोम डिस्टलरी की सन्नी माल्ट व्हिसकी की 616 पेटियां बरामद की। यह शराब जारी परमिट की समयसीमा खत्म होने के बाद भी रायसेन से दिल्ली परिवहन की जा रही थी। शराब के परिवहन के लिए जारी परमिट सिर्फ एक साल के लिए ही जारी हुआ था।


23 साल पुराने इस मामले के तीन आरोपी तो फरार हैं लेकिन डिस्टलरी और उसके मालिक को मुरैना कोर्ट में यह सजा दी गई। इस मामले में आबकारी अधिनियम की विभिन्न धाराओं में डिस्टलरी के मालिक जगदीश अरोरा और ड्रायवर पूरन सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। लंबी सुनवाई के बाद इस मामले में अदालत ने जगदीश अरोरा को न्यायालय उठने तक के कारावास से दंडित किया है। इसके अलावा शराब के अवैध परिवहन के दो मामलों में दो-दो हजार रूपए का जुर्माना और दो मामलों में पांच-पांच सौ रूपए के जुर्माने किए गए हैं। अदालत ने शेष आरोपियों के फरार रहने के कारण बरामद शराब और ट्रक के मामले का फिलहाल कोई निराकरण नहीं किया है। आबकारी अधिनियम की धारा 31 सी के तहत सजायाफ्ता होने के कारण सोम डिस्टलरी का लायसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की प्रक्रिया इस समय चल रही है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में जगदीश अरोरा की सजा पूरी हो चुकी है और इस लिहाज से वो आबकारी अधिनियम के तहत सजायाफ्ता की श्रेणी में है।

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