वर्चुअल रैली में एक्चुअल सिंधिया.....



भाजपा की गुरूवार को आयोजित वर्चुअल रैली में 'मूक उपस्थिति' दर्ज करवाने के बावजूद ज्योतिरदित्य सिंधिया कई तरह से अपना एक्चुअल यानि वास्तविक कद दिखाने में सफल रहे हैं। निश्चित ही जोशीला भाषण, जबरदस्त स्वागत, समर्थकों का हुजूम और गगनभेदी जयकारों के आदी लोगों को इसका महत्व समझाना आसान नहीं है। तब भी नहीं, जबकि इस पूरे आयोजन में इनमें से किसी भी परंपरागत राजनीतिक तत्व का कोई प्रावधान ही नहीं रखा गया था। लेकिन सिंधिया की भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ मौजूदगी रही गहरे अर्थ वाली। वह पहले ही वीडियो सन्देश के माध्यम से कार्यकर्ताओं को इस रैली में शामिल होने के लिए प्रेरित कर चुके थे


कार्यक्रम में उन्हें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के अलावा मध्यप्रदेश के दो केन्द्रीय मंत्रियों थावरचंद गेहलोत और नरेन्द्र सिंह तोमर के साथ स्थान दिया गया। सिंधिया इस मौके पर एक भी मर्तबा असहज नहीं दिखे। न तब, जबकि उनकी पूर्ववर्ती कांग्रेस पार्टी पर भाजपा ने गरियाने की स्थिति तक आरोप जड़े और न ही तब भी जब इस दौरान आपातकाल को लेकर कांग्रेस की रीति-नीतियों को जमकर कोसा गया। आप कह सकते हैं कि जब सिंधिया कांग्रेस छोड़ ही चुके हैं तो फिर इस दल की निंदा से भला वह क्यों विचलित होने लगे, लेकिन इसमे छिपा एक तथ्य गौर करने लायक है। सिंधिया ने न तो इस सब पर भारी उत्साह का प्रदर्शन किया और न ही इस से किसी भी तरह विपरीत रूप से प्रभावित होते नजर आए।


इस कॉलम में पहले भी लिखा जा चुका है कि सिंधिया को यदि भाजपा में लम्बी पारी खेलना है तो उन्हें इस दल को दिल से अपनाना होगा। आज लगा कि ऐसा हो रहा है। शिवराज सिंह चौहान और वीडी शर्मा ने जेपी नड्डा के सम्बोधन के दौरान अपने स्थान से खड़े होकर करतल ध्वनि की। यह प्रसंग मुझे कई साल पीछे खींच ले गया। अटल बिहारी वाजपेयी तब वाकई भाजपा में पूजे जाते थे। एक आम चुनाव के समय वह कुछ पल के लिए भोपाल के स्टेट हेंगर पर आए। भाजपा के अब दिवंगत हो चुके दो नेता वहां कुछ देर से पहुंचे। तब तक प्रोटोकॉल वाले यह सन्देश दे चुके थे कि वीवीआईपी मूवमेंट शुरू हो रहा है। यानी पूर्व प्रधानमंत्री अटलजी वापस विमान की तरफ जा रहे हैं। यह सुनते ही दोनों बुजुर्ग नेताओं के कदम अकल्पनीय रूप से तेज हो गए।


वे 'साठ साल के बूढ़े या साठ साल के जवान!' की गति से उस जगह के लिए लपके, जहां से अटल जी निकल रहे थे। इस प्रयास में एक नेताजी की वेशभूषा का निचला हिस्सा कुछ उलझ गया लेकिन नेताजी ने इसकी परवाह नहीं की। कपडा ठीक करने का काम पूरा हो पाने से पहले ही वह अटलजी के सम्मान में उनके सामने झुक गए। जब विमान उड़ गया तो एक पत्रकार ने नेता का ध्यान उनके कपड़े की तरफ दिलाया। वह बुजुर्ग बोले, 'भैया, इससे जो दिखा, उसका मेरे लिए कोई महत्व नहीं है, लेकिन यदि अटलजी को चेहरा न दिखा पाता तो मुझ पर बहुत असर पड़ जाना तय था। वाजपेयी के सामने नेताजी ने जो भावभंगिमा अपनाई, आज वही एक्सप्रेशन भोपाल में मौजूद रहकर दिल्ली में आसीन नड्डा के लिए खड़े होते शिवराज में दिखाई दिए। वैसे ही भाव रैली में कमोबेश पूरा समय सिंधिया भी धारण किये रहे।


तो 'धारयति इति धर्म:' की शैली में सिंधिया आज नए राजनीतिक धर्म को पूरी तरह अंगीकार करते नजर आ गए। कहते हैं कि भक्ति में अपार शक्ति है। सिंधिया को यह शक्ति अब भाजपा से मिलना है। राज्यसभा में जाकर वह इस पार्टी से इसकी पहली किस्त वसूल चुके हैं। अब विधानसभा के उपचुनाव और शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल के विस्तार की बारी है। जहां सिंधिया रही-सही कीमत मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इस प्रक्रिया की उनकी सबसे अच्छी बात यह कि वह इसके लिए किसी दम्भ से भरे नजर नहीं आते हैं। शिवराज सिंह चौहान तो चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद भी पहले की ही तरह सहज और सरल हैं। लेकिन सिंधिया भाजपा में कितना सहज रह पाएंगे, यह भविष्य के गर्त में है। यह तय है कि विधानसभा के टिकट और मंत्रिमंडल के मामले में वह दान की बछिया के दांत न गिनने जैसी मजबूर उदारता नहीं दिखाएंगे। किन्तु बहुत ही सौम्य तरीके से खेले जा रहे इस राजनीतिक व्यापार में उनका संयमित व्यवहार तारीफ पाने का हकदार तो बनता ही है। जो लोग मानते थे कि भाजपा के लिए सिंधिया का लगाव वर्चुअल यानी आभासी मामले से आगे नहीं बढ़ पाएगा, शायद आज के इस वास्तविक लगाव को देखकर उन्हें अपनी धारणा बदलनी पड़ जाए।


प्रकाश भटनागर

प्रकाश भटनागर

प्रकाश भटनागर वरिष्ठ पत्रकार हैं और भोपाल तथा इंदौर से प्रकाशित एल एन स्टार दैनिक समाचार पत्र के संपादक है। यह कालम अखबार के प्रथम पृष्ठ पर पहले कालम में प्रकाशित होता है, उसी को हम वेबखबर में भी प्रकाशित करते हैं। प्रकाश पिछले तीन दशक से भोपाल के कई प्रमुख अखबारों, दैनिक देशबंधु रायपुर और भोपाल, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण सहित अन्य अखबारों में काम करते रहे हैं। लेखक अपनी तल्ख राजनीतिक टिप्णियों और विश्लेषण के कारण मध्यप्रदेश की पत्रकारिता में अपनी विशेष पहचान रखते हैं।



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