खत्म नहीं हुआ कर्नाटक संकट: अधर में लटका बागी विधायकों का भविष्य, ठहराए जा सकते हैं आयोग्य



बेंगलुरु।  कर्नाटक में 18 दिनों तक चले राजनीतिक ड्रामे के बाद मंगलवार को एचडी कुमारस्वामी सरकार शक्ति परीक्षण में असफल साबित हुई और उसे इस्तीफा देना पड़ा। कर्नाटक सियासी संकट अब भी खत्म होता नजर नहीं रहा है। कांग्रेस के 12 और जेडीएस के 3 बागी विधायकों के भविष्य का फैसला अब भी अधर में लटका हुआ है


विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने अभी तक विधायकों के इस्तीफे और कांग्रेस-जेडीएस द्वारा बागी एमएलए को अयोग्य घोषित करने की मांग पर कोई फैसला नहीं लिया है।  बागी विधायकों में ज्यादातर बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में बनने जा रही नई बीजेपी सरकार में मंत्री बनना चाहते हैं। हालांकि उन्हें अब सबसे पहले स्पीकर का सामना करना होगा।


येदियुरप्पा ने कथित रूप से इन बागी विधायकों में से कम से कम कुछ को मंत्री बनाए जाने का वादा किया है। बीजेपी नेता पर अपने वादे को पूरा करने का दबाव होगा।  केंद्रीय नेतृत्व के इशारे का इंतजार बीजेपी सूत्रों ने कहा कि येदियुरप्पा सीएम बनने के लिए केंद्रीय नेतृत्व की स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं।


बताया जा रहा है कि येदियुरप्पा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के दौरान 5 बागी विधायकों और बीजेपी के 5 एमएलए के साथ शपथ ले सकते हैं। किसी भी सूरत में येदियुरप्पा को असंतोष से जूझना पड़ेगा क्योंकि मंत्री पद के दावेदारों की तादाद बहुत ज्यादा है। कम से कम 30 पूर्व मंत्री हैं।  येदियुरप्पा को दो निर्दलीय विधायकों एच नागेश और आर शंकर के लिए भी जगह बनानी होगी। ये दोनों ही विधायक पिछली कुमारस्वामी सरकार में मंत्री थे।


शंकर के ऊपर अयोग्य ठहराए जाने की तलवार लटक रही है क्योंकि वह कांग्रेस के सदस्य थे। कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य पीआर रमेश कहते हैं, 'बागी विधायकों के सही फार्मेट में इस्तीफा सौंपने से पहले अयोग्य ठहराये जाने वाली याचिकाएं स्पीकर को सौंप दी गई थीं।'  विधानसभा या विधान परिषद में फिर से चुनकर आना होगा  इसके साथ-साथ बागी विधायकों को विधानसभा या विधान परिषद में फिर से चुनकर आना होगा ताकि वे मंत्री बन सकें। संविधान की 10वीं अनुसूची के अनुच्छेद 165 के मुताबिक दल बदल निरोधक कानून के तहत अयोग्य ठहराए गए विधायक अगला चुनाव लड़ सकते हैं लेकिन वे तब तक मंत्री नहीं बनाए जा सकते हैं जब तक कि वे दोबारा चुनकर वापस नहीं आ जाते। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी अयोग्य ठहराए जाने जाने पर स्टे आॅर्डर लेना चाहती है ताकि उन्हें मंत्री बनाया जा सके।  

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