रोग से मिल-जुलकर लड़ने का समय



प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं। लोगों के बीच चिंता का माहौल है। वे अब इस रोग को लेकर और भयभीत हैं। विपक्ष भी चिंता प्रकट कर रहा है। अपनी तरह से। दिग्विजय सिंह को शिकायत है कि क्यों कर शिवराज के खिलाफ पुलिस ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने के लिए प्रकरण दर्ज किया? खैर, शिवराज का कोरोना से पीड़ित होना इस बात की अनिवार्यता को एक बार फिर स्थापित कर गया है कि क्यों इस वायरस को जरा भी हलके में नहीं लिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कदम-कदम पर सावधानी बरती। पूरे प्रदेश से इस रोग से बचाव के उपाय अपनाने के लिए अपील करते रहे


मंत्रिमंडल की बैठक हो या कोई और अवसर, शिवराज मास्क के बिना नहीं दिखे। सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन उन्होंने किया। ऐसे में यकीनन उनसे कोई बहुत ही मामूली चूक हुई होगी, जिसके चलते वह खुद ही इस रोग की चपेट में आ गए हैं। तो सोचिये जरा कि हम तो छोटी नहीं, बल्कि बहुत बड़ी चूक को खुद ही अंजाम देने पर तुले रहते हैं। मास्क लगाने में हिचकते हैं। किसी से दूरी बनाए रखने से पहले यह सोचते हैं कि कहीं अगला हमें डरपोक न समझ ले। बल्कि हम तो और महान हैं। यदि कोई मास्क लगाकर हमसे बात करे तो यूं जताते हैं गोया कि हमें कुछ सुनायी ही नहीं दिया हो। उस से कहते हैं कि पहले वह मास्क हटाए, फिर हमसे बात करें।


शिवराज ने ऐसा नहीं किया फिर भी वह कोरोना से संक्रमित हो गए तो जरा सोचे कि फिर हम किस दिशा में जा रहे हैं? किस खतरे को खुद के साथ ही साथ पूरे समाज के लिए आमंत्रित कर रहे हैं! लोग आमादा हैं कि कोरोना के भयावह संक्रमण के बावजूद बकरीद हमेशा की तरह ही भीड़-भाड़ के बीच मनाएंगे। रक्षाबंधन पर भी पहले के जैसे ही आपस मे मिलकर मौज मस्ती करेंगे। उन्हें यह शिकायत खाये जा रही है कि क्यों भोपाल में एक बार फिर लॉकडाउन कर दिया गया है। वे नागवारी से भरे हैं कि यदि सड़क पर बगैर मास्क लगाए निकल जाओ तो पुलिस पकड़ लेती हैं।


तो इस मानसिकता के लोग यह समझ लें कि कोरोना से सम्बंधित नियमों/सावधानियों का पालन करना क्यों जरूरी है। दरअसल हमारी विचित्र किस्म की मानसिकता ही हमारी सबसे बड़ी दुश्मन है। एक हार्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टर से बात हुई थी। उन्होंने कहा कि दिल का खयाल रखने सम्बन्धी बात करो तो ज्यादातर लोग यह सोचकर मुंह बिचका लेते हैं कि उन्हें भला यह दिक्कत कभी भी कैसे हो सकती है। यही सोच हमारे लिए कोरोना के खतरे को कई-कई गुना बढ़ा चुकी है। कोई संक्रमित हुआ, हम उसकी खबर सुनकर चिंता जता देते हैं और फिर पहले की ही तरह कोरोना से जुडी तमाम सावधानियों को ताक पर रखकर अपना काम करने लग जाते हैं।


हम हंसते हैं कि सोशल मीडिया पर नोट चूमते हुए कोरोना को चुनौती देने वाला कोई शख्स इसकी चपेट में आ गया। हम खिल्ली उड़ाते हैं कि लोगों को चूमकर इस बीमारी से बचाने का दावा करने वाला एक ढोंगी खुद ही कोरोना संक्रमित होकर मर गया। लेकिन अपने गिरेहबान झांकिए तो पाएंगे कि हममें से ज्यादातर खुद ऐसे लोगों से अलग नहीं हैं। सचमुच यह डरपोक होने का समय है। सावधान होने का वक़्त है। केवल इतना ही नहीं, भले ही आप पर दूसरों को भी डरपोक बनाने की तोहमत लगे, लेकिन इस दिशा में जागरूकता का लगातार प्रयास करें। यह इस रोग से मिल-जुलकर लड़ने का समय है। इस काल में सावधानी न बरतने की बहादुरी का प्रदर्शन दरअसल घोर मूर्खता का परिचय देने से अलग और कुछ भी नहीं है। हमारी प्रार्थना है कि शिवराज सहित कोरोना से प्रभावित प्रत्येक शख्स जल्दी और पूरी तरह स्वस्थ हो और प्रार्थना यह भी कि शेष लोगों में इस रोग के प्रति जागरूकता का सही मायनों में प्रसार संभव हो सके।


प्रकाश भटनागर

प्रकाश भटनागर

प्रकाश भटनागर वरिष्ठ पत्रकार हैं और भोपाल तथा इंदौर से प्रकाशित एल एन स्टार दैनिक समाचार पत्र के संपादक है। यह कालम अखबार के प्रथम पृष्ठ पर पहले कालम में प्रकाशित होता है, उसी को हम वेबखबर में भी प्रकाशित करते हैं। प्रकाश पिछले तीन दशक से भोपाल के कई प्रमुख अखबारों, दैनिक देशबंधु रायपुर और भोपाल, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण सहित अन्य अखबारों में काम करते रहे हैं। लेखक अपनी तल्ख राजनीतिक टिप्णियों और विश्लेषण के कारण मध्यप्रदेश की पत्रकारिता में अपनी विशेष पहचान रखते हैं।



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