वित्तीय संकट से जेट एयरवेज पर संकट, अब सिर्फ उड़ रहे हैं 41 प्लेन: डीजीसीए



नई दिल्ली। वित्तीय संकट से जूझ रही जेट एयरवेज के परिचालन पर इसका बहुत ही बुरा असर दिख रहा है। डॉरेक्टोरेट जनरल आॅफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) यानी नागर विमानन महानिदेशायल ने मंगलवार को बताया कि अभी जेट एयरवेज के सिर्फ 41 एयरक्राफ्ट ही उड़ रहे हैं जो उसके बेड़े की मूल क्षमता 119 विमानों का सिर्फ एक तिहाई है


कर्ज के बोझ तले दबी यह एयरलाइन अभी कर्जदाताओं और अपने बड़े साझेदार एतिहाद एयरवेज के साथ रेस्क्यू डील की कोशिश कर रही है।  डीजीसीए ने एक बयान में बताया कि स्थिति गंभीर है और आने वाले हफ्तों में जेट अपने उड़ रहे विमानों की संख्या और घटा सकती है। नकदी संकट से जूझ रही जेट एयरवेज ने सोमवार को अपने 4 और विमानों को उड़ान भरने से रोक दिया था।


पट्टे पर लिए विमानों का किराया नहीं चुकाए जाने के चलते अब उसके सिर्फ 41 विमान ही उड़ान भर रहे हैं। इस वजह से उसकी तमाम उड़ानें रद्द हो गई हैं।  जेट एयरवेज एक अरब डॉलर (करीब 6,895 करोड़ रुपये) से भी ज्यादा के कर्ज में डूबी है। इस वजह से वह बैंकों, सप्लायरों, पायलटों को समय पर भुगतान नहीं कर पा रही है।


इनमें से कुछ ने एयरलाइन के साथ लीज डील को खत्म कर दिया है।  डीजीसीए ने यह भी कहा है कि ऐसे पायलट, केबिन क्रू और ग्राउंड स्टाफ, जो किसी भी तरह के तनाव की शिकायत कर रहे हैं, उन्हें ड्यूटी पर नहीं लगाया जाना चाहिए।


महानिदेशालय ने साथ में यह भी हिदायत दी है कि जेट एयरवेज को अपने विमानों का नियमित तौर पर मेनटेनंस करना चाहिए, भले ही वे फिलहाल ग्राउंडेड हों।  जेट संकट गहराने पर सक्रिय हुआ नागर विमानन मंत्रालय  इस बीच, नागर विमानन मंत्री सुरेश प्रभु ने मंगलवार को जेट एयरवेज के मामले में अपने मंत्रालय के सचिव को आपात बैठक करने के निर्देश दिए। प्रभु ने यह निर्देश ऐसे समय में जारी किया है जब कर्ज के भारी बोझ से दबी जेट एयरवेज बड़ी संख्या में अपने विमानों को उड़ान भरने से रोक रही है। इस वजह से उसकी तमाम उड़ानें रद्द हो गई हैं। साथ ही वह भारी नकदी संकट का सामना भी कर रही है।  

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