जेट ऐयरवेज को वित्तीय संकट से निकालने कोशिश हुई तेज, एसबीआई ने बनाया प्लान



नई दिल्ली। जेट एयरवेज को वित्तीय संकट से निकालने की कोशिशें तेज हो गई हैं। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक आॅफ इंडिया (एसबीआई) ने इसके लिए रेजॉल्यूशन प्लान लगभग तैयार कर लिया है। इस पर अंतिम फैसला लेने के लिए बुधवार को एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार और वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच नॉर्थ ब्लॉक स्थित आॅफिस में बैठकों का दौर चला


इसके बाद रजनीश कुमार ने दो टूक शब्दों में कहा कि जेट एयरवेज के लिए रेजॉल्यूशन प्लान लगभग तैयार है।  बैंक का इरादा जेट एयरवेज को वित्तीय संकट से बाहर निकालना है, ताकि जेट एयरवेज की उड़ानें जारी रहें और जेट एयरवेज बंद न हो। इसे दिवालिया घोषित करना अंतिम विकल्प है। यही कारण है कि इसको बचाने के लिए कर्जदाताओं का ग्रुप हरसंभव कोशिश कर रहा है। ऐसा एविएशन सेक्टर और हवाई यात्रा करने वाले लोगों के लिए हित में है।


हालांकि उन्होंने रेजॉल्यूशन प्लान में क्या-क्या है, इसका खुलासा नहीं किया।  जेट एयरवेज को कर्ज देने वाले बैंकों के समूह की अगुवाई कर रहे एसबीआई के चेयरमैन ने कहा कि हम मानते हैं कि यह सभी के हित में है कि जेट एयरवेज उड़ती रहे। अबू धाबी की साझेदार कंपनी एतिहाद से इस दिशा में बातचीत चल रही है। जेट एयरवेज को दिवालिया घोषित करने का मतलब इसे बंद करना होगा।


सूत्रों के अनुसार, एसबीआई के चेयरनैन रजनीश कुमार ने बुधवार को सबसे पहले विमानन सचिव प्रदीप सिंह खरोला और उसके बाद प्रधानमंत्री के सचिव नृपेंद्र मिश्र के साथ मीटिंग की और फिर वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की। उसके बाद रेजॉल्यूशन प्लान को लेकर वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उनकी लंबी मीटिंग चली।


  सूत्रों के अनुसार, एसबीआई ने जेट एयरवेज को वित्तीय संकट से उबारने के लिए जो रेजॉल्यूशन प्लान तैयार किया गया है, उसमें कई शर्तें रखी गई हैं। एसबीआई चाहता है कि जेट एयरवेज के हायर मैनजमेंट में तुरंत बदलाव हो। हाई प्रोफेशनल लोगों को इसकी कमान सौंपी जाए, ताकि जेट एयरवेज के वित्तीय प्रदर्शन में सुधार होना सुनिश्चित हो। भविष्य में जेट एयरवेज के परिचालन, नियुक्ति और अन्य जो भी फैसले लिए जाएं, उसकी सूचना सरकार को दी जाए। वित्तीय सहायता के रूप में जो भी पैकेज राशि दी जाए, उसका एक निश्चित समय में वापसी भी सुनिश्चित हो। एक टीम बनाई जाए, जो जेट एयरवेज की परिचालन की निगरानी कर सके। इस वक्त जेट एयरवेज के ऊपर 8,200 करोड़ रुपये का कर्ज है और उसे मार्च अंत तक 1,700 करोड़ रुपये का भुगतान करना है। अगर एयरलाइन धाराशायी होती है तो 23,000 नौकरियां खतरे में होंगी।  

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