कांग्रेस में नहीं खत्म हो रही कलह: सिब्बल ने फिर पार्टी को घेरा, कहा-सोनिया ने पार्टी चुनाव का वादा किया था, लेकिन अब तक कुछ साफ नही



नई दिल्ली। कांग्रेस की पार्टी की कलह खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। पार्टी के 23 असंतुष्टों नेताओं के पत्र के बाद से कांग्रेस में मचे बवाल को थामने की सोनिया गांधी की कोशिशों का असर भी अब खत्म होता दिखाई पड़ रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने इस मामले को एक बार फिर उठाया है। रिपोर्ट के अनुसार कपिल सिब्बल का कहना है कि सोनिया गांधी ने पार्टी नेताओं के साथ खुली बातचीत कर आंतरिक चुनाव कराने का वादा किया था


करीब एक महीने बीतने के बाद भी अभी तक यह साफ नहीं हो पा रहा है कि ये चुनाव कब कराए जाएंगे। राहुल गांधी के फिर अध्यक्ष बनने पर नहीं दिया सीधा जवाब: कांग्रेस में राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के सवाल पर सिब्बल ने सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा। राहुल के अध्यक्ष बनने पर सिब्बल ने बोला कि जब यह बात चर्चा के लिए सामने आएगी तब देखा जाएगा। अभी बिना किसी आधार के चर्चा का वह कोई जवाब नहीं देंगे। राहुल की वापसी से पार्टी में फर्क पड़ने के सवाल पर सिब्बल ने कहा कि मुझे इस बारे में पता नहीं है।


उन्होंने कहा कि यह सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि पार्टी में किस तरह से संविधान की प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है। इसमें कांग्रेस के सभी महत्वपूर्ण लोगों के साथ विचार विमर्श भी काफी अहम है। इंडस्ट्रीज को अधिकतम सहयोग और किसान...: रिपोर्ट के अनुसार सिब्बल ने मौजूदा किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि एक ऐसा कानून जरूरी है जिसमें किसानों को उनकी उपज की न्यूनतम समर्थन मूल्य (टरढ) की गारंटी हो।


उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब इंडस्ट्रीज को अधिकत सहयोग मिल रहा है उस समय किसान न्यूनतम समर्थन की मूल्य की मांग के लिए आंदोलन कर रहे हैं। बिना सोचे समझे निर्णय ले रही सरकार: पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने जो कुछ भी किया है वह बिना सोचे समझे किया है। उन्होंने कहा कि चाहे वह नोटबंदी हो, जीएसटी या फिर कृषि कानून। सरकार ने बिना पूरी तरह विचार विमर्श किए ही चीजों को गलत तरीके से हैंडल किया है। सिब्बल ने कहा कि यह कुछ वैसा ही जैसे सल्तनत में फैसले लिए जाते थे।


फैसले पत्थर पर लकीर जैसे लिए जा रहे हैं। ऐसा लग रहा है जैसे हम मध्यकालीन भारत में पहुंच गए हों। असंतुष्टों को मनाने के लिए सोनिया ने की थी मीटिंग: मालूम हो कि पिछले 6 सालों में लोकसभा के साथ ही विभिन्न राज्यों में पार्टी की हार का सामना कर रही कांग्रेस के 23 नेताओं ने पिछले साल अगस्त में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी में मजबूत बदलाव लाने, जवाबदेही तय करने, नियुक्ति प्रक्रिया को मजबूत बनाने और हार का आकलन करने की मांग की थी। इन नेताओं में पांच पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस कार्यसमिति के कई सदस्य, मौजूदा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शामिल थे। इन नेताओं ने पार्टी में ऊपर से लेकर नीचे तक बदलाव की मांग की थी। इसके बाद पिछले साल दिसंबर में सोनिया गांधी ने पार्टी के असंतुष्ट नेताओं से मुलाकात का फैसला किया था।


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